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Jammu and Kashmir news: मुफ्ती ने कहा कि इन विचाराधीन कैदियों के कई परिवारों के पास अपने रिश्तेदारों से मिलने या कानूनी मदद लेने के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए वित्तीय साधन नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘ये लोग विचाराधीन कैदी हैं, दोषी नहीं. उनमें से कुछ बिना ट्रायल के पांच से छह साल से जेल में हैं,ऐसा व्यवहार बुनियादी कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है’.

क्या तर्क दिया?
मुफ्ती ने कहा कि गरीब परिवारों को अक्सर कानूनी खर्च और उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे दूर के राज्यों की यात्रा लागत वहन करने के लिए जमीन या गहने बेचने पड़ते हैं. मुफ्ती ने जेलों का ऑडिट करने और परिवार-संपर्क लॉग की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों की दो सदस्यीय निगरानी समिति बनाने की मांग की है. PDP प्रमुख ने इस बात पर भी निराशा व्यक्त की कि यह मुद्दा संसद में नहीं उठाया गया, यह कहते हुए कि बंदियों के बारे में प्रशासन और पुलिस से मांगी गई जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार इन विवरणों को संकलित और साझा कर सकती थी और उसके सांसद इस मुद्दे को संसद में उठा सकते थे.

राजनीतिकरण का आरोप
मुफ्ती के अनुसार अदालतों ने पहले ही स्वीकार कर लिया है कि कैदियों की स्थिति विचाराधीन है, लेकिन राहत देने में विफल रही हैं. उन्होंने कहा कि मुझ पर इस मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया जा रहा है. मुफ्ती ने कहा कि ऐसे आरोप विडंबनापूर्ण हैं. महबूबा ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी चिंता प्रभावित परिवारों की तरफ से झेली जा रही पीड़ा की सीधी जानकारी से उपजी है. इसलिए मैं इस मुद्दे को शांत नहीं होने दूंगी.

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क्या बोली मुफ्ती?
मुफ्ती ने कोर्ट के रुख की आलोचना करते हुए पूछा कि अगर उनकी PIL खारिज भी हो जाती है, तो भी कोर्ट इन मानवीय मुद्दों पर खुद संज्ञान क्यों नहीं ले सकता. उन्होंने सवाल किया कि न्यायपालिका कट्टर अपराधियों को पैरोल और जमानत देती दिखती है, जबकि कश्मीरी विचाराधीन कैदी आवाजहीन और भूले हुए रहते हैं.

कोर्ट ने क्या कहा ?
PDP प्रमुख ने पहले JKL हाई कोर्ट में कश्मीरी कैदियों को दूसरे राज्यों से जम्मू-कश्मीर में शिफ्ट करने के लिए एक PIL दायर की थी. चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की बेंच द्वारा दिए गए हाई कोर्ट के 15-पेज के आदेश में याचिका खारिज कर दी गई, जिसमें कहा गया कि कोर्ट ने PIL को राजनीतिक लामबंदी का जरिया और राजनीतिक फायदा उठाने वाला बताया, यह सुझाव देते हुए कि मुफ्ती खुद को एक खास वर्ग के लिए न्याय की योद्धा के रूप में पेश कर रही थीं. बेंच ने फैसला सुनाया कि मुफ्ती इस मामले में तीसरे पक्ष की अजनबी थीं. क्योंकि प्रभावित कैदियों ने खुद ट्रांसफर के लिए कोर्ट से संपर्क नहीं किया था. 

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कश्मीर सीएम से अपील 

मुफ्ती ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उनकी सरकार और जम्मू-कश्मीर के सांसदों, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी भी शामिल हैं. उनसे हस्तक्षेप करने की अपील की है और तर्क दिया कि सभी बंदी सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं और कई लोगों को कश्मीर की जेलों में वापस शिफ्ट किया जा सकता है. मुफ्ती ने यह भी कहा कि हम इस मामले को फिर से उठाएंगे और इन लोगों को नहीं छोड़ेंगे.