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Unique Bridge: देशभर में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है. भारत सरकार की कोशिश है कि पहाड़-पत्थर, गांव हर जगह पक्की सड़कें बनें ताकि लोगों के आवागमन में किसी तरह की बाधा न आए, जब भी सड़कों बनाई जाती हैं तो नदी या फिर नहर को पार करने के लिए पुल का निर्माण किया जाता है, देशभर में सड़कों के लिए, रेलवे के लिए तमाम पुल बनाए जा रहे हैं. आधुनिक तकनीक से लैस ये पुल आवागमन के लिए काफी सुविधाजनक होते हैं, आपने बहुत बार देश के सबसे लंबे या बड़े पुल के बारे में सुना होगा लेकिन कभी आपने ये सुना है कि एक पुल देश में ऐसा भी है जिसमें एक भी नट-बोल्ट या रिवेट्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है, चौंकिए मत, आइए जानते हैं इसके बारे में.

कहां है पुल?
आपने अक्सर देखा होगा कि पुलों को बनाने के लिए नट-बोल्ट का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि एक पुल ऐसा है जिसमें इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है लेकिन ये काफी ज्यादा ताकतवर पुल है. इस पुल के ऊपर टैंक व लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकता है. यह पुल भारत के असम राज्य में है जिसे बोगीबील पुल के नाम से जानते हैं. इसमें नट-बोल्ट के अलावा रिवेट्स का भी इस्तेमाल नहीं हुआ है, ये पुल इस तकनीक से बनाया गया है. 

कैसे जोड़ा गया है पुल?
लगभग पुलों को नट बोल्ट के द्वारा जोड़ा जाता है, हालांकि इस पुल को पूरी तरह से वेल्डिंग के जरिए जोड़ा गया है. इस पुल को जोड़ने के लिए स्वीडिश तकनीक की मदद ली गई है, इसे बनाने के लिए इटली से ही हैवी मशीन मंगाई गई थी, जिसके जरिए पुल की वेल्डिंग की गई थी. ये पुल सिस्मिक जोन-5 में आता है, ऐसा कहा जाता है कि जब भी भूकंप या किसी चीज का दबाव पड़ता है तो नट-बोल्ट से बना पुल टूट सकता है, हालांकि वेल्डिंग तकनीक से बने पुल में लचीलापन होता है और इसके टूटने का खतरा कम होता है.

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कितनी है पुल की उम्र?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पुल की उम्र करीब 120 सालों तक है, मजबूती इतनी है कि सेना के लड़ाकू विमान भी उतारे जा सकते हैं. इस पुल के निचले हिस्से में रेलवे ट्रैक हैं, तो ऊपरी हिस्से में सड़क है. इस पुल में एल्यूमिनियम स्प्रे किया गया है जिसकी वजह से इसमें जंग नहीं लगती है.