Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को द्वारका स्थित इस्कॉन मंदिर के 2025 कुंभ मेले के दौरान कोष गबन और धनराशि के दुरुपयोग के आरोपी राम प्रकाश दुबे को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की. अदालत ने एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और आरोपी की जून 2025 में नौकरी से बर्खास्तगी के तथ्य को देखते हुए उसे राहत दी.
द्वारका नॉर्थ पुलिस स्टेशन में अक्टूबर 2025 में दर्ज एफआईआर के अनुसार, दुबे पर 2-3 करोड़ रुपये की धनराशि के गबन और 21.45 लाख रुपये के दुरुपयोग का आरोप है. दुबे की अग्रिम जमानत याचिका को निचली अदालत ने 12 जनवरी को खारिज कर दिया था. उच्च न्यायालय ने इस मामले में राहत देते हुए कहा कि आरोपी अंतरिम सुरक्षा का हकदार है और उसे अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाती है.
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने आदेश में कहा कि एफआईआर में दर्ज आरोपों के अनुसार, मंदिर अधिकारियों को कुंभ मेला 2025 के दौरान दुबे द्वारा कथित धन दुरुपयोग और अभिलेख नष्ट करने की जानकारी पहले ही मिल गई थी, लेकिन शिकायत केवल सितंबर 2025 में दर्ज की गई. पीठ ने ये भी बताया कि आवेदक के अनुसार, उन्हें 11 जून 2025 को सेवा से हटा दिया गया था, जबकि एफआईआर में उल्लेख है कि 28 जुलाई 2025 को लेखा विभाग में जमा करने के लिए उन्हें 21.45 लाख रुपये सौंपे गए थे.
24 मार्च को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने दुबे को निर्देश दिया कि वह जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा निर्देशित किए जाने पर जांच में शामिल हों और उसमें सहयोग करें. अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तारीख तक दुबे को उक्त एफआईआर के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. साथ ही पुलिस को अगली सुनवाई से तीन दिन पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया. शिकायतकर्ता सुनीत गोयल को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई है. बता दें, मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी.
दुबे की ओर से वकील अमित कुमार और खुशबू शर्मा पेश हुए. उन्होंने तर्क दिया कि दुबे के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रतिवाद हैं. उन्होंने कहा कि दुबे को 11 जून 2025 को मौखिक बर्खास्तगी आदेश द्वारा सेवा से हटा दिया गया था और शिकायत दर्ज करने में अनावश्यक देरी हुई. इसके विपरीत, अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने बताया कि शिकायत 5 सितंबर 2025 को पुलिस के पास दर्ज कराई गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद 10 अक्टूबर 2025 को एफआईआर दर्ज की गई.
दुबे और उनकी पत्नी पर लगे गंभीर आरोप
एफआईआर के अनुसार, दुबे और उनकी पत्नी पर गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन, आपराधिक विश्वासघात, अभिलेखों को नष्ट करना, शारीरिक हमले, जबरन वसूली और मंदिर की धन और संपत्ति की चोरी में शामिल होने का आरोप है. रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले के दौरान दुबे के आचरण के संबंध में पहले से शिकायतें मिली थीं, जिस कारण मंदिर प्रबंधन ने उन पर कड़ी निगरानी रखी थी. एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि दुबे ने मंदिर के धन का अनधिकृत हेरफेर और दुरुपयोग किया, जिसकी अनुमानित राशि 2-3 करोड़ रुपये के बीच है. इसके अतिरिक्त, उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए मंदिर के उपस्थिति रजिस्टर को नष्ट किया. जब इस संबंध में उनसे पूछताछ की गई, तो दुबे ने मंदिर के दो कर्मचारियों के साथ मारपीट की और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया.
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अदालत ने अपने आदेश में यह भी ध्यान दिया कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और आरोपी के नौकरी से हटाए जाने का समय घटना से पहले है. इन परिस्थितियों में प्रथम दृष्टया दुबे को अंतरिम राहत देने का न्यायसंगत आधार है. अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दुबे को जांच में सहयोग करना होगा और किसी भी तरह की जांच प्रक्रिया में बाधा डालना निषिद्ध होगा. इस मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि एफआईआर में दर्ज आरोपों और वास्तविक घटना क्रम में विरोधाभास है. अदालत ने इस पर कहा कि जांच अधिकारी तथ्यों की पुष्टि करेंगे और अगली सुनवाई में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे.
