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Jammu Kashmir News: हरियाणा के कैथल जिले के गांव बात्ता में कश्मीर के शॉल वेंडरों को धमकाने का मामला सामने आया था, इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा वायरल हो रहा था. जिसके बाद देशभर में सियासी माहौल गरमा गया. मामले को लेकर अब जम्मू और कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (JKPC) के प्रेसिडेंट सज्जाद लोन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधा है और उनकी चुप्पी की निंदा की है. उन्होंने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं.

वो नहीं कर रहे हैं कोशिश
जम्मू और कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (JKPC) के प्रेसिडेंट सज्जाद लोन ने कहा कि मैं अपनी आवाज उठा रहा हूं, कॉल कर रहा हूं और यहां तक ​​कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को लेटर भी लिख रहा हूं. उन्होंने आगे मंत्रालय से कार्रवाई की पुष्टि मांगी और इस मामले पर राज्य के CM की चुप्पी पर हैरानी जताई. साथ ही साथ कहा कि हमारे J&K के मुख्यमंत्री वैसी कोशिश नहीं कर रहे