Anurag Kashyap: बॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर अनुराग कश्यप इन दिनों अपनी फिल्म केनेडी को लेकर सुर्खियों में हैं, जो 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर को याद किया और बताया कि एक अधूरे रह गए प्रोजेक्ट ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से कितना तोड़ दिया था.
‘900 पन्नों की स्क्रिप्ट लिख ली थी…’
हाल ही में अनुराग कश्यप ने द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को बताया कि उन्होंने मशहूर किताब मैक्सिमम सिटी के अडैप्शन के लिए करीब 900 पन्नों की स्क्रिप्ट लिख डाली थी. उन्होंने बताया कि नेटफ्लिक्स ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी तो दे दी थी, लेकिन बाद में चीजें ठहर-सी गईं. उनके मुताबिक ‘मैंने उनसे कहा था कि पहले किताब पढ़ लीजिए, लेकिन एक शख्स को छोड़कर किसी ने किताब नहीं पढ़ी. करीब डेढ़ साल तक सन्नाटा रहा. किसी ने साफ तौर पर यह नहीं कहा कि प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ेगा, और यही अनिश्चितता सबसे ज्यादा तनाव देने वाली थी.’
‘मुझे हार्ट अटैक आया…’
डायरेक्टर ने इस अनुभव को बेहद भावुक शब्दों में बयां किया. उन्होंने कहा, ‘जब आप किसी प्रोजेक्ट पर इतना वक्त लगाते हैं, तो वह आपका बच्चा बन जाता है. उसके रुक जाने का एहसास किसी ‘मिसकैरेज’ जैसा था.’ इस सदमे का असर उनकी सेहत पर भी पड़ा. उन्हें हार्ट अटैक आया, अस्थमा की शिकायत हुई और वे स्टेरॉयड्स पर आ गए. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस दौर में वे बहुत ज्यादा शराब पीने लगे थे और खुद को संभाल नहीं पा रहे थे.
‘तीन बार रिहैब गए’
अनुराग ने बताया कि वे तीन बार रिहैब भी गए. शारीरिक हालत इतनी खराब हो गई थी कि वे व्हीलचेयर तक सीमित हो गए थे. लेकिन इसी मुश्किल वक्त में उन्हें जोया अख्तर का फोन आया, जिन्होंने उन्हें मेड इन हेवन में एक भूमिका का प्रस्ताव दिया. अनुराग ने कहा कि वे उस समय चल भी नहीं पा रहे थे, लेकिन जोया ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी स्थिति को ही कहानी का हिस्सा बना लिया जाएगा. धीरे-धीरे अनुराग कश्यप ने खुद को संभाला और काम पर वापसी की. उनका यह सफर बताता है कि असफलता और निराशा के बाद भी हिम्मत और जुनून इंसान को दोबारा खड़ा कर सकता है.
