US-Venezuela Conflict: ट्रंप वेनेजुएला के तेल-गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर अमेरिका का कब्जा चाहते हैं. वो वेनेजुएला में अपनी कठपुतली सरकार बनवाना चाहते हैं. इसलिए पहले उन्होंने मादुरो को गिरफ्तार कराया और अब वहां की कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिग्स को धमकी दे रहे हैं. वेनेजुएला से जैसे संकेत आ रहे हैं उससे लगता नहीं कि वहां कठपुतली सरकार बनवाना ट्रंप के लिए आसान होगा. ट्रंप ने वेनेजुएला में जो किया, सरल शब्दों में कहें तो जैसे उन्होंने मादुरो को उठवा लिया, उससे वैश्विक कूटनीति में एक नई तरह की अराजकता आकार लेने लगी है. सोचिए कोई नियम नहीं है, कोई कानून नहीं है, कोई रोक-टोक नहीं है. ट्रंप की देखादेखी अब कोई भी ताकतवर देश अपने कमजोर दुश्मन देश के राष्ट्रप्रमुख को रातों-रात उठवा लेगा. इसलिए अब हम ट्रंप के इस अराजक मॉडल का विश्लेषण करेंगे. 

ताइवान में ट्रंप का वेनेजुएला मॉड्यूल चलाएगा चीन? 

72 घंटे पहले तक वेनेजुएला के राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो अब अमेरिका की जेल में हैं. अमेरिकी कानून की नज़र में वो अपराधी हैं. अमेरिकी कोर्ट में मादुरो का भविष्य तय होगा. लेकिन जिस तरह मादुरो को अमेरिका लाया गया, उसके बाद वर्ल्ड डिप्लोमेसी में अराजकता वाला मॉडल चर्चा के केंद्र में हैं. ट्रंप ने वेनेजुएला में जो किया है उसपर सबसे तीखी प्रतिक्रिया चीन की आई, लेकिन अपनी हड़प नीति के लिए कुख्यात चीन ट्रंप के एक्शन से बहुत खुश है. जिनपिंग और उनकी सलाहकार मंडली में ताइवान को लेकर ट्रंप के वेनेजुएला मॉडल की चर्चा हो रही है. चीन ताइवान में ट्रंप के वेनेजुएला मॉडल को लागू करने की साजिश कर सकता है. यानी चीन ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते को उठवा सकता है. मित्रो ये महज अटकलें नहीं है.भारत में चाइनीज राजदूत शू फेइहोंग ने अपने देश का इरादा भी जता दिया है. उन्होंने कहा है कि ताइवान चीन का हिस्सा रहा है और इस पर कोई विवाद नहीं है. चीन साफ कह रहा है कि ताइवान ना अतीत में कभी देश था, ना भविष्य में देश रहेगा. यानी अगर ताइवान ने अपनी आजादी की बात मजबूती से रखी तो चीन राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते को किडनैप करा सकता है. एक हफ्ते पहले यानी 29 और 30 दिसंबर को ही चीन ने ताइवान को चारो तरफ से घेरकर सैन्य अभ्यास किया और अपना इरादा भी जता दिया था, हालांकि तब तक वेनेजुएला वाली घटना नहीं हुई थी. लेकिन आपको याद होगा कि इसी तरह अगस्त, अक्टूबर और नवंबर में अमेरिका ने भी वेनेजुएला के आसपास युद्धाभ्यास किया था. ट्रंप ने वेनेजुएला में जो किया है उससे मुस्लिम देशों का खलीफा बनने का सपना देखनेवाले अर्दोआन भी मन ही मन बहुत खुश है. समझिए अर्दोआन की नजर भी अपने पड़ोसी देश साइप्रस औऱ ग्रीस पर है.

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दुनिया के लिए पैदा हुई नई आराजकता 

तुर्किए ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर अवैध कब्जा किया है. तुर्किए की नजर साइप्रस के दूसरे इलाकों पर भी है. तुर्किए एजियन सागर में ग्रीस के कई द्वीपों पर कब्जा किया हुआ है. अब सोचिए अर्दोआन किसी भी दिन सैन्य कार्रवाई कर साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टो डौलिडेस और ग्रीस के पीएम क्यरिआकोस को बंदी बना सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो ट्रंप कैसे अर्दोआन को रोक पाएंगे. ट्रंप अगर कोई सवाल उठाते हैं तो तुर्किए वेनेजुएला का उदाहरण दे देगा. अर्दोआन कह सकते हैं कि हमने तो वही किया तो आपने वेनेजुएला में किया. ये कैसी अराजक स्थिति होगी. ये संकट सिर्फ तुर्किए का नहीं है. ट्रंप का चहेता आसिम मुनीर भी अपने बॉस के पदचिन्हों पर चलते हुए अफगानिस्तान में तालिबान के प्रमुख मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा के अपहरण की साजिश रच सकता है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लेकर तालिबान और पाकिस्तान में टकराव हो चुका है.अफगानिस्तान ने मुनीर की आतंकी सेना की बॉर्डर पर जमकर पिटाई की थी. तब से मुनीर अफगानिस्तान के खिलाफ साजिश रच रहा है. अब ट्रंप के वेनेजुएला मॉडल से सीखते हुए मुनीर अफगानिस्तान में भी तालिबान की टॉप लीडरशीप को अपने कब्जे में लेने की साजिश रच सकता है. सोचिए ट्रंप ने जिस अराजकता फैलाई है उससे दुनिया में कितने वॉर फ्रंट खुल सकते हैं. ये जंग वहां भी शुरू हो सकती है, जहां ट्रंप ने सीजफायर कराने का दावा किया था. 

