
Ranchi: झारखंड में यास तूफान (Yass Cyclone) किसानों के लिए आफत बन कर आया है. एक तो पहले से ही लॉकडाउन (Lockdown) के कारण किसानों को उनकी सब्जी की उपज का उचित कीमत नहीं मिल रहा था, अब जोरदार हुई बारिश ने उनकी मुसीबत और बढ़ा दी है.
किसानों की मानें तो खेत में पानी ज्यादा जमा हो जाने के कारण सब्जी की फसल को सीधा नुकसान है. अब इसके गलने का और झुलसने की संभावना बढ़ गयी है. रांची से सटे नगड़ी इलाके में किसान ने सब्जी की खूब जम कर खेती की है. किसानों ने अपने खेत में मक्का से लेकर मिर्च, गोभी, बैगन, टमाटर और धनिया लगाया है. इन फसलों पर यास का खतरा मंडराने लगा है.
नगड़ी इलाके किसानों ने क्या कहा?
युवा किसान कुश बताते हैं कि फसलों का पहले से ही कीमत नहीं मिल रहा था, अब बारिश के बाद जैसे ही धूप निकलेगा खेत में सारा फसल गल जाएगा, नुकसान होना तय है.
वहीं, एक अन्य किसान बसंत महतो बताते हैं कि बारिश के कारण खेत मे पानी जमा हो गया है, दो दिन के अंदर सब फसल मर जायेगा. इतना दिन मेहनत किये लेकिन लागत भी नहीं निकल पाया, ऐसे में अब अगले खेती की समस्या भी अभी से सामने आ रहा है.
मिर्च की खेती करने वाले श्रवण बताते हैं कि एक एकड़ में मिर्च लगाया था. फसल पर खर्च भी अच्छा खासा किये थे. लेकिन लॉकडाउन की वजह से पहले से ही नुकसान हो रहा था, अब तूफान ने भी तबाह कर दिया है.
नगड़ी के ही रितेश महतो बताते हैं कि 50 डिसमिल में बैगन की खेती किये हैं और 30 से 35 हजार पूंजी लगा है. पहले तो एक दो रुपये किलो बिक रहा था, अब पानी के बाद धूप निकलेगा तो नुकसान तय है. फसल का जड़ ही सड़ जाएगा.
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हजारीबाग के किसानों की व्यथा भी कुछ ऐसी ही है
गौरतलब है कि राज्य में अन्नदाता किसान आज परेशान हैं लेकिन कोई उसे देखने वाला नहीं है. हजारीबाग के किसानों की व्यथा आप सुनेंगे तो आंखों से आंसू आ जाएंगे. हजारीबाग में दो तरह के किसान हैं. एक किसान जो अपना पैदावार खुद खेत से उपजाकर बाजार में खुद से बैठकर बेचता है और दूसरा किसान जो बड़े पैमाने पर खेती करता है और इसमें मेहनत के अलावा काफी कुछ उस किसान का दांव पर लगा रहता है.
हजारीबाग के इचाक ,बड़कागांव, कटकमसांडी, कटकमदाग ,चुरचू, दारू प्रखंड सब्जियों की खेती के लिए मशहूर माना जाता है. सब्जी की खेती ही इनके जीवन यापन का मुख्य जरिया है लेकिन इस बार जिस तरह से कोरोना के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है और लॉकडाउन लग गया है. इस कारण इन्हें काफी नुकसान हो रहा है.
लॉकडाउन व मौसम दोनों का दोहरा मार झेल रहे किसान
दरअसल, आवागमन की सुविधाएं काफी कम हो गई है जिसके कारण फसल खेतों में ही पड़े हुए हैं जिस खेत तक आसानी से आवागमन की सुविधा है वहां तो थोक खरीददार पहुंचते हैं परंतु कीमत की बात की जाए तो आज टमाटर ₹5 किलो भी मुश्किल से ही बिक पा रहा है.
बता दें कि हजारीबाग से सब्जी देश के अन्य राज्यों में ही नहीं बल्कि बांग्लादेश नेपाल एवं म्यांमार तक के लिए भेजी जाती है परंतु आज किसान बेबस है उसे लॉकडाउन और अब यास के कारण अन्य कोई रास्ता सूझ नहीं रहा है.
किसानों की निगाहें राज्य व केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं परंतु सरकार बातें तो बड़ी बड़ी करती है लेकिन किसानों के लिए धरातल पर कोई काम करके दिखा नहीं रहा है.
