
Jaipur: जयपुर ग्रेटर नगर निगम (Jaipur Greater Municipal Corporation) की महापौर सौम्या गुर्जर (Somya Gurjar) और पार्षदों को कांग्रेस सरकार (Congress Government) की ओर से निलंबित किए जाने के मामले में भाजपा नेताओं ने राज्यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.
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भाजपा नेताओं ने ज्ञापन में बताया कि सरकार ने अवैधानिक रूप से महापौर और पार्षदों के खिलाफ कार्यवाही की है. राज्यपाल को ज्ञापन में विभिन्न तथ्यों को प्रस्तुत करते हुये मामले में अविलम्ब जांच की मांग की. सरकार के आदेश को अपास्त कर महापौर और पार्षदों को बहाल किया जाए. दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए.
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BJP नेताओं ने ज्ञापन में कहा-
- नगर निगम जयपुर ग्रेटर में भारतीय जनता पार्टी की महापौर और बोर्ड बनने के बाद से ही कांग्रेस सरकार कर रही अड़चन.
- महापौर और बोर्ड के कार्यों में पहुंचाई जा रही बाधा.
- बोर्ड के चेयरमैनों के निर्वाचन के मामले में भी राज्य सरकार ने अड़चन की.
- तब HC के आदेश के बाद ही समितियों के चेयरमेन अपना पद ग्रहण कर पाये.
- कांग्रेस सरकार की और से बोर्ड को कानून की गलत व्याख्या कर अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है.
- नगर निगम ग्रेटर के क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी BVG कम्पनी की.
- कम्पनी की ओर से सफाई कार्य ठीक से सम्पादित नहीं किया जा रहा था तथा हड़ताल कर दी गई थी.
- इससे शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई तथा गन्दगी के ढेर होने लगे.
- कोविड महामारी के दौरान गन्दगी से महामारी फैलने के अंदेशे से जनता में भय व्याप्त था
- जनता के भय और शिकायत को देखते हुये महापौर सौम्या गुर्जर ने दिनांक 4 जून को सफाई व्यवस्था की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए एक बैठक रखी.
- इसमें नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह और अन्य अधिकारियों को बुलाया.
- राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 के अनुसार, नगर निगम के सभी अधिकारी महापौर के अधीन होते.
- यज्ञमित्र सिंह महापौर की बैठक को बीच में छोड़कर जाने लगे, जिस पर महापौर और पार्षदों ने आपत्ति जताई
- इस पर आयुक्त यज्ञमित्र सिंह आवेश में आ गये और महापौर को धमकी देते हुए कहा- कम्पनी के बिलों का भुगतान पहले करना पड़ेगा अन्यथा मैं जा रहा हूं.
- महापौर ने कहा कि कम्पनी के बिलों की जांच करवाकर ही भुगतान किया जायेगा.
- शहर में सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था अत्यावश्यक लेकिन आयुक्त अपनी बात पर अड़े रहे.
- महापौर के निर्देश को मानने से स्पष्ट इंकार कर बैठक से चले गए.
- बैठक के बाद आयुक्त ने सोची समझी साजिश के तहत राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस में एक झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई.
- महापौर और अन्य पार्षद गणों को जांच में सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया.
- जांच अधिकारी ने जो निष्कर्ष दिया है, वह आधारहीन है. राज्य सरकार के निर्देश पर जांच की गई.
