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बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन को जी 24 घंटा के अनन्य सम्मान 2026 में महासम्मान से नवाजा गया है. ये अवॉर्ड उनके लाइफटाइम अचीवमेंट्स और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दिए योगदान के लिए मिला. कार्यक्रम कोलकाता में हुआ, जहां सुष्मिता ने स्टेज पर अपनी मौजूदगी से सबको इम्प्रेस किया. वो बतौर मिस यूनिवर्स 1994 की विनर से लेकर बॉलीवुड डिवा और सिंगल मदर के रूप में अपनी जर्नी के लिए जानी जाती हैं. ये सम्मान उन अनन्य लोगों को दिया जाता है जो समाज में चुपचाप बदलाव लाते हैं. सुष्मिता की हिम्मत भरी जिंदगी और साहस ने उन्हें ये खास पहचान दिलाई.

सुष्मिता सेन को मिला अवॉर्ड 

सुष्मिता सेन ने मिस यूनिवर्स 1994 जीतकर इतिहास रचा था, वो पहली भारतीय थीं जिन्होंने ये टाइटल लिया. उसके बाद फिल्मों में एंट्री की, कई हिट फिल्में दीं जैसे मैंने प्यार किया, बिरसा, और हाल में ताली जैसी वेब सीरीज में कमाल किया. वो सिंगल मदर हैं, दो बेटियों की मां, और हमेशा अपनी इंडिपेंडेंस के लिए जानी जाती हैं. अनन्य सम्मान में उनका नाम आना उनके करियर की ताकत और सोसाइटी में इंस्पिरेशन होने की वजह से हुआ. ये अवॉर्ड उनके लाइफस्टाइल और योगदान को सेलिब्रेट करता है. कार्यक्रम में सुष्मिता ने स्टेज पर झलक दिखाई, जहां उनकी बंगाली रूट्स और बॉलीवुड जर्नी पर बात हुई. अनन्य सम्मान 2026 में कई कैटेगरी में अवॉर्ड्स दिए गए, लेकिन सुष्मिता का महासम्मान सबसे हाइलाइट रहा. 

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इस बार 2026 में ये इवेंट उन हीरोज को फोकस कर रहा है जो अलग-अलग फील्ड्स में योगदान दे रहे हैं. सुष्मिता सेन को महासम्मान मिलना इसलिए खास है क्योंकि वो बंगाली मूल की हैं और मिस यूनिवर्स बनकर भारत का नाम रोशन किया. कार्यक्रम में हजारों लोगों की भीड़ थी, और सुष्मिता ने वहां अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कोलकाता में ठंड लगने की उम्मीद थी, लेकिन गर्मजोशी ने सब बदल दिया. ये उनके लिए इमोशनल मोमेंट था.

क्या है अनन्य सम्मान?

सबसे पहले तो यह जान लेते हैं कि, ये सम्मान क्या है. बता दें कि, ये सालाना अवॉर्ड उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाज की भलाई के लिए लगा दी, लेकिन कभी नाम या शोहरत के पीछे नहीं भागे. यह मंच मशहूर होने के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति आभार जताने के लिए है.

ये शाम है खास

‘अनन्य’ शब्द आज कोई विशेषण नहीं…यह एक रिश्ता है. समय और इंसान के बीच का रिश्ता, परिश्रम और कृतज्ञता के बीच का रिश्ता, खामोशी और सम्मान के बीच का रिश्ता. ऐसा इसलिए क्योंकि सच्ची रोशनी कभी मंच पर नहीं बनती.वह इंसान के भीतर जन्म लेती है. जब वह रोशनी एक बार जल उठती है, तो बहुत दूर तक रास्ता दिखाती है. आज की शाम उसी रोशनी के आगे सिर झुकाने की है. अनन्य सम्मान 2026 में अलग-अलग कैटेगरी के लोगों को सम्मानित किया गया. जिसमें आर्ट और कल्चर के अलावा लिटरेचर, खेल, म्यूजिक और फिल्म से जुड़े लोग शामिल है.