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Asaduddin Owaisi: कोई धन के लिए सनातन की आस्था पर चोट कर रहा है तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने सियासी विस्तार के जरिए इस्लामिक कट्टरता का विस्तार करने में जुटे हैं. मौजूदा सियासत में इसके चैम्पियन हैं असदुद्दीन ओवैसी. जिनकी राजनीति धर्म की धुरी पर चलती है. राजनीति में धर्मांधता की नई परिभाषा गढ़ने वाले ओवैसी ने नया शिगूफा छोड़ा है. उनके शिगूफे का टैग लाइन है ‘हिजाब वाली प्रधानमंत्री’ जिसका अर्थ ये है कि ओवैसी साहब देश में हिजाब वाली प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं.

ओवैसी साहब जिनकी पार्टी का लोकसभा में सिर्फ एक सांसद है. सांसद छोड़िए जो लोकसभा चुनाव में महिला को टिकट तक नहीं देते. उन्हें देश में हिजाब वाली प्रधानमंत्री चाहिए. जाहिर है कि उस टैगलाइन के पीछे उनका वोट वाला उद्देश्य है. इसलिए अब ओवैसी के हिजाब वाले पाखंड का विश्लेषण करते हैं. 

मित्रो नवंबर में जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर बने तो हिंदुस्तान में ‘ममदानी वायरस’ फैल गया. जिसने बेहद तेज रफ्तार गति से कुछ धर्मांधों के विचारों को दूषित किया.  ‘ममदानी वायरस’ से पीड़ित लोग दिन-रात सिर्फ एक ही बात कह रहे थे कि अगर ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर बन सकते हैं तो कोई मुस्लिम भारत का पीएम क्यों नहीं बन सकता? कोई मुस्लिम मुंबई का मेयर क्यों नहीं बन सकता? कोई मुस्लिम दिल्ली का सीएम क्यों नहीं बन सकता?

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अब असदुद्दीन ओवैसी साहब ने उसका नया और अपग्रेडेड वर्जन लॉन्च किया है. उन्होंने कहा कि कोई हिजाब पहनने वाली बेटी देश की प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती है? पहले सुनिए कि ओवैसी साहब ने क्या कहा?

बाबा साहब ने संविधान में किसी के भी प्रधानमंत्री बनने की बात कही है. ये तो असदुद्दीन ओवैसी को कंठस्थ याद है. लेकिन बाबा साहेब की कही ये बात वो भूल चुके हैं कि  राजनीति में धर्म को लाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है. 

खैर, सुविधानुसार स्मृतिलोप के शिकार होने का प्रयास कर रहे बैरिस्टर ओवैसी साहब को इतना जरूर याद होगा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी हिजाब वाली बेटी का सांसद होना आवश्यक है. लेकिन ओवैसी साहब तो अपनी पार्टी में बेटी को उतनी भी जगह नहीं देते हैं जितनी बाकी दलों ने दी है. मित्रो, “हिजाब वाली प्रधानमंत्री” ये टैग लाइन माननीय ओवैसी की कितनी बड़ी वैचारिक बेइमानी है. ये हम आपको कुछ तथ्यों के जरिए बताना चाहेंगे. आप इस पर ध्यान दीजिएगा.

ओवैसी की पार्टी है AIMIM, जिसमें शीर्ष स्तर पर कोई भी हिजाब वाली बेटी पदास्थापित नहीं है. सिर्फ महिला विंग में ही महिला नेता का नाम है,जिनकी पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं हैं. ओवैसी साहब की पार्टी में कोई जिला अध्यक्ष हिजाब पहनने वाली बेटी नहीं है. जानते हैं? उनकी पार्टी के 14 विधायक हैं, जिनमें एक भी हिजाब पहनने वाली बेटी नहीं है. तेलंगाना में उनका गढ़ है.  हैदराबाद में भी उन्होंने किसी हिजाब पहनने वाली बेटी को टिकट नहीं दिया. ओवैसी साहब के हिजाब पर वैचारिक पाखंड को और बेनकाब करें तो साल 2024 में ओवैसी साहब ने महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में महज चार महिलाओं को टिकट दिया. लेकिन वो भी हिजाब वाली बेटी नहीं थीं. कौन थीं? वो सब दलित महिला थीं. जिन्हें आरक्षित सीटों पर उतारा था. वे भी हार गईं और लोकसभा चुनाव में? इतिहास में सिर्फ एक बार वो भी 2004 में, तब लोकसभा चुनाव में एक महिला को  AIMIM से टिकट मिला था, लेकिन तब पार्टी ओवैसी साहब के पिताजी अपने हिसाब से चलाते थे.