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नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर ने जमकर तबाही मचाई है. महामारी से जारी इस जंग में भारत को 42 देशों का साथ मिला है. जिसमें से 21 देशों की मदद भारत पहुंच चुकी है. भारत में ऑक्सीजन संकट (Oxygen Crisis) दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और अन्य उपकरण आए हैं. दवाओं की कमी दूर करने के लिए कई दवाओं की आपूर्ति के साथ रेमडेसिवर (Remdesivir) के लाखों वॉयल भेजे गए हैं.   

विदेश से पूरी हो रही जरूरत

वर्तमान में, देश में मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति का उत्पादन 5700 मीट्रिक टन से बढ़कर 9480 मीट्रिक टन हो गया है, लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है. इस बीच अंतर्राष्ट्रीय सहायता से, भारत को 20,000 ऑक्सीजन सिलेंडर, 11000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 30 ऑक्सीजन टैंकर, और 75 ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट्स मिले हैं.

ऑक्सीजन के 30 टैंकरों में से 9 देश में आ चुके हैं. विदेश मंत्रालय (MEA) 50,000MT प्लांट स्थापित करने के लिए दुनिया के बड़े दिग्गजों के संपर्क में है. कुल 1172 ऑक्सीजन टैंकर लगाए जा रहे हैं. वहीं 1,02,400 ऑक्सीजन सिलेंडर और 1 लाख ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर के आयात की जानकारी मिली है. कई ऑक्सीजन टैंकर निजी कंपनियों के बीच हुई डील का हिस्सा बनकर आए हैं.

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इस तरह दूर होगी इंजेक्शन की किल्लत

वहीं रेमडेसविर (Remdesivir) की बात करें तो इसका लक्ष्य देश में करीब 1 करोड़ यानी करीब 3 लाख रोजाना का उत्पादन करना तय हुआ है. अमेरिकी फर्म गिलियड साइंसेज ने शनिवार को रेमेडिसविर की 1.5 लाख शीशियां भेजीं थीं वहीं बाकी 1,5 लाख शीशियां भी जल्द आएंगी. ईवा फार्मा से, भारत को 4 लाख डोज मिल रही है.

वहीं भारत को बांग्लादेश, जर्मनी, उज्बेकिस्तान और यूएई ने भी सहयोग किया है. कुल मिलाकर, भारत को इन स्रोतों से रेमेडिसवीर की 16 लाख शीशियाँ मिलेंगी. 

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