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फिल्म: तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी
डायरेक्टर: समीर विद्वान
स्टारकास्टर: कार्तिक आर्यन, अनन्या पांडे, नीना गुप्ता, जैकी श्रॉफ और टीकू तलसानिया
रेटिंग: 4/5

Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri Review: कुछ फिल्में नई-नई ट्रिक्स पर नहीं, बल्कि अपने प्यार भरे एहसास पर टिकी होती हैं. ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ (Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri) भी ऐसी ही एक रोमांटिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है. समीर विद्वांस के डायरेक्शव में बनी इस फिल्म की कहानी करण शर्मा ने लिखी है, जिसमें पुराने जमाने की मोहब्बत और आज के दौर की उलझे इमोशन्स को खूबसूरती से लोगों के सामने पेश किया गया है. ये कहानी शोर नहीं मचाती, बल्कि धीरे-धीरे दिल तक पहुंचती है. 

ये फिल्म में रिश्तों को सादगी के साथ समझाने की कोशिश करती है. करण जौहर, आदर पूनावाला, अपूर्वा मेहता, भूमिका तिवारी, शरीन मंत्री केडिया और किशोर अरोड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई ये फिल्म धर्मा प्रोडक्शंस और नमह पिक्चर्स के बैनर तले बनी है. बड़े प्रोडक्शन हाउस होने के बावजूद फिल्म का ट्रीटमेंट बहुत पर्सनल और इमोशनल रखा गया है. साथ ही फिल्म में रिश्तों की बारीकियों पर भी ध्यान दिया गया है, जिससे कहानी बनावटी नहीं लगती और दर्शक इससे खुद को जोड़ पाते हैं. इसलिए ये फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी. 

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फिल्म की कहानी 

फिल्म की कहानी की बात करें तो रे नाम का एक बेफिक्र NRI वेडिंग प्लानर है, जिसका किरदार कार्तिक आर्यन ने निभाया है. उसकी मुलाकात रूमी से होती है, जो एक सेल्फ डिपेंडेंट और जिद्दी राइटर है. इस रोल में अनन्या पांडे नजर आती हैं. क्रोएशिया की एक ट्रिप के दौरान दोनों के बीच दोस्ती होती है, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल जाती है. लेकिन जब जिम्मेदारियां और फैसले सामने आते हैं, तो उनका रिश्ता मुश्किलों से गुजरता है. कार्तिक इस फिल्म की जान साबित होते हैं. उनका चुलबुला अंदाज तो है ही, लेकिन इस बार उन्होंने अपने किरदार में इमोशनल गहराई भी जोड़ी. 

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फिल्म के दूसरे हाफ में आता है मजा

खासकर दूसरे हाफ में उनका अभिनय ज्यादा असर छोड़ता है. एक लापरवाह इंसान से जिम्मेदार साथी बनने का उनका सफर सहज और सच्चा लगता है. ये बदलाव न तो अचानक लगता है और न ही बनावटी, बल्कि धीरे-धीरे दर्शक इसे महसूस करता है. अनन्या पांडे ने रूमी के किरदार को कॉन्फिडेंस और सिंपल के साथ निभाया है. उन्होंने ओवर ड्रामा से बचते हुए अपने किरदार की इमोशनल उलझनों को बहुत नेचुरल तरीके से पेश किया है. इमोशनल सीन में भी उनकी परफॉर्मेंस संतुलित रहती है. कार्तिक और अनन्या की केमिस्ट्री काफी शानदार लगती है. 

सपोर्टिंग कास्ट ने भी किया जबरदस्त काम 

उनके बीच की बातचीत बनावटी नहीं, बल्कि रियल लाइफ जैसी महसूस होती है, जिससे लव स्टोरी और मजबूत बनती है. सपोर्टिंग कास्ट भी फिल्म को मजबूती देती है. नीना गुप्ता अपनी गर्मजोशी से हर सीन में असर छोड़ती हैं. जैकी श्रॉफ का किरदार शांत लेकिन प्रभावशाली है. टीकू तलसानिया परिवार वाले हिस्सों में हल्कापन और अपनापन लेकर आते हैं. तकनीकी तौर पर अनिल मेहता की सिनेमैटोग्राफी शानदार है, जो क्रोएशिया की खूबसूरती और भारत की भावनाओं को अच्छे से दिखाती है. विशाल-शेखर का म्यूजिक कहानी के मूड के साथ चलता है.

 कुल मिलाकर देखने लायक है ये फिल्म 

समीर विद्वांस ने रिश्तों को बेहद सेंसिटिविटी के साथ संभाला है और करण शर्मा की लिखाई शोर से ज्यादा खामोशी पर भरोसा करती है. हालांकि, फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा लंबा लगता है, लेकिन जैसे ही असली टकराव शुरू होता है, कहानी पकड़ बना लेती है. खास बात ये है कि फिल्म में समझौते का बोझ सिर्फ महिला पर नहीं डाला गया, बल्कि पुरुष के बदलाव और त्याग को भी दिखाया गया है. कुल मिलाकर ये एक फैमिली के साथ देखने लायक, सुकून देने वाली रोमांटिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है.