
Motihari: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर आए दिन कई मामले सामने आते रहते है. इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग पर अक्सर सवाल उठते रहें हैं. लेकिन मोतिहारी के सिविल सर्जन कार्यालय में अजीब तरह का मामला सामने आया है. यहां एक जिंदा डॉक्टर को मृत बना दिया गया. और उसके नाम पर वेतन भुगतान से लेकर बीमा की राशि सहति अन्य पैसे को हड़पने की कोशिश की गई. वहीं, इसका खुलासा विशेष दल की जांच के बाद हुआ.
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दरअसल मोतिहारी में वर्ष 2008 से कार्यरत डॉ. अमृता जायसवाल कई वर्षों से लापता है. इस जानकारी का फायदा उठा कर उनके नाम से पैसा निकासी के लिए सिविल सर्जन के स्टोनों ने साजिश रची और डॉ. अमृता जायसवाल को मृत घोषित कर दिया. साथ ही फर्जी कागजात बनाने के बाद बिल पास कराने के लिए सिविल सर्जन के पास पहुंच गए.
स्टोनो मनोज शाही ने सिविल सर्जन को अंधेरे में रखकर उन्हें बताया की डॉ जायसवाल ने वर्ष 2013 में वीआरएस ले लिया है इसलिए उन्हें सेवा लाभ सहित अन्य भुगतान करने का आदेश दिया जाए. इसके बाद सिविल सर्जन ने भुगतान का आदेश भी कर दिया. लेकिन भुगतान की इतनी बड़ी राशि देख कर सिविल सर्जन ने डॉ अमृता जायसवाल से सम्बंधित कागजातों की जांच की तो पाया कि अमृता जायसवाल वर्ष 2008 से ड्यूटी से गायब है. फिर भी उनके पास वर्ष 2006 से लेकर 2013 तक का वेतन भुगतान, सेवा लाभ, ग्रुप बीमा की राशि सहित अन्य भुगतान करने के लिए कागजात पेश किया गया.
इसके बाद उन्होंने आनन-फानन में त्रीस्तरीय जांच टीम का गठन किया. इसने स्टोनों की पूरी साजिश की पोल खोल दी. वहीं, जांच में पाया गया कि छौरादनों प्रखण्ड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बेला में डॉक्टर अमृता वर्ष 2006 तक पदस्थापित थी और उनका वेतन 2006 तक भुगतान हुआ है. इसके बाद का कोई कागजात नहीं है.
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इधर, डॉ. अमृता जायसवाल के इम्प्लाई डीटेल्स में जो मोबाईल नम्बर 7544044040 दिया गया है. दरअसल वो सिविल सर्जन के स्टोनों मनोज शाही का मोबाईल नंबर है, आधार कार्ड मुम्बई का है और इम्प्लाई डीटेल्स डॉ जायसवाल का, पता मोतिहारी का है तो बैंक एकाउंट पटना का है.
अब पूरे मामले में जांच टीम ने डॉ अमृता जायसवाल के कागजातों पर सवाल उठाते हुए सिविल सर्जन के स्टोनो मनोज शाही पर सख्त करवाई करने की अनुशंसा की है. इसके बाद डॉ जायसवाल ने मोतिहारी के सिविलसर्जन को मैसेज कर के दावा किया है कि वो पिछले कुछ वर्षों से ओमान में है और वह जीवित है.
