बॉलीवुड में सफलता अक्सर कलाकारों को लंबे समय तक बांध कर रखती है. जब कोई कलाकार लोकप्रियता, कमाई और दर्शकों के प्यार तीनों के शिखर पर होता है तो आमतौर पर वह उस दौर को जितना हो सके, उतना लंबा खींचना चाहता है, लेकिन हिंदी सिनेमा में कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्होंने ठीक उसी वक्त फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला लिया, और इन्हीं नामों में एक नाम है उर्मिला मातोंडकर का. जब उनका करियर अपने सबसे सुनहरे दौर में था, तभी उन्होंने पर्दे से ब्रेक ले लिया.
उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ. उन्हें बचपन से ही अभिनय में दिलचस्पी थी. बहुत कम उम्र में उन्होंने कैमरे का सामना कर लिया था. महज तीन साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘कर्म’ से बतौर बाल कलाकार काम शुरू किया. इसके बाद वह ‘मासूम’ में नजर आईं. पढ़ाई के साथ-साथ वह अभिनय करती रहीं और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा बन गईं.
डायरेक्टर के प्यार में पड़कर तबाह हो गया जिसका करियर
बतौर लीड एक्ट्रेस उर्मिला को असली पहचान साल 1995 में आई फिल्म ‘रंगीला’ से मिली. इस फिल्म ने उनकी पूरी किस्मत बदल दी. आमिर खान और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारों के बीच भी उर्मिला सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं. उनके डांस, आत्मविश्वास और नए अंदाज ने दर्शकों को दीवाना बना दिया. इसी फिल्म के बाद वह ‘रंगीला गर्ल’ कहलाने लगीं. ‘रंगीला’ को कई बड़े पुरस्कार मिले और उर्मिला को भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला.
‘रंगीला’ के बाद उर्मिला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘सत्या’, ‘कौन’, ‘मस्त’, ‘दौड़’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने गंभीर और सशक्त भूमिकाओं में भी खुद को साबित किया. एक समय ऐसा आया जब उनकी फिल्मों की सफलता के कारण वह कई फिल्मों में अपने हीरो से ज्यादा फीस लेने लगी थीं.
फिर शोहरत से खुद बना ली दूरी
सबसे चौंकाने वाला फैसला तब आया, जब उर्मिला ने अपने करियर के पीक पर ही फिल्मों से दूरी बना ली. जिस उम्र में अभिनेत्रियां अपने करियर को और मजबूत करती हैं, उसी उम्र में उर्मिला ने कैमरे से पीछे हटना चुना. यह फैसला न तो किसी मजबूरी का नतीजा था और न ही असफलता का, बल्कि उनकी अपनी सोच और मानसिक शांति से जुड़ा हुआ था.
फिल्मों से दूर होने के बाद उर्मिला ने साल 2016 में मोहसिन अख्तर मीर से शादी की. बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. हालांकि, राजनीति में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी फिल्मों में मिली थी, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद तय की.
