
DNA Analysis: गाजा के नाम पर दरबार लगाने वाले डॉनल्ड ट्रंप को आज सबसे बड़ा झटका लगा है और ये झटका अमेरिकी अदालत से लगा है. जिस टैरिफ को ट्रंप ने भारत समेत पूरे विश्व के लिए परमाणु से बड़ा हथियार बना लिया था, उस टैरिफ को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के द्वारा लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक बताया है. कोर्ट ने क्या-क्या बड़ी बातें कही हैं. अब आप इसे समझिए.
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उन्हें टैरिफ लगाने का कोई अधिकार नहीं है. अदालत ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि ट्रंप ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया है. जिस इमरजेंसी अधिकार का सहारा लेकर ट्रंप ने टैरिफ लगाया था, उसे अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत ने गैर-कानूनी करार दिया. अमेरिकी कोर्ट का ये फ़ैसला बहुत बड़ा है क्योंकि इसका असर न सिर्फ़ अमेरिका पर पड़ेगा बल्कि भारत समेत दुनिया के उन देशों पर भी पड़ेगा जिनके ख़िलाफ़ ट्रंप ने टैरिफ लगाया था. अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इतना ज़्यादा टैरिफ कुछ ही देशों पर लगाया गया था. कुछ दिन पहले अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का एलान किया था. लेकिन इसके बावजूद ये टैरिफ ज्यादा है.
ट्रंप को लगा सुप्रीम झटका
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट नाम के जिस क़ानून का सहारा लेकर एकतरफा टैरिफ लगाया, वो ग़लत है. ऐसा करके उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है. कोर्ट ने कहा कि ये क़ानून किसी आपात स्थिति के दौरान आयात को रेगुलेट करने के लिए राष्ट्रपति को शक्ति देता है लेकिन ये उन्हें टैरिफ तय करने का अधिकार नहीं देता, टैरिफ तय करने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ अमेरिकी संसद को है. कोर्ट ने विशेष रूप से लिबरेशन डे टैरिफ और रेसिप्रोकल टैरिफ को निशाना बनाया.
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— Zee News (@ZeeNews) February 20, 2026
दुनिया के सभी देशों से हट जाएंगे ट्रंप टैरिफ
अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा दिए थे. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रम्प के लगाए गए टैरिफ हट जाएंगे. अमेरिका को टैरिफ के रूप में वसूला गया पैसा वापस करना पड़ सकता है. दुनिया के देशों को अमेरिका में सामान बेचने में राहत मिलेगी. भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को फायदा होगा. दुनिया का व्यापार ज़्यादा स्थिर हो सकता है. और शेयर बाज़ार में तेज़ी आ सकती है. अमेरिका की निचली अदालत ने भी टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था. इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप की दलील को खारिज कर दिया है. इसके बाद अब ट्रंप के पास एक ही विकल्प है कि वो टैरिफ वापस ले लें.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिलेगी अमेरिकी अर्थव्यवस्था
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला न सिर्फ़ ट्रंप के लिए बड़ा झटका है बल्कि अमेरिका के खजाना पर भी भारी पड़ेगा. क्योंकि टैरिफ गैर-कानूनी घोषित होने के बाद ट्रंप सरकार पर टैरिफ से कमाया गया पैसा लौटाने का दबाव बढ़ेगा. एक अनुमान के मुताबिक अब तक ट्रंप प्रशासन टैरिफ के जरिए तकरीबन 500 बिलियन डॉलर कमा चुका है. ट्रंप ने सबसे ज्यादा टैरिफ चीन से वसूला है. अब तक चीन की कंपनियां 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा का टैरिफ दे चुकी हैं. दूसरे नंबर पर मेक्सिको है जिससे 84 बिलियन डॉलर का टैरिफ वसूला जा चुका है. कनाडा ने तकरीबन 79 बिलियन डॉलर का टैरिफ दिया है तो भारतीय कंपनियां 33 बिलियन डॉलर का टैरिफ दे चुकी हैं. अमेरिका का मित्र देश जापान भी 30 बिलियन डॉलर दे चुका है.
ट्रंप को महंगी पड़ी अपने ही योजना
ट्रंप के लिए इतनी बड़ी रकम लौटाना बहुत महंगा साबित होगा. 500 बिलियन डॉलर की ये रकम अमेरिका के डॉलर रिजर्व को नुकसान पहुंचाएगी. साथ ही साथ ट्रंप के पास दूसरे देशों को ब्लैकमेल करने का जो जरिया था वो भी खत्म हो जाएगा. टैरिफ के नाम पर ट्रंप पहले से ही सुप्रीम कोर्ट को ब्लैकमेल कर रहे थे. ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले कहा था कि अगर टैरिफ को रद्द कर दिया गया तो अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि ऐसा हुआ तो अमेरिका पूरी तरह फंस जाएगा और सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा, लेकिन ट्रंप का ये दांव भी काम नहीं आया और यूएस की सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को रद्द कर दिया.

