Emraan Hashmi Breaks Silence On His Character In Haq: बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी ने अपनी एक्टिंग से इंडस्ट्री में जबरदस्त धाक जमाई है. जिस भी फिल्म में एक्टर नजर आते हैं, उसमें अपनी एक्टिंग और किरदार से धूम मचा देते हैं. हाल ही में इमरान हाशमी को फिल्म ‘हक’ में देखा गया था. फिल्म में उनके साथ यामी गौतम नजर आई थी. हक फिल्म हाल ही में 2 जनवरी को ओटीटी पर स्ट्रीम हुई है. इस फिल्म को जंगली पिक्चर्स के बैनर तले बनाया गया है. इमरान हाशमी ने फिल्म में अपने किरदार को लेकर चुप्पी तोड़ी और यामी गौतम संग काम करने का अनुभव शेयर किया.
इमरान हाशमी ने अपने किरदार पर किया खुलासा
इमरान हाशमी ने हाल ही में जूम को इंटरव्यू दिया. इस दौरान एक्टर से पूछा गया कि वो क्या वजह थी, जिसके लिए उन्होंने फिल्म के लिए हां कही. इसपर एक्टर ने बताया कि उन किरदारों को अदा करने में क्या ही मजा जो कॉम्प्लेक्स न हों. हक फिल्म में जो चीज मुझे रोचक लगी वो ये थी कि इसमें मेरा किरदार न तो सही बताया गया और न ही गलत. वो अपने विश्वास, असुरक्षा और नियंत्रण की जरूरत के आधार पर आकार ले रहा था. फिल्म की स्क्रिप्ट भी दर्शकों को इस बात को समझने की अनुमति दे रही थी कि वो किरदार कहां से आ रहा है, बगैर किसी एक्शन को दिखाए. इसे बैलेंस लिखना तो मुश्किल है ही और इसे निभाना उतना ही मुश्किल है. मैंने हक को हां इसी वजह से की, क्योंकि ये असल जिंदगी के विवादों को भी दर्शाता है.
किरदार ने एक्टर की आत्मा पर डाला असर
एक्टर ने आगे बताया कि ‘हक’ से जुड़े उनके किरदार ने उनकी आत्मा पर भी काफी असर डाला है. ये किरदार मेरी आत्मा पर थोड़ा भारी पड़ा. फिल्म में दिखाया गया टकराव किसी गुस्से या आक्रामकता के कारण बाहर नहीं आया. बहुत सी ऐसी चीजें है, जिसमें आंतरिक, विचारधारा और निजी तौर से जुड़ी थीं. मेरे किरदार का मानना था कि वो जो फैसले खासकर कानूनी तौर पर करता है वो सही है. ये चीजे थोड़ी खतरनाक है, क्योंकि ऐसा करने वाले इंसान को ये बात खलनायकी नहीं लगती. अपने करियर के इस पॉइंट पर मैं उन किरदारों की तरफ आ चुका हूं, जहां अपने डार्क साइड को खुली तौर पर पर्दे पर दिखाते, बल्कि धीरे-धीरे इसे सामने लाते हैं. इस इंसान का नियंत्रण, इंकार और नैतिक कट्टरपन मेरे लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण था.
यामी गौतम के लिए एक्टर ने कहीं ये बात
वहीं इमरान हाशमी ने यामी गौतम के संग काम के अनुभव को बताते हुए कहा कि ‘यामी बहुत साफ तौर पर सीन्स को पकड़ती है. वो भावनाओं को बहुत ज्यादा नहीं दिखातीं, जो इस फिल्म के लिए काफी जरूरी है. हम दोनों के बहुत सारे सीन्स ऐसे थे, जिसमें चीजें बगैर कहीं हुई सिर्फ झलक, रुकावट और असंतुलन पर आधारित थीं. उनके ठहराव ने बगैर किसी डायलॉग के ही चिंता बढ़ा दी, जो एक को-एक्टर होने के नाते आपको भी धकेलेगी. ये चीज टकराव को और बढ़ा देती है, क्योंकि ये बात असली लगती है.’
