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Patna: राज्य में गेहूं खरीदारी काफी धीरे चल रही है. जिस वजह से खरीदारी का तय लक्ष्य 7 लाख मीट्रिक टन अब पीछे छूटता दिखा रहा है.अगले दो सप्ताह में सात लाख मीट्रिक टन में से पांच लाख टन की खरीदारी बड़ी चुनौती होगी. इस चुनौती को पार पाना मुश्किल दिख रहा है.

नीतीश सरकार किसानों से गेंहू खरीद रहीं है. दो जून तक 1 लाख 91 हजार 932 मैट्रीट टन गेंहू की खरीदारी हो चुकी है.सरकार की इस योजना से बिहार के 38 हजार 83 किसान लाभांवित हुए है. हालांकि वित्तीय वर्ष 2020-21 की तुलना में इस साल काफी अच्छी खरीदारी हुई है.पिछले साल मात्र 4 हजार 212 मैट्रिक टन गेंहू ही खरीदी गई थी. 

इन जिलों में हुई है कम खरीदारी

  • अरवल-562 मीट्रिक टन
  • शेखपुरा-708 मीट्रिक टन
  • जमुई-1255 मीट्रिक टन
  • शिवहर-1565 मीट्रिक टन
  • किशनगंज-1517 मीट्रिक टन
  • वैशाली-1883 मीट्रिक टन
  • बांका-2974 मीट्रिक टन
  • मुंगेर 2826 मीट्रिक टन
  • गया-3174 मीट्रिक टन
  • नवादा-3297 मीट्रिक टन
  • पूर्णिया- 3877 मीट्रिक टन
  • अररिया 3751 मीट्रिक टन
  • मधुबनी-3648 मीट्रिक टन

इसी बीच गेंहू की खरीद में सुस्ती पर सियासत शुरु हो चुकी है. RJD ने कहा है कि सरकार किसानों को मूर्ख बना रही है. राजद नेता और पूर्व मंत्री विजय प्रकाश ने कहा है कि किसान औने पौने दाम में गेहूं की बिक्री बाजार में कर रहें है. नीतीश सरकार किसानों के हित में कभी काम नहीं करती है. 

उन्होंने आगे कहा कि यह सरकार सिर्फ बातें बनाती है.किसानों को गेंहू बेचनें काफी परेशानी हुई है. 31 मई तक गेहूं की खरीदारी करनी थी लेकिन 15 जून तक इसे एक्सटेंड किया गया है, लेकिन क्या पांच लाख मीट्रिक टन गेंहू की खरीदगी हो पायेंगी.

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वहीं, जदयू के नेता अभिषेक झा ने कहा है कि बिहार सरकार किसानों को हर हाल में उचित मूल्य मिले इस पर काम करती है. किसानों को परिश्रम का फायदा मिले.