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Jaipur : फ्री वैक्सीन के मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने की जिस प्रक्रिया पर गहलोत मंत्री परिषद में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा आमने-सामने हुए थे. उसकी कड़वाहट सीएम (CM Ashok Gehlot) के प्रयासों के बावजूद बरकरार है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के आदेशों को दरकिनार करते हुए जयपुर के प्रभारी होने के बावजूद शांति धारीवाल अपने गृह जिले कोटा चले गए हैं. यानी एक तरीके से शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा (Govind Singh Dotasra) के आदेश मानने से इनकार कर दिया है.

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दरअसल 2 जून को हुई मंत्री परिषद की बैठक में झड़प के वक्त भी धारीवाल ने डोटासरा से दो टूक कहा था कि वह आदेश मानने को बाध्य नहीं हैं. बहुत अध्यक्ष देखे हैं. धारीवाल उस बात पर अब भी अडिग दिख रहे हैं. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सभी मंत्रियों को चिट्ठी भेजकर 4 जून को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में फ्री वैक्सीनेशन के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के आदेश दिए थे. सभी मंत्री प्रभार वाले जिलों में चले गए, लेकिन शांति धारीवाल का जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस का कोई कार्यक्रम नहीं आया है. 

मंत्री परिषद की बैठक के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रात को ही सीकर चले गए गोविंद सिंह डोटासरा से फोन पर बात की और उन्हें समझाया था. वहीं, कल जोधपुर जिले में विभिन्न लोकार्पण कार्यक्रम के शिलान्यास से पहले शांति धारीवाल ने भी मुख्यमंत्री आवास पर उनसे मुलाकात की थी. माना जा रहा था कि सीएम के हस्तक्षेप के बाद दोनों नेताओं के बीच सुलह हो गई है, लेकिन शांति धारीवाल के कोटा जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि धारीवाल पीछे हटने वाले नेता नहीं है.

यही वजह है कि शांति धारीवाल जयपुर के प्रभारी मंत्री होने के बावजूद कोविड पर जयुपर में बैठक नहीं लेंगे. न यहां फ्री वैक्सीनेशन अभियान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. धारीवाल ने प्रभार वाले जिले की जगह अपने गृह जिले कोटा को बैठक के लिए चुना है. जयपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और पीसीसी में प्रेस वार्ता की है. 

दरअसल सीएम हाउस पर हुए झगड़े में डोटासरा ने धारीवाल से प्रभार वाले जिले जयपुर में ढाई साल के दौरान एक भी बैठक नहीं करने पर तंज कसा था. मामला इतना गरमाने के बावजूद धारीवाल ने जयपुर जिले की बैठक नहीं लेने का फैसला कर लिया. धारीवाल ने साफ तौर पर मैसेज दे दिया कि वे प्रदेशाध्यक्ष के आदेश अब भी नहीं मानेंगे. कैबिनेट की बैठक में शांति धरीवाल और डासेटासरा के बीच फ्री वैक्सीनेशन के मुद्दे पर ज्ञापन देने को लेकर ही झगड़े की शुरुआत हुई थी. 

डोटासरा का कहना था कि केसी वेणुगोपाल का सर्कुलर आया है, जिसमें प्रमुख नेताओं को जिले में कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देना है. इसमें फ्री वैक्सीनेशन की मांग करनी है. इस पर धारीवाल ने बीच में ही टोकते हुए कहा था कि मंत्री कलेक्टर को ज्ञापन क्यों दें, सीधे राष्ट्रपति के पास ही हमें जाना चाहिए. यही वजह है कि कोटा में भी कांग्रेस के नेताओं ने ही जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है शांति धारीवाल कलेक्टर को ज्ञापन देने नहीं गए हैं. शांति धारीवाल गहलोत सरकार के सबसे पावरफुल मंत्री माने जाते हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और शहरी विकास के कामों में गहलोत के तीन कार्यकाल में धारीवाल ही सवेर्सर्वा रहे हैं. विधानसभा में ट्रबल शूटर की भूमिका में भी गहलोत धारीवाल को ही आगे रखते आए हैं. विधानसभा में कई बार ऐसे मौके आए, जब धारीवाल स्पीकर से ही उलझ पड़े, लेकिन उन्हें कोई कुछ कह दे, इसकी हिम्मत कम ही दिखा पाए. 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच कांग्रेस के कार्यक्रमों को मजबूती से रखने की गोविंद सिंह डोटासरा की मंशा को शांति धारीवाल ने दरकिनार कर दिया है. प्रदेश अध्यक्ष के आदेशों की अवहेलना करते हुए उन्होंने यह बता दिया कि राजस्थान में मंत्रियों में अगर कोई सबसे पावरफुल है तो वही है और अनुभव और उम्र के इस मोड़ पर उन्हें कोई अध्यक्ष दिशा निर्देश दें यह संभव नहीं है.

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