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छोटे देशों पर मनमानी करेंगे बड़े देश? 

ट्रंप ने इसी साल अगस्त में अजरबैजान-आर्मेनिया में शांति समझौता कराया था. दावा किया गया था कि 35 साल से चल रही जंग अब खत्म हो गई है. लेकिन अब ट्रंप के वेनेजुएला मॉडल से सीख लेते हुए तुर्किए की शह पर अजरबैजान आर्मेनिया पर हमला कर सकता है. सोचिए ट्रंप के सामने आर्मेनिया के पीएम से हाथ मिलानेवाले अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव उन्हें कैद करवा सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो शायद ट्रंप फिर कोई समझौता भी नहीं करा पाएं. ये सिर्फ अटकलें या चर्चा नहीं है. ट्रंप के वेनेजुएला वाले अराजकता मॉडल का पहला रुझान सामने आ भी गया है. अब से करीब 20 घंटे पहले बुर्किना फासो में तख्तालपट की साजिश हुई. सैन्य सरकार के प्रमुख कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे के समर्थकों का आरोप है कि फ्रांस की शह पर उनके नेता को बंधक बनाने की साजिश हुई. देर रात ट्राओर के समर्थकों ने राष्ट्रपति भवन को घेर लिया. जैसे ट्रंप वेनेजुएला के तेल और गैस भंडार पर अधिकार चाहते हैं. वैसे ही फ्रांस पर भी बुर्निका फासो के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की साजिश का आरोप है, हालांकि ये साजिश नाकाम हो गई. ट्रंप ने दुनिया के ताकतवर और विस्तारवादी देशों को एक नया रास्ता दिखा दिया है, उन्हें बता दिया है कि वो भी अपनी ताकत के दम पर छोटे देशों को सता सकते हैं. मनमानी कर सकते हैं। कमजोर देश के प्रमुख को उठवा सकते हैं. कल अगर चीन ताइवान में घुसपैठ करता है, ताइवान के राष्ट्रपति को कैद करता है तो ट्रंप कैसे चीन का विरोध करेंगे. उनके पास चीन को गलत कहने का नैतिक अधिकार भी नहीं होगा. अगर ट्रंप ने चीन की कार्रवाई का विरोध किया तो चीन अपने अवैध अतिक्रमण को सही साबित करने के लिए उन्हें वेनेजुएला का उदाहरण दे सकता है. 

शांतिदूत ट्रंप ने बरसाए बम 

ट्रंप ने अपनी शक्तिशाली होने की हनक में वर्ल्ड डिप्लोमेसी को डेंजर जोन में धकेल दिया है. वैसे ट्रंप ने ये पहली बार नहीं किया है. मित्रो यही ट्रंप चंद दिन पहले तक पूरी दुनिया में सीजफायर करने और शांति के नोबल की रेस में खुद को सबसे आगे बता रहे थे. लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि एक साल में यानी जनवरी 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक शांतिदूत की छवि बनाने वाले ट्रंप ने विदेशी धरती पर 622 बम धमाकों को अंजाम दिया है. सोचिए जुबान पर शांति की बात लेकिन काम बमबाजी का. सीरिया में दो अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बाद ट्रंप ने वहां ISIS के 70 ठिकानों पर भीषण बमबारी कराई. नाइजीरिया में ईसाइयों के कत्लेआम का आरोप लगाकर ट्रंप ने ISIS के ठिकानों पर हमला कराया. ईरान के परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर बमबारी कराई. सोमालिया में अल-शबाब और ISIS के ठिकानों पर अमेरिका ने 111 बार बमबारी की. यमन के हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर भी ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी एयर फोर्स लगातार बमबारी कर रही है. इराक में भी ISIS के ठिकानों पर ट्रंप के आदेश पर बम बरसाए गए हैं. आतंकवादियों पर हमला करना. हम इसका समर्थन करते हैं, लेकिन एक देश के राष्ट्रपति को रात के अंधेरे में बेडरूम से उठवा लेना ये अराजकता है और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता. क्योंकि ट्रंप के वेनेजुएला मॉडल से ताकतवर कहे जानेवाले देशों को अब ये लगने लगा है कि वो भी ट्रंप की तरह मनमानी कर सकते हैं. इससे छोटे और कमजोर देशों की सुरक्षा के साथ शांति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. साथ ही संयुक्त राष्ट्र की साख पर भी सवाल उठे हैं, जो सिर्फ मीटिंग पर मीटिंग करता है. मीटिंग पर मीटिंग करता है. काम कभी नहीं करता. ताकतवर देशों की अराजकता पर एक्शन कभी नहीं लेता.