
बॉलीवुड अभिनेता संजय खान 60 और 70 के दशक में उन चुनिंदा सितारों में गिने जाते थे, जिनकी फिल्में लगातार सफल होती थीं. अच्छी कद-काठी, दमदार आवाज और पर्दे पर गंभीर मौजूदगी की वजह से उन्हें इंडस्ट्री में खास पहचान मिली. इसी दौर में लोग उन्हें प्यार से ‘गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड’ कहने लगे थे. यह टैग उन्हें ऐसे ही नहीं मिला था, बल्कि इसके पीछे उनकी फिल्मों की कामयाबी और उनका स्टारडम था.
संजय खान का जन्म 3 जनवरी 1940 को बेंगलुरु में हुआ था. उनका असली नाम शाह अब्बास अली खान था. बचपन से ही उनका झुकाव फिल्मों की ओर था. कहा जाता है कि राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ देखने के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें फिल्मों में ही काम करना है. यही फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी की दिशा बन गया.
संजय खान को दिलाया ‘गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड’ का टैग
फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने साल 1964 में चेतन आनंद की फिल्म ‘हकीकत’ से की. इस फिल्म में उनका रोल छोटा था, लेकिन उसी साल आई फिल्म ‘दोस्ती’ ने उन्हें पहचान दिला दी. ‘दोस्ती’ न सिर्फ सुपरहिट रही, बल्कि इसने नेशनल अवॉर्ड भी जीता. इसके बाद संजय खान के करियर ने रफ्तार पकड़ ली और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
ये भी पढ़ें: बॉर्डर-2 का गाना ‘घर कब आओगे’ हुआ रिलीज, 10 मिनट 32 सेकेंड का सॉन्ग सुन रो पड़े फैंस; 28 साल भी वही जलवा बरकरार
60 और 70 के दशक में संजय खान ने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं. ‘दस लाख’, ‘एक फूल दो माली’, ‘इंतकाम’, ‘उपासना’, ‘धुंध’, ‘मेला’ और ‘नागिन’ जैसी फिल्मों में उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया. इन फिल्मों की सफलता ने उन्हें स्टार बना दिया. उस समय दर्शकों को उनकी सादगी, गंभीर अभिनय और हीरो वाली छवि बहुत पसंद आती थी. यही वजह थी कि मीडिया और फैंस उन्हें ‘गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड’ कहने लगे.
ऐसा रहा सुनहरा दौर
संजय खान ने अभिनय के अलावा, निर्देशन और निर्माण में भी हाथ आजमाया. साल 1977 में उन्होंने फिल्म ‘चांदी सोना’ से बतौर निर्देशक शुरुआत की. इसके बाद ‘अब्दुल्ला’ जैसी फिल्म बनाई, जिसमें उन्होंने खुद अभिनय भी किया. हालांकि फिल्मों में उनका सफर धीरे-धीरे कम होता गया, और वह टीवी पर नजर आने लगे.
टेलीविजन की दुनिया में संजय खान ने इतिहास रच दिया. 90 के दशक में आया धारावाहिक ‘द स्वोर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ उस समय का सबसे भव्य और चर्चित शो माना गया. इसके बाद उन्होंने ‘जय हनुमान’ और ‘1857 क्रांति’ जैसे पौराणिक और ऐतिहासिक सीरियल बनाए. इन शोज ने उन्हें एक सफल टीवी निर्माता और निर्देशक के रूप में स्थापित किया.
ये भी पढ़ें: साल के पहले वीकेंड OTT पर होगा धमाल, कोर्टरूम ड्रामा से लेकर एक्शन और रोमांस तक, घर बैठकर देख सकेंगे ये फिल्में और सीरीज
अपने करियर के दौरान संजय खान को कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले. उन्हें अलग-अलग संस्थाओं द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट और एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया. फिल्मों और टीवी के अलावा उन्होंने बिजनेस की दुनिया में भी कदम रखा और होटल व रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में काम किया.
फिर भी 15000000000 की संपत्ति का है मालिक
Sanjay Khan का जन्म बेंगलुरु के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. अफगानी पिता और पारसी मां के पांच संतान में से एक फिरोज खान के बचपन का नाम अब्बास अली खान था. बिजनेसमैन पिता की तरह संजय खान भी व्यवसाय से काफी पहले जुड़ गए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 80 के दशक में ही उन्होंने चावल निर्यात का व्यवसाय शुरू किया था, जिसमें वह मध्य पूर्वी देशों में चावल का निर्यात करते थे.1997 में उन्होंने बैंगलोर में अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘पांच सितारा डीलक्स गोल्डन पाम्स होटल और स्पा लॉन्च किया था. उनकी पत्नी जरीन खान ने होटल के भीतरी हिस्से को डिजाइन किया था. करीब 150 कमरे वाले गोल्डन पाम्स होटल और स्पा पर 2010 तक एक्टर का मालिकाना हक था. एक्टर रियल एस्टेट में भी एक्टिव रहे हैं और एस्सके प्रोपर्टीज नाम से उनका एक रियल एस्टेट फर्म भी है. करीब 10 हजार करोड़ की लागत के साथ उन्होंने 2018 में एक थीम पार्क बनाने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ विवादों के चलते प्रोजेक्ट बंद हो गया था.
