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DNA Analysis: बांग्लादेश के क्रिकेटर को IPL से निकाले जाने पर ये पहले से व्यथित था. आज दिल्ली दंगे के दो चर्चित आरोपियों को भी जेल से रिहाई नहीं मिलने पर रुदाली का स्वर तेज हो गया. इसलिए आज हम हिंदुओं के हत्यारों और दंगे के आरोपियों के लिए विलाप कर रहे कुंठा क्लब की वैचारिक मरम्मत करेंगे. शरजील इमाम और उमर खालिद,  कुंठा क्लब के इन दोनों पोस्टर ब्वॉय को आज भी जेल से आजादी नहीं मिल पाई. सर्वोच्च अदालत ने दोनों को दोहरा झटका दिया. सुप्रीम कोर्ट ने पहले जमानत देने से इनकार कर दिया और फिर ये भी कहा कि ये दोनों एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका भी दाखिल नहीं कर सकते हैं. 

वहीं दिल्ली दंगा मामले में उमर और शरजील के 5 वैचारिक मित्रों को 12 शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने बेल दे दी. मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शादाब अहमद, मोहम्मद सलीम खान और शिफा उर रहमान 5 साल 3 महीना तिहाड़ में बिताने के बाद अब बाहर आ गए. लेकिन जब उमर और शरजील की बात हुई तो न्यायालय ने साफ-साफ कहा कि इन दोनों की स्थिति अन्य 5 आरोपियों की तुलना में अलग है. कथित अपराधों में इन दोनों की केंद्रीय भूमिका रही है. इन दोनों की हिरासत की अवधि भले ही लंबी रही हो, लेकिन यह न तो संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और न ही संबंधित कानूनों के तहत लगे वैधानिक प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करती है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला
उमर खालिद ने निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक 6 बार जमानत याचिका लगाईं लेकिन हर बार झटका लगा. उमर ने अपने साथी से कहा कि अब जेल ही उसकी जिंदगी हो गई है. दिल्ली के जिस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई, उसका ये आरोपी व्यथित है. हालांकि उससे ज्यादा शोकग्रस्त उसके शुभचिंतक हैं. कुंठा क्लब के तमाम सदस्य सार्वजनिक मंच पर विलाप कर रहे हैं. मन मुताबिक निर्णय नहीं आने से आहत कुंठितों की टोली में से कोई इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई कह रहा है. कोई बेतुका बता रहा है कोई अत्याचार ठहरा रहा है, तो एक ने लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया. एक ने यहां तक कहा कि 5 साल से अधिक बिना किसी दोष साबित हुए जेल में रखना बर्बरता है. समझिए, सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन्हें बर्बरता लग रहा है. 

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चार लाख कैदी
अब आपको बताते हैं कि शर्जिल और उमर के विचारों के अंडर कवर सपोर्टर किस तरह न्यायालय के आदेश से आहत हैं. शहरजी और उमर को लेकर इस फिक्र और परवाह के बीच अब हम आपको यहां एक अतिरिक्त जानकारी देना चाहेंगे. देश में 4 लाख 34 हजार 302 विचारधान कैदी हैं जो सजा पाए बगैर जेल में बंद हैं. करीब 26 हजार ऐसे कैदी हैं जो 3 से लेकर 5 साल से जेल में बंद हैं. जबकि करीब साढ़े 11 हजार ऐसे कैदी हैं जो 5 सालों से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं, जिनके खिलाफ उमर और शरजील की तरह भी दोषसिद्ध नहीं हुआ है. एक बात और ये 2022 के आंकड़े हैं. India Justice Report 2025 में कहा  गया है कि मौजूदा समय में ये आंकड़ा और बढ़ सकता है. लेकिन शरजील और उमर जैसे उन लोगों को कोई नहीं जानता हैं. उनके लिए कोई आवाज नहीं उठाता. शायद ही कोई बता पाए कि इन साढे ग्यारह हजार में कौन-कौन हैं? कुंठित क्लब के सदस्यों का कलेजा भी उमर और शरजील जैसों के लिए फटता है.  अब्राहम लिंकन ने कहा है कि जो अदालतों के अधिकार को नकारता है, वह राष्ट्र की नींव को नकारता है.

आईपीएल से बाहर क्रिकेटर
कुंठा क्लब से तमाम एलिट क्लास मेम्बर अपना वैचारिक विलाप करके अदालत के अधिकार को नकारने की छद्म कोशिश कर रहे हैं. इसमें रत्तीभर भी शक नहीं है कि कुंठा क्लब ने अपने पोस्टर ब्वॉय को जेल से आजादी दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रयास किया था. एक तरह से अदालत पर दबाव बनाने में लगे थे. लेकिन जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने दबाव को नकार दिया तब दंगे के दो आरोपियों के लिए प्रदूषित विचारों की उल्टी शुरू हो गई. कुंठा क्लब का वैचारिक विलाप बताता है कि अमेरिका से लेकर दिल्ली तक की सारी कोशिशें प्रयोजित थी. अपने वैचारिक मित्रों के लिए ममदानी की चिट्ठी को कुंठा क्लब ने डिजाइन किया हुआ था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बिलख रहे ये कुंठित पिछले दो दिनों से बांग्लादेशी क्रिकेटर को लेकर भी वैचारिक विलाप कर रहे हैं. इन्हें ये पच नहीं पा रहा है कि बीसीसीआई ने कैसे बांग्लादेशी क्रिकेटर को IPL से बाहर करवा दिया. 

आईपीएल प्रसारण पर रोक
जिस बांग्लादेश में चुन चुनकर हिंदुओं की हत्या की जा रही है. जो कट्टरपंथी सरेआम हिंदुस्तान को तोड़ने की शपथ ले रहे हैं. उन धर्मांधों के रिश्तेदारों, वैचारिक साथियों या देशवासियों को IPL से बाहर करते अपने देश के रुदाली गैंग की बेचैनी हो गई. हम आपको कुंठा क्लब का वैचारिक विलाप सुनाएंगे लेकिन पहले आपको कुछ विशेष जानकारी देना चाहते हैं. मोहम्मद यूनुस के करीबी और सूचना प्रसारण मंत्रालय में सलाहकार रिजवाना हसन ने कहा है कि भारत को मुंहतोड़ जवाब देंगे. इसके बाद बांग्लादेश में IPL के प्रसारण पर रोक लगाने का फरमान जारी हो गया. इससे पहले वहां के खेल मंत्री ने बीसीसीआई को साम्प्रदायिक करार दिया था. सोचिए, ऐसे देश के क्रिकेटर के लिए कुंठा क्लब के सदस्यों की अंतरआत्मा कांप रही है. उनकी बेचैनी बढ़ी हुई है. 

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