
DNA Analysis: प्रदर्शनकारी अब IRGC यानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांडरों और खामेनेई सरकार के अधिकारियों के घरों को लाल रंग के क्रॉस निशान से चिन्हित कर रहे हैं. इस लाल निशान का मतलब क्या है. घरों को चिन्हित कर के ईरान के क्रांतिकारी कट्टरपंथियों को क्या चेतावनी दे रहे हैं. ईरान में घरों पर जो लाल निशान लगाए जा रहे हैं उसके तीन मायने निकाले जा रहे हैं. जिसे अब हम एक एक कर के डीकोड करने वाले हैं. रेड क्रॉस के साथ दीवारों पर मैसेज लिखे जा रहे हैं. दीवारों पर ये तक चिन्हित किया जा रहा है कि IRGC कमांडर या ईरान का अधिकारी किस फ्लोर पर रह रहा है.
इसका मतलब साफ है कि जिन घरों को चिन्हित किया गया है. उनपर हमला करना है. जिन घरों पर लाल निशान लगाया गया है. उनपर हमला कर के प्रदर्शनकारियों की मौत का बदला लिया जाना है. आगे बढ़ने से पहले यहां आपको ये समझना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों ने इन घरों को लाल रंग के निशाने से ही चिन्हित क्यों किया है. ईरान में प्रदर्शन शुरू होने के बाद IRGC ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी थी कि अगर हिंसा हुई तो उसे रेड लाइन माना जाएगा. हिंसा हुई जवाब में IRGC के कमांडोज ने ईरान में लाशें बिछा दीं. रेड लाइन क्रॉस होने के बाद 600 से ज्यादा लोगों के लहू से ईरान की सड़कों को लाल कर दिया गया.
रेड क्रॉस का क्या मतलब?
इसी रेड लाइन का जवाब अब प्रदर्शनकारियों ने रेड क्रॉस से दिया है. इस रेड क्रॉस को खलीफा की खूंखार फोर्स के खिलाफ साइकोलॉजिकल वॉरफेयर यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध भी माना जा रहा है. वीडियो के साथ एक मैसेज पोस्ट किया गया है. जिसमें लिखा है- “तुम सड़कों पर हमारे परिवार का कत्ल कर रहे हो. अब हम भी तुमसे पहले तुम्हारे परिवार से निपटेंगे” यानी IRGC के कमांडरों को ये संदेश दिया जा रहा है कि अब उनके परिवार भी सुरक्षित नहीं हैं. प्रदर्शनकारी रेड क्रॉस के जरिये IRGC को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान में खलीफा की फोर्स के खिलाफ ऑपरेशन रेड क्रॉस का असर भी दिखने लगा है. इलम शहर में IRGC के कर्नल मेहदी रहीमी को प्रदर्शनकारियों ने मौत के घाट उतार दिया. IRGC की बसीज पैरामिलिट्री के कमांडर फराजोल्लाह शुस्तारी की भी हत्या कर दी गई.
रेड क्रॉस क्रांति
IRGC के ब्रिगेडियर जवाद केशवराज भी प्रदर्शन के दौरान मारा गया. IRGC कमांडर हादी सादेघ को तो उसकी पूरी यूनिट के साथ जला दिया गया. यानी रेड लाइन के जवाब में प्रदर्शनकारियों के जिस ऑपरेशन रेड क्रॉस की शुरुआत की है. उसकी आंच अब सत्ता के शीर्ष तक भी पहुंचने लगी है और वो दिन दूर नहीं जब तेहरान के बेत-ए-रहबरी यानी खामेनेई के आवास पर भी रेड क्रॉस का चिन्ह चिपका दिया जाएगा. ईरान में रेड क्रॉस वाली जो क्रांति हो रही है. उसे देखकर ऐसा लग रहा है जैसे इतिहास खुद को दोहरा रहा है. क्योंकि एक वक्त हिटलर के खिलाफ इसी तरह की रेड क्रॉस क्रांति की गई थी. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान फ्रांस में फ्रेंच रेसिस्टेंस गुटों ने जन्म लिया था . नाजी कब्जे के दौरान, फ्रेंच प्रदर्शनकारी और रेसिस्टेंस फाइटर्स ने नाजी समर्थकों के घरों को रेड क्रॉस से चिन्हित किया. हिटलर की तानाशाही के विरोध में इन घरों पर हमले किए गए. रेड क्रॉस क्रांति का एक आधुनिक उदाहरण बेलारूस के प्रदर्शन भी हैं. 2020-2021 में लुकाशेंको की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के घरों को लाल पेंट से चिन्हित कर के उनपर हमला किया गया.
खामेनई का हथकंडा
ईरान में एक तरफ ऑपरेशन रेड क्रॉस जारी है. तो वहीं दूसरी तरफ क्रांति की आग अभी भी धधक रही है. ईरान के 180 से ज्यादा शहरों और सभी 31 प्रांतों से धुआं उठ रहा है. ईरान के विदेश मंत्री सरकारी न्यूज चैनल पर खुद आकर ये दावा कर रहे हैं कि खलीफा के खिलाफ इस क्रांति की आग ने अब 350 से ज्यादा मस्जिदों को राख कर दिया है. ईरान की इस क्रांति के सामने जब खामेनेई का हर हथकंडा फेल हो गया तो उन्होंने अब प्रोपेगेंडा का सहारा लिया है. आपको हमने बताया कि कैसे खामेनेई के समर्थकों का हेलीकॉप्टर शॉट दिखाया जा रहा है. खामेनेई के समर्थन में नारेबाजी हो रही है. लेकिन अब आपको इस प्रोपेगेंडा का दूसरा हिस्सा जानना चाहिए. ईरान में अवाम की क्रांति को अमेरिका और इजरायल प्रायोजित प्रदर्शन करार देने की कोशिश की जा रही है और ईरान के सरकारी चैनलों पर ट्रंप और नेतन्याहू के पोस्टर्स को जलाया जा रहा है. इसके अलावा रेजा शाह पहलवी की तस्वीरों को भी आग के हवाले किया जा रहा है. क्या आपने गौर किया है कि बीते एक दो दिन में ईरान से क्रांतिकारियों के वीडियोज अचानक आने बंद हो गए हैं और कट्टरपंथियों का हुजूम दिखाई दे रहा है.
ईरान में इंटरनेट बंद
अगर आपको लग रहा है कि अचानक ही ईरान में तस्वीर बदल गई है तो आप शायद गलत हैं. क्योंकि सच्चाई कुछ और है. ईरान में बीते 100 घंटों से इंटरनेट ब्लैकआउट है. ईरान को पूरी तरह से बाहरी दुनिया से काट दिया गया है. पहले स्टारलिंक के जरिये क्रांतिकारी अपनी आवाज को दुनिया तक पहुंचा रहे थे. लेकिन स्टारलिंक पर भी क्रैकडाउन के बाद अब वही तस्वीरें बाहर आ रही हैं जो खामेनेई चाहते हैं.
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