किसानों ने सरकार से लगाई गुहार
इसी वजह से किसान आज बदहाली की अवस्था में पहुंच गए हैं एक तो मौसम की मार और ऊपर से किसानों की मेहनत पर पानी फेरता यह कोरोना वायरस. जितने भी किसान मिले सभी ने सरकार से बस गुहार ही लगाई, जिला स्तर पर न तो कोई पदाधिकारी और ना ही कर्मचारी इनकी सुध लेने को आज तैयार दिख रहा है.
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राज्य के कृषि मंत्री की चुप्पी पर उठाया सवाल
लोगों ने कहा कि किसानों की बदहाली पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले हमारे कृषि मंत्री आज चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? उनकी भी दो आंखें हैं क्या वह यूं ही मूकदर्शक बने रहेंगे या फिर किसानों के हित में कुछ कदम भी आगे बढ़ाएंगे.
किसानों का कहना है कि कृषि मंत्री कहते हैं कि मैं खुद किसान परिवार से हूं और किसानों का दर्द समझता हूं लेकिन पद आसीन होने के बाद उनका दर्द छूमंतर होते दिखाई दे रहा है. यह किसानों के लिए और ज्यादा परेशानी का सबब है.
जानें गुमला के किसानों की स्थिति क्या है?
गुमला यास तूफान के असर से हुई असमय आंधी बारिश और लॉकडाउन के कारण यातायात से जुड़ी समस्याओं की वजह से सब्जी की खेती से जुड़े कृषकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
प्राकृतिक मार के अलावा लॉकडाउन से जुड़ी सरकारी बंदिशों से उपजे हालात की मार यूं पड़ी है कि मुनाफ़ा की कौन कहे लागत मूल्य तक से किसान वंचित हो जा रहे हैं. असमय आंधी और बारिश से खेतों में पानी भर गया है. इससे फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. वहीं, यातायात से जुड़ी मुश्किलों और अन्य कठिनाईयों के कारण किसान औने पौने दाम में सब्जियों को बेचने को बाध्य हैं.
गुमला के सब्जी किसान हैं परेशान
गुमला में मंगलवार की शाम से रुक-रुक कर हो रही बारिश और आंधी ने क्षेत्र के किसानों को भारी क्षति का सामना कराया है. टमाटर, फूल गोभी, कद्दू, बंधा गोभी, शिमला मिर्च, फ्रेंचबीन, तरबूज, बैगन व मिर्चा जैसी फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा है.
लॉकडाउन के कारण यातायात से जुड़ी समस्याओं की वजह से किसान ओने पौने दाम पर सब्जियां बेचने को विवश थे वही पिछले 3 दिनों से जारी आंधी और बारिश के कारण खेतों में जलजमाव से हुए फसलों की क्षति ने किसानों की कमर तोड़ दी है.
लोहरदगा के किसानों की क्या है स्थिति?
लोहरदगा में यास तूफान की वजह से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दिया है. खेत मे लगे सब्जी की फसल को काफी नुकसान हुआ है. सेन्हा प्रखंड के बदला गांव जो सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है. किसानों को यास चक्रवाती तूफान ने काफी नुकसान पहुंचाया है.
खेत मे लगे पत्ता गोभी की फसल बर्बाद होता दिख रहा है. सब्जी की खेत देख किसान चिंतित हैं. हलांकि डीसी दिलीप कुमार टोप्पो ने यास तूफान की वजह से हुए नुकसान के लिए लोगो को अंचल कार्यालय में आवेदन देने की अपील की है.
कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने ये कहा
झारखण्ड में पहले तो लॉक डाउन जैसे हालात के कारण किसान को सब्जी के फसल के उचित कीमत नहीं मिलने और फिर यास तूफान के कारण सब्जी के फसल के बर्बाद होने की आशंका पर कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि विभाग संवेदनशीलता से देख रहा है कि कैसे किसान को बाजार उपलब्ध कराएं, बेज फेड को भी हमने फंक्शन में लाया है.
उन्होंने कहा कि बिरसा विलेज का जो कंसेप्ट है, वो है फसल का मार्केट लिंकेज कराने का है. हमने धीरे धीरे किसान को राहत देना शुरू किया है. जैसे जैसे समस्या आ रही है संवेदनशीलता से दूर करने का प्रयास कर रहे हैं.
