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Abdul Naim School MP Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक मुस्लिम व्यक्ति की ओर से गांव में बनवाए गए स्कूल को मदरसे की अफवाह में प्रशासन की ओर से ढहाए जाने का मुद्दा तूल पकड़ गया है. इस मुद्दे पर मोदी सरकार के तमाम विरोधी दल और नेता सक्रिय हो गए हैं. AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी भी इसमें पीछे नहीं है. उन्होंने बैतूल की घटना का हवाला देते हुए बीजेपी और मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला.

ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट करके कहा, ‘अब्दुल’ की ग़लती यह नहीं है कि उनका स्कूल गैर-क़ानूनी तौर पर चल रहा है. उनके स्कूल के तमाम कागजात मौजूद हैं. उनकी गलती ये है कि वे भारतीय मुसलमान हैं और अपने गरीब, गैर-मजहबी हमवतन के लिए उनके दिल में हमदर्दी है.’

‘अब्दुल नईम ने गांव में बनवाया स्कूल ‘

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उनका ये तंज भरा पोस्ट बैतूल में अब्दुल नईम का कथित स्कूल तोड़ने की घटना के बाद सामने आया है. इस घटना को @KashifKakvi के एक्स हैंडल ने 13 जनवरी को पोस्ट किया था. इस पोस्ट में अकाउंट होल्डर ने डिटेल में पूरी घटना के बारे में बताया था.

यूजर ने पोस्ट में लिखा था, मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के भैंसदेही तहसील अंतर्गत ढाबा गांव में अब्दुल नईम ने लगभग 20 लाख रुपये खर्च करके एक स्कूल भवन बनवाया. गांव की आबादी करीब दो हजार है, जिसमें केवल चार मुस्लिम परिवार हैं. सबसे करीब स्कूल पांच किलो मीटर दूर है. 

‘गांव में फैल गई’अवैध मदरसा’ बनाने की अफवाह’

चूंकि बच्चों को शिक्षा की भारी कमी है, इसलिए नईम ने नर्सरी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई शुरू करने की योजना बनाई. लेकिन तीन दिन पहले एक अफवाह फैलाई गई कि नईम ने ‘अवैध मदरसा’ बनवाया है और यहां बच्चों को ‘अनधिकृत रूप’ से शिक्षा दे रहे हैं. 

एक्स होल्डर ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, ‘गांववालों के अनुसार, एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी जांच करने आए और क्लीन चिट् देकर गए. साथ ही ग्राम पंचायत से NOC लेने को भी कहा. अगले दिन ग्राम पंचायत ने 11 जनवरी को नईम को नोटिस जारी कर भवन गिराने का आदेश दिया. जब नईम पंचायत भवन गए तो कथित रूप से उनसे आवेदन न लेकर सोमवार को आने को कहा गया.’

‘ऊपर से बहुत प्रेशर है, स्कूल तोड़ना पड़ेगा!’

नईम ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि भूमि के सारे कागजात पूरे हैं और 30 दिसंबर को स्कूल शिक्षा विभाग में संचालन अनुमति के लिए आवेदन जमा किया गया था. लेकिन भवन तोड़ने का आदेश दिया जा चुका था. जब गांव वालों ने स्कूल तोड़े जाने के नोटिस का विरोध किया, तो पंचायत ने आनन-फानन में भवन को NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी कर दिया.

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. शाम को एसडीएम साहब ने नईम को बताया कि ‘ऊपर से बहुत प्रेशर है’. लिहाजा स्कूल तोड़ना पड़ेगा. गांव वालों ने कहा कि यदि कोई कानून उल्लंघन हुआ है, तो जुर्माना भरकर उसकी भरपाई की जा सकती है. भवन तोड़ने पर उनके बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे.

बिना नोटिस के एसडीएम ने चलवाया बुलडोजर!

जब NOC के बाद भी सोमवार को भवन तोड़ने का आदेश वापिस नहीं हुआ तब गांव वालों ने 80 किलोमीटर दूर कलेक्टर की जनता दरबार से मिलने की का प्लान बनाया. वे मंगलवार को नईम के साथ बैतूल कलेक्टर कार्यालय ज्ञापन सौंपने पहुंचे, लेकिन उन्हें रास्ते में पुलिस ने रोक दिया.

घंटो बाद जब उन्हें छोड़ा गया और वह जनता दरबार में पहुंचे और अपनी बात रखी. तब कलेक्टर साहब ने जांच की बात कही. जब कलेक्टर साहब जांच की बात कर रहे थे इस बीच एसडीएम साहब कथित रूप से भवन तोड़ रहे थे. यह सब काम बिना कोई नोटिस जारी हुए कर दिया गया. जिससे अब गांव के बच्चे पढ़ाई से वंचित रह गए हैं. 

नियमों के मुताबिक नहीं हुआ था निर्माण- जिलाधिकारी

इस मामले में बैतूल के जिलाधिकारी नरेंद्र सूर्यवंशी का बयान सामने आया है. उन्होंने निर्माण को अवैध बताते हुए कहा कि नियमों के अनुसार निर्माण न होने की वजह से कानून के तहत कार्यवाही की गई. उन्होंने मदरसे की अफवाह या कथित ऊपरी प्रेशर के आरोपों पर कोई टिप्पणी करने से भी इनकार कर दिया. इस मामले में कांग्रेस विधायक उमर सिंघार ने बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने इसे बीजेपी सरकार की शिक्षा विरोधी सोच बताया है.