
बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. एक्टर को 9 करोड़ रुपये के लोन केस में तिहाड़ जेल में बंद रहना पड़ा था. लेकिन हाल ही में कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी है और अब वो बाहर आ चुके हैं. वहीं राजपाल यादव के जेल से बाहर आते ही उनके वकील ने मीडिया के सामने अपनी बात को रखते हुए बताया कि कैसे इस मामले की शुरुआत हुई. एक्टर के वकील ने कहा कि ये विवाद फिल्म ‘अता पता लापता’ के म्यूजिक लॉन्च डे से शुरू हुआ था, जहां बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी मौजूद थे.
बिग बी से क्या है कनेक्शन?
राजपाल यादव के वकील भास्कर के मुताबिक, फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए माधव गोपाल ने एक्टर को 5 करोड़ रुपए का लोन दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच एक समझौता हुआ. इस डील के बाद अगस्त, 2012 तक तीन और समझौते हुए, जिसके चलते राजपाल द्वारा 5 चेक जारी किए गए, जिन्हें दिसंबर तक सबमिट करना था. उन्होंने आगे बताया कि फिल्म के म्यूजिक लॉन्च वाले दिन तक सब कुछ ठीक था. वकील भास्कर ने आगे बताया कि म्यूजिक लॉन्च इवेंट के बाद से ही कई तरह की समस्याएं शुरू हो गईं. जबकि उस दिन सारी चीजें पहले से तय प्लान के हिसाब से हुईं. वहीं अमिताभ बच्चन भी इस इवेंट का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गए और वो समय से वहां शामिल हुए.
आखिर क्यों कोर्ट कर पहुंचा मामला?
भास्कर ने बताया कि इस इवेंट पर (केस दायर करने वाले) माधव गोपाल बिग बी के साथ स्टेज पर खड़े होना चाहते थे, जिसके लिए राजपाल यादव की टीम ने इनकार कर दिया. क्योंकि अमिताभ बच्चन इस इवेंट में फ्री ऑफ कॉस्ट शामिल हुए थे. बिग बी के साथ स्टेज शेयर ना कर पाने की वजह से वो काफी नाराज हो गए, जिसके बाद उन्होंने समझौते को आधार बनाते हुए सितंबर, 2012 में दिल्ली हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज करा दी. इस शिकायत में उन्होंने लोन को चुकाने और तब तक फिल्म पर रोक लगाने की मांग की. वहीं ये मामला सितंबर से दिसंबर के महीने तक खिंच गया, जिसके बाद राजपाल द्वारा 60,60,350 रुपए का चेक सबमिट किया गया और दोनों के बीच एक समझौते पर साइन किए गए. इस समझौते से पिछले सारे पुराने समझौते रद्द हो गए.
1 करोड़ रुपए का हो चुका था भुगतान
वकील ने आगे बताया कि 2016 में नया आदेश जारी किया गया, जिसके तहत चुकाने के लिए 10 करोड़ रुपए और बाकी थे. इस मामले में हाई कोर्ट ने कहा कि लोन को चुकाने की प्रक्रिया को योजना के तहत ही पूरा करना चाहिए, जिसके बाद 10 करोड़ रुपए के लोन से 1 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया. लेकिन बचे हुए पैसों के लिए एक दूसरे गांरटर सामने आए, जिनका नाम आनंत दत्ताराम है.
नए गारंटर की हो गई एंट्री
नए गारंटर ने 15 करोड़ रुपए की संपत्ति को जमानत के तौर पर पेश किया और पैसे लौटाने के लिए एक महीने का समय मांगा, जिसे माधव गोपाल द्वारा इनकार कर दिया गया और डिक्री के पालन के लिए राजपाल जी को जेल भेजने की मांग की. वकील ने आगे कहा ‘जब केस की कार्यवाही चल रही थी, तभी माधव ने तीनों पुराने समझौते के चेकों को दोबारा दिखाना शुरू कर दिया, जिसे दोनों ने आपसी सहमति से रद्द कर दिया था. साल 2018 में इसी आधार पर लोअर कोर्ट में केस चलाया गया, जहां राजपाल को दोषी ठहराकर उनपर 11 करोड़ रुपए का फाइन लगाया गया.
पैसा लौटाने का किया था वादा
नवंबर में इस केस के चलते एक्टर को तीन महीने की कैद की सजा सुनाई गई. लेकिन ये दोनों मामले एक साथ नहीं चल सकते. इसलिए राजपाल की टीम द्वारा दोबारा सुनवाई की मांग की गई, जिसमें नए जज ने पाया कि केस में कोई दम नहीं है, जिसके बाद एक्टर ने अपने बयान में कहा कि उन्हें समय दिया जाए तो वो पैसा लौटा देंगे. अब जब इस के में सुनवाई चल रही है तो राजपाल की टीम ने कोर्ट से उनकी बात को सुनने और योग्यता के आधार पर फैसला देने की रिक्वेस्ट की है.

