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बालाघाट: कोरोना संकट की इस घड़ी में जब लोग अपने घरों में सुरक्षित बैठे हैं. वहीं कुछ लोग अपनी जान की परवाह किए अपना फर्ज निभा रहे हैं. ऐसी ही तस्वीर मध्य प्रदेश के बालाघाट से सामने आई है. जहां आशा कार्यकर्ता अपनी नन्ही सी बच्ची को गोद में लिए घर-घर सर्वे कर रही है. 

किल कोरोना अभियान के दौरान सामने आई ये तस्वीर दिल को पसीजने के लिए काफी है. इस आशा कार्यकर्ता का नाम रश्मि नगरगड़े है. ये लोगों के घर जाकर उनसे सर्दी, खांसी व बुखार जैसी बीमारी की जानकारी ले रही है. 

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दरअसल ये आशा कार्यकर्ता बच्ची को लेकर सर्वे करने के लिए मजबूर है. क्योंकि उसके घर में उसके पति के अलावा अन्य कोई नहीं है जो उसकी बेटी का ख्याल रख सके. लेकिन बेटी मां के बगैर घर में नहीं रहती है. जिसके चलते वे अपनी बेटी को गोद मे लिए घर-घर जाकर सर्वे कर रही है. 

रश्मि ने सुरक्षा को लेकर अपने आरोप लगाए हैं. उसका कहना है कि उन्हें सुरक्षा के नाम पर केवल मास्क ही दिया जाता है. साथ ही रश्मि ने कहा कि अधिकारियों को भी सर्वे में आ रही परेशानियों के बारे में बताया गया है, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है. सुपरवाइजर भी अपने घरों में बैठकर काम से संबंधित रिपोर्ट लेते हैं, लेकिन आकर हमारी सुध नहीं लेता है. 

इन सब पर खंड चिकित्सा अधिकारी रविन्द्र ताथोड़ का कहना है कि हमने कार्यकर्ताओं को सर्वे करने के लिए कहा है, अगर वह बच्चे को लेकर सर्वे कर रही हैं तो ये गलत है. इस तरह से वह शासन के निर्देशों का भी दुष्प्रचार कर रही हैं. बच्चे को लेकर घर-घर सर्वे करना सही नहीं है.

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