
79000 crore Rs defence project: 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर एक साथ निपटने में सामने आई चुनौतियों को देखते हुए 2026 में देश की सीमाओं को सुरक्षित और अभेद रखने के लिए रक्षा मंत्रालय ने करीब 79,000 करोड़ रु के मिलिट्री मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जो हाल के सालों में सबसे बड़ी खरीद मंजूरियों में से एक है. ये मंजूरियां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने दीं, जिसने एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, कॉम्बैट ड्रोन, लंबी दूरी के रॉकेट, हवा से हवा में मार करने वाले हथियार, एरियल रिफ्यूलर और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे कई तरह के सिस्टम खरीदने को मंजूरी दी है.
डिफेंस मॉडर्नाइजेशन को DAC की मंजूरी
कुल मिलाकर, लेटेस्ट अप्रूवल इस बात की एक झलक दिखाते हैं कि भारत की आर्म्ड फोर्स ड्रोन झुंड, लंबी दूरी की मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लगातार सटीक हमलों की छाया में होने वाले युद्धों के लिए कैसे खुद को रीकैलिब्रेट कर रही हैं. खरीद फरोख्त के लिए मंजूर किए गए कई सिस्टम हाल के संकटों से मिले ऑपरेशनल सबक से तैयार किए गए हैं, जिनका चीन और पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल और एयर पावर क्षमताओं के मुकाबले आकलन किया गया है, और यह डॉक्ट्रिनेयर इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन के बजाय ज़्यादा प्रैक्टिकल मेक इन इंडिया विद पार्टनर्स अप्रोच के साथ अलाइन किया गया है.
कैसे होंगे भविष्य के युद्ध
सीनियर मिलिट्री अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि भविष्य की लड़ाइयां स्पीड, एक्यूरेसी और अलग-अलग डोमेन में लड़ने की क्षमता से तय होंगी. एयर स्टाफ के चीफ, एसीएम एपी सिंह ने हाल ही में ऐसे फैसलों के पीछे की जरूरतों पर जोर देते हुए कहा, ‘तेजी से बदलते खतरे के माहौल में ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखने के लिए जरूरी क्षमताओं को समय पर शामिल करना जरूरी है.’ हालांकि एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रोक्योरमेंट प्रोसेस का सिर्फ पहला स्टेप है, लेकिन यह ऑफिशियली आर्म्ड फोर्स की जरूरतों को तय करता है और डिटेल्ड टेंडर, ट्रायल और बातचीत शुरू करने की इजाजत देता है.
बराक-8 सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम: भारतीय वायुसेना यानी एयरफोर्स के लिए जरूरी हैं. बराक-8 स्क्वाड्रन एयर बेस और स्ट्रेटेजिक एसेट्स की सुरक्षा करते हैं. नई खरीद का मकसद मिसाइल स्टॉक को काफी बढ़ाना है, जिससे युद्ध के समय मिसाइलों की कमी और लगातार लड़ाई की चिंताओं को दूर किया जा सके.
MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन: डीएसी ने MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन के 1,600 करोड़ रुपये के लीज़ को भी मंजूरी दी है. ये ज्यादा ऊंचाई वाले, लंबे समय तक चलने वाले अनमैन्ड एरियल व्हीकल, नेवी के अभी चलाए जा रहे दो प्रीडेटर को सपोर्ट करेंगे. MQ-9Bs 40,000 फीट से ज़्यादा ऊंचाई पर 30 घंटे से ज़्यादा उड़ने में सक्षम हैं, जो बड़े इलाकों में लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही देते हैं. ये इंडियन ओशन रीजन में समुद्री डोमेन अवेयरनेस, दुश्मन नेवी की मूवमेंट को ट्रैक करने और चोक पॉइंट्स पर नज़र रखने के लिए खास तौर पर कीमती हैं.
हवा में ईंधन भरने वाले एयरक्राफ्ट: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए दी गई एक और बड़ी मंजूरी में हवा में फ्यूल भरने वाले 6 विमान आने के बाद चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने में आसानी होगी.
