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Barmer: पूरे देश में वैक्सीनेशन टीकाकरण के लिए आधार कार्ड या वोटर कार्ड का उपयोग किया जा रहा है. लेकिन देश में बाड़मेर का पहला वैक्सीनेशन स्पेशल कैंप होगा शायद जहां पर पासपोर्ट के आधार पर 45 प्लस के पाक विस्थापित शरणार्थियों के टीकाकरण किया गया.

कोरोना महामारी के दौर में मंगलवार का दिन पाक विस्थापितों के लिए खुशियां लेकर आया. यहां पर बाड़मेर जिला मुख्यालय पर पाक विस्थापित के लिए देश का पहला वैक्सीनेशन कैंप आयोजित हुआ, जिसमें पाक विस्थापितों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई. वैक्सीन लगाने के बाद पाक विस्थापितों के चेहरे पर खुशियों की लहर छा गई.

दरअसल, कोरोना महामारी व लॉकडाउन के दौर में पाक विस्थापितों को नागरिकता नहीं मिलने के कारण बड़े ही विकट हालातों से गुजरना पड़ रहा था. रोजी-रोटी के संकट के साथ कोई डॉक्यूमेंट नहीं होने के चलते कोरोना की वैक्सीन भी नहीं लग पा रही थी, जिसके बाद सरकार ने पाक विस्थापितों को कोरोना वैक्सीन को लेकर बड़ी राहत देते हुए दान जी की होदी के पास वैक्सीनेशन कैंप लगाकर पासपोर्ट के आधार पर वैक्सीन लगाई गई. वैक्सीन लगाने के बाद पाक विस्थापितों के चेहरों पर खुशी की लहर छा गई और उन्होंने सरकार का धन्यवाद ज्ञापित किया.

पाक विस्थापितों के लिए आयोजित कोरोना वैक्सीनेशन कैंप प्रभारी कमलेश माली ने बताया कि प्रशासन ने पाक विस्थापितों के वैक्सीन लगाने को लेकर निर्देश दिए थे, जिस पर इनके पास नागरिकता नहीं होने के कारण आधार कार्ड, वोटर कार्ड, सहित कोई भी भारतीय दस्तावेज नहीं है और प्रशासन के निर्देशानुसार पासपोर्ट के आधार पर इनके कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है.

पाक विस्थापित के वैक्सीन कैंप को लेकर 2 दिन पहले ही पाक विस्थापित जिला अध्यक्ष नरपत सिंह धारा के नेतृत्व में बाड़मेर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर विस्थापितों के वैक्सीन लगाने की मांग की गई थी, जिसके बाद बाड़मेर जिला प्रशासन ने इस मामले को सरकार के सामने गंभीरता से रखते हुए मंगलवार को पाक विस्थापितों के वैक्सीन कैंप लगाकर उनको बड़ी राहत प्रदान की है.

दरअसल, पिछले दो-तीन महीने से 45 प्लस आयु के टीकाकरण का अभियान चल रहा था. लेकिन पाक विस्थापित परिवारों में जबरदस्त तरीके से निराशा थी. उन्हें यह लग रहा था कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. लेकिन अब सरकार ने उनके लिए विशेष कैंप लगाकर पाक विस्थापित परिवारों के लिए नई खुशी लेकर आ गई है. इन लोगों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है.

(इनपुट-भूपेश आचार्य)