
दुनिया की नजरें इस समय अमेरिका पर टिकी हुई हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया संकेतों ने मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा दिया है. CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने जानकारी दी है कि अमेरिकी सेना शनिवार से ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है.हालांकि अभी तक अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है. वॉशिंगटन से आ रही इन खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. दिलचस्प बात यह है कि ब्लैक हिस्ट्री मंथ के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा, लेकिन पर्दे के पीछे तेज कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां जारी हैं.
बैठक में क्या-क्या हुआ?
ट्रंप की टीम ने उन्हें ऑप्शन्स दिए हैं.सूत्र बताते हैं कि अगर ट्रंप हरी झंडी दिखाते हैं, तो हमला तुरंत हो सकता है. लेकिन अभी वो मंथन कर रहे हैं. सीबीएस न्यूज में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि शनिवार तक हमला संभव है. ये खबर उन लोगों से आई है जो मामले से वाकिफ हैं. ट्रंप पहले भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं, लेकिन इस बार बात आगे बढ़ती दिख रही है. क्या ये सिर्फ धमकी है या सच में कुछ बड़ा होने वाला है? आम अमेरिकियों को चिंता हो रही है कि कहीं ये मिडिल ईस्ट में नई जंग न छेड़ दे.
पेंटागन ने बढ़ाया अलर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंटागन मिडिल ईस्ट से कुछ सैन्य कर्मियों को अस्थायी रूप से हटा रहा है. इसका मकसद संभावित ईरानी जवाबी हमले के लिए तैयारी करना है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया के लिहाज से जरूरी है.
पेंटागन की तैयारी क्यों?
पेंटागन ने भी कमर कस ली है. रिपोर्ट के मुताबिक, वो मिडिल ईस्ट से कुछ पर्सनल को टेम्परेरी शिफ्ट कर रहे हैं. वजह? अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान जवाबी अटैक कर सकता है. सीबीएस न्यूज ने कहा,
“पेंटागन आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट से कुछ लोगों को कुछ समय के लिए हटा रहा है, क्योंकि वह ईरान के संभावित जवाबी हमले के लिए तैयार है. ये कदम बताता है कि अमेरिका रिस्क नहीं लेना चाहता. ट्रंप की टीम सोच रही है कि हमला हो तो कैसे, और न हो तो क्या. मिडिल ईस्ट पहले से ही उबल रहा है, इजरायल-हमास टेंशन, हूती अटैक्स सब मिलाकर ये फैसला बड़ा रिस्की लगता है.
ट्रंप का पुराना रुख और अब की सिचुएशन
ट्रंप को ईरान से पुरानी अदावत है. 2018 में उन्होंने न्यूक्लियर डील तोड़ी थी, और अब फिर से टेंशन. लेकिन 2026 में, ब्लैक हिस्ट्री मंथ इवेंट में वो जेस्चर करते दिखे, जैसे कुछ नहीं हुआ. फोटो में व्हाइट हाउस की ईस्ट रूम में वो हाथ हिला रहे हैं, लेकिन पीछे क्या चल रहा है? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर हमला हुआ तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, और ग्लोबल इकोनॉमी हिल जाएगी. अमेरिका के सहयोगी क्या कहेंगे? यूरोप, सऊदी सबकी नजरें ट्रंप पर टिकी हैं. क्या ट्रंप चुनावी फायदे के लिए ये कर रहे हैं? या सच में सिक्योरिटी इश्यू है? अभी कुछ साफ नहीं, लेकिन हवा में तनाव महसूस हो रहा है.
अब आगे क्या होगा आगे?
फैसला वीकेंड के बाद आएगा, लेकिन दुनिया की नजरें वॉशिंगटन पर हैं. अगर हमला हुआ तो ईरान क्या करेगा? उनके पास मिसाइल्स हैं, वो अमेरिकी बेस टारगेट कर सकते हैं. अमेरिका भी तैयार है, लेकिन जंग से किसी का भला नहीं.
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीनों से तनाव बढ़ा है. ईरान ने अमेरिका की हाल की कार्रवाइयों और आर्थिक दबावों पर नाराजगी जताई है. ऐसे में अगर ट्रंप हमला मंजूर करते हैं, तो क्षेत्रीय स्थिति बेहद संवेदनशील हो जाएगी.
पूरी दुनिया हैरान, सब पिस जाएंगे?
अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट पर, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ेगा. विशेषज्ञों ने चेताया है कि क्षेत्रीय देशों को भी इस संकट के लिए तैयार रहना होगा.
ट्रंप हमला करने की फिक्स नहीं कर पा रहे डेट?
रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी हमला करने या नहीं करने के बीच विचार कर रहे हैं. उनके निर्णय की समयसीमा इस सप्ताहांत से आगे बढ़ सकती है.

