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संजय/सतनाः योग गुरू बाबा रामदेव के बयान से शुरू हुआ आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में देहरादून में आईएमए के प्रांतीय सचिव डॉ. अजय खन्ना ने आयुर्वेद डॉक्टर्स को चुनौती दी थी कि वह कोरोना की तीसरी लहर में फ्रंटलाइन में रहकर काम करें. अब आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने यह चैलेंज स्वीकार कर लिया है. आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने इसे लेकर एलोपैथी डॉक्टर्स पर ही पलटवार किया है. 

क्या बोले डॉ. राकेश पांडेय
डा. राकेश पांडेय ने कहा कि हम आयुर्वेद डॉक्टर्स कोरोना की तीसरी लहर में फ्रंटलाइन की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं लेकिन फिर बहुत सारे निजी एलोपैथिक अस्पतालों की कमाई का क्या होगा? उन्होंने कहा कि क्या आईएमए दिल से स्वीकार कर सकेगा कि आयुर्वेद या आयुर्वेदिक डॉक्टर उनसे आगे आ सकें?

आयुर्वेदिक डॉक्टर स्वामी रामदेव के साथ
डॉ. पांडेय ने कहा कि देशभर के 8 लाख से ज्यादा आयुर्वेदिक डॉक्टर स्वामी रामदेव के साथ हैं. उन्होंने मांग की कि आईएमए के अध्यक्ष डॉ. जे ए जयलाल को आयुर्वेद-एलोपैथी विवाद को खत्म करना चाहिए और बाबा रामदेव के खिलाफ मानहानि की शिकायतों को वापस लेना चाहिए.  

डॉ. पांडेय ने कहा कि आज कोरोना- ब्लैक फंगस महामारी में लोगों को विवाद नहीं बल्कि इलाज की जरूरत है! हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय आयुष व स्वास्थ्य मंत्री और नीति आयोग को पत्र लिखकर आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग कर रहे हैं!

बता दें कि डॉ. अजय खन्ना ने कहा था कि उन्होंने बाबा रामदेव को पत्र लिखा है कि कोरोना की तीसरी लहर में वे पूरे हेल्थ सिस्टम को संभालें. आयुर्वेद और योग क जरिए लोगों का इलाज किया जाए. हम स्वास्थ्य विभाग को भी लिख रहे हैं कि वह बाबा से ही लोगों का इलाज कराए. 

उल्लेखनीय है कि एलोपैथी बनाम आयुर्वेद के इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई थी, जब बाबा रामदेव ने एलोपैथी को अज्ञानतापूर्ण और दिवालिया साइंस बता दिया था. बाबा रामदेव की आलोचना के बाद आईएमए ने योग गुरु के खिलाफ मानहानि का दावा कर दिया है. उसके बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.