साल की शुरुआत कंगना रनौत के निर्देशन में बनी ‘इमरजेंसी’ से हुई, जो 17 जनवरी को रिलीज हुई. इस फिल्म में कंगना ने इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई है. फिल्म का सबसे चर्चित डायलॉग था, ‘भारत इंदिरा है और इंदिरा भारत है.’ यह लाइन इंदिरा गांधी कंगना रनौत की है, जो राजनीतिक ताकत और व्यक्तित्व की गहराई दिखाती है. फिल्म में इमरजेंसी के दौर को दिखाया गया है.
बैडएस रवि कुमार
फिल्म ‘बैडएस रवि कुमार’, जो 7 फरवरी को रिलीज हुई. कीथ गोम्स निर्देशित इस फिल्म में हिमेश रेशमिया ने रवि कुमार की भूमिका निभाई है. फिल्म के दो डायलॉग्स खूब लोकप्रिय हुए, ‘कुंडली में शनि, घी के साथ हनी और रवि कुमार से दुश्मनी सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है’ और ‘मुजरिमों को जो सजा दे उसे सरकार कहते हैं, मुजरिमों को जो उड़ा दे उसे रवि कुमार कहते हैं.’ दोनों लाइनें रवि कुमार हिमेश रेशमिया ने बोली हैं.
जाट
10 अप्रैल को ‘जाट’ रिलीज हुई. गोपीचंद मालिनेनी के निर्देशन में बनी फिल्म में एक से बढ़कर एक डायलॉग हैं. सनी देओल का डायलॉग ‘इस ढाई किलो के हाथ की ताकत पूरा नॉर्थ देख चुका है…अब पूरा साउथ देखेगा.’
रेड 2
अजय देवगन, वाणी कपूर और रितेश देशमुख स्टारर ‘रेड 2’ के डायलॉग्स भी खूब पसंद किए गए. यादगार डायलॉग्स में से एक है, ‘ये पांडव कब से चक्रव्यूह रचने लगे?’ ‘मैंने कब कहा कि मैं पांडव हूं? मैं तो पूरी महाभारत हूं!’ दूसरी है ‘आज से तुम्हारी उल्टी गिनती शुरू.’ इसके साथ ही एक अन्य डायलॉग ‘सर्च वारंट लेकर दादा भाई के घर आए हो, अंदर शस्त्रधारी देख रहे हो,’ जवाब मिलता है, ‘हां! दरवाजा खोलो, बाहर सरकारी कर्मचारी देख रहे हो.’
सितारे जमीन पर
20 जून को रिलीज हुई ‘सितारे जमीन पर’. आर.एस. प्रसन्ना के निर्देशन में बनी फिल्म में आमिर खान का डायलॉग, ‘सब अपने अपने नॉर्मल पर टिके बहते हैं… आपका नॉर्मल आपका, उनका नॉर्मल उनका.’ यह लाइन फिल्म की संवेदनशील थीम को हाइलाइट करती है.
होमबाउंड
26 सितंबर को नीरज घेवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ रिलीज हुई. फिल्म का डायलॉग ‘हम चाहे जीतने भी विकेट उखाड़ लें…एक सरकारी फॉर्म की कैटेगरी वाले डिब्बे भर की औकात है हमारी…बस वहीं तक सीमित हैं…वही हमारी पहचान हैं.’ यह सामाजिक दबाव और जाति पर गहरा कमेंट है.
