History of Kaundinya: भारत का इतिहास काफी ज्यादा गौरवशाली है, यहां पर कई ऐसी ऐतिहासिक चीजें रही जो हमेशा से अलौकिकता से भरी थी. इन ऐतिहासिक चीजों को दुनिया से रूबरू कराने के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है. भारत के नए जहाज में भी यही ऐतिहासिकता झलकती है जो अन्य जहाजों से बिल्कुल अलग है. इस जहाज का इतिहास 5वीं सदी से जुड़ा है इसमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी इस्तेमाल नहीं की गई है. इंडियन नेवी सेलिंग वेसल कौंडिन्य, नेवी का देश में बना पारंपरिक सिला हुआ जहाज है जो गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट की यात्रा पर निकला है. बहुत सारे लोग इसके नाम चर्चा कर रहे हैं, आइए जानते हैं कि आखिर कौंडिन्य क्या है?
पीएम मोदी ने कही ये बात
इसकी रवानगी पर पीएम मोदी ने लिखा कि INSV कौंडिन्य पोरबंदर से मस्कट, ओमान के लिए अपनी पहली यात्रा पर निकल रहा है, पुरानी भारतीय स्टिच्ड-शिप तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया यह जहाज भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को दिखाता है. मैं इस अनोखे जहाज को बनाने में डिजाइनरों, कारीगरों, जहाज बनाने वालों और भारतीय नौसेना को उनकी मेहनत के लिए बधाई देता हूं, क्रू को एक सुरक्षित और यादगार यात्रा के लिए मेरी शुभकामनाएं, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र और उससे आगे के हमारे ऐतिहासिक संबंधों को फिर से देखेंगे.
INSV कौंडिन्य क्यों खास है?
INSV कौंडिन्य एक स्टिच्ड सेल शिप है जिसे अजंता गुफाओं की पेंटिंग में दिखाए गए 5वीं सदी के जहाज पर बनाया गया है, यह प्रोजेक्ट जुलाई 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और होडी इनोवेशन के बीच एक तीन-तरफा समझौते के तहत शुरू हुआ था, जिसमें संस्कृति मंत्रालय से फंडिंग मिली थी. इस जहाज का नाम महान नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने पुराने समय में भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा की थी, यह जहाज भारत की ऐतिहासिक समुद्री विरासत को दिखाता है.
इसके पाल पर गंडभेरुंड और सूरज की आकृतियां हैं, आगे का हिस्सा सिंह याली की मूर्ति से सजा है और डेक पर हड़प्पा-शैली का एक प्रतीकात्मक पत्थर का लंगर रखा है.
क्या है कौंडिन्य का मतलब?
इसके अलावा कौंडिन्य नाम का इतिहास काफी ज्यादा दिलचस्प है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे प्रसिद्ध कौंडिन्य बुद्ध के शुरुआती अनुयायियों में से एक थे, ऐसा कहा जाता है कि ये पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बुद्ध के उपदेश (धम्म चक्र प्रवर्तन) के बाद ज्ञान प्राप्त किया और अर्हत बने. साथ ही बता दें कि यह कुंडिन नामक ऋषि के वंशज या गोत्र का प्रतीक है। कई वैदिक ऋषि और आचार्य भी कौंडिन्य कहलाते थे, वहीं हाथों को संतुलित करने वाले एक कठिन योग आसन कौंडिन्यासन को इन्हीं के नाम से जाना जाता है. यह उनकी आध्यात्मिक शक्ति को भी दर्शाता है.
