
कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय

आईआईसीए ने अपने सर्टिफाइड सीएसआर प्रोफेशनल प्रोग्राम के 11वें बैच का उद्घाटन सत्र आयोजित किया
आईआईसीए महानिदेशक ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा- सीएसआर को केवल खर्च तक सीमित न रहकर समुदायों के लिए प्रभाव, परिणाम और मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिएकोयला मंत्रालय की अपर सचिव रूपिंदर बरार ने कहा- सीएसआर की सफलता का आकलन समुदायों पर इसके द्वारा पड़ने वाले प्रभाव और कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करने के आधार पर किया जाना चाहिए
लोक उद्यम विभाग के संयुक्त सचिव लुकास एल. कामसुआन ने कहा- सार्वजनिक क्षेत्र के सीएसआर में व्यापक इकोसिस्टम के लिए एक आदर्श के रूप में कार्य करने की क्षमता है
प्रविष्टि तिथि: 25 AUG 2026 5:30PM by PIB Delhi
सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के अधीन एक स्वायत्त संस्था, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने 21 अगस्त 2026 को आईआईसीए सर्टिफाइड सीएसआर प्रोफेशनल प्रोग्राम के 11वें बैच का उद्घाटन किया। इस वर्चुअल सत्र में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), कॉरपोरेट्स, सरकारी संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के 45 पेशेवरों ने भाग लिया।
इस सत्र में आईआईसीए के महानिदेशक और सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद माननीय गणमान्य व्यक्तियों श्रीमती रूपिंदर बरार, अपर सचिव, कोयला मंत्रालय, और श्री लुकास एल. कामसुआन, संयुक्त सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग, वित्त मंत्रालय द्वारा विशेष संबोधन दिए गए।
अपने स्वागत भाषण में आईआईसीए के महानिदेशक और सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने इस बात पर बल दिया कि सीएसआर को केवल खर्च तक सीमित न रहकर समुदायों के लिए प्रभाव, परिणाम और मूल्यवर्धन पर केंद्रित होना चाहिए। संसद के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत में कंपनियों द्वारा सीएसआर पर किया गया खर्च 34,908.75 करोड़ रुपये रहा। इससे वित्त वर्ष 2019-20 से वित्त वर्ष 2023-24 तक पांच वर्षों में कुल सीएसआर खर्च 1,44,159 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, नवाचार और कला एवं संस्कृति सहित अनुसूची VII के उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। इनका अभी तक पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कॉरपोरेट्स, कार्यान्वयन एजेंसियों और समुदायों के बीच पारदर्शिता को मजबूत करने में प्रौद्योगिकी, डेटा और सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल जैसे प्लेटफार्मों की भूमिका के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करना इस बदलाव के लिए केंद्रीय महत्व रखता है, क्योंकि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की गुणवत्ता ही अंततः यह निर्धारित करती है कि सीएसआर खर्च स्थायी प्रभाव में तब्दील होता है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि सीएसआर पेशेवरों का एक सुप्रशिक्षित दल तैयार करना – इस अनुशासन को पूरे इकोसिस्टम में स्थापित करने के लिए आवश्यक है। इस प्रकार के पेशेवरों को कार्यक्रम स्वयं विकसित करना चाहता है।
कोयला मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती रुपिंदर बरार ने कोयला क्षेत्र के अनुभव का हवाला देते हुए इस बात पर बल दिया कि सार्थक सीएसआर की शुरुआत समुदाय की आवश्यकताओं को सुनने से होती है और यह सुदृढ़ परियोजना योजना, सक्षम कार्यान्वयन साझेदारों और जमीनी स्तर पर परिणामों की कड़ी निगरानी के माध्यम से जारी रहती है। उन्होंने कहा कि सीएसआर की सफलता का आकलन समुदायों पर इसके द्वारा किए गए ठोस प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए और उन्होंने कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करने और बेहतर सामाजिक लेखापरीक्षा तंत्र स्थापित करने का आह्वान किया। श्रीमती बरार ने इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक सीएसआर ढांचे पर कोयला मंत्रालय के साथ आईआईसीए के हालिया सहयोग की भी सराहना की। इसमें मापने योग्य परिणाम और निष्कर्ष शामिल हैं।
वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के संयुक्त सचिव श्री लुकास एल. कामसुआन ने सामाजिक विकास और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए भारत की सीएसआर यात्रा में इनकी अहम भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने वार्षिक विषयगत प्राथमिकताओं, सरकारी कार्यक्रमों के साथ समन्वय और जिला प्रशासनों, गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग के माध्यम से सीपीएसई की सीएसआर पहलों को निर्देशित करने के लिए डीपीई द्वारा किए जा रहे प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि सीपीएसई अब अलग-थलग, एकमुश्त हस्तक्षेपों के बजाय सीएसआर के लिए रणनीतिक और विषयगत दृष्टिकोण अपना रहे हैं।
श्री कामसुआन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की सीएसआर व्यापक इकोसिस्टम के लिए एक मॉडल के रूप में काम करने की क्षमता रखती है। उन्होंने क्षमता निर्माण और डिजाइन और निगरानी में प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग द्वारा समर्थित व्यापक स्थिरता और ईएसजी विचारों के साथ सीएसआर के घनिष्ठ एकीकरण के महत्व पर बल दिया।
आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (एसबीई) की प्रमुख और कार्यक्रम निदेशक डॉ. गरिमा दाधिच ने नौ महीने के प्रमाणन कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसे शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और अभ्यासकर्ताओं के एक अंतःविषय संकाय द्वारा साप्ताहिक लाइव सत्रों के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। यह कार्यक्रम सीएसआर के कानूनी और नियामक ढांचे, शासन, परियोजना योजना, प्रभाव आकलन, रिपोर्टिंग और ईएसजी और सोशल स्टॉक एक्सचेंज जैसे उभरते क्षेत्रों को शामिल करते हुए सात मॉड्यूल में संरचित है।
आईसीपीसीएसआर बैच 11 के उद्घाटन सत्र ने भारत के व्यापक सीएसआर इकोसिस्टम के समर्थन में, पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम-उन्मुख हस्तक्षेपों को डिजाइन करने में सक्षम सीएसआर पेशेवरों का एक मजबूत समुदाय बनाने के लिए आईआईसीए के निरंतर प्रयासों की पुष्टि की।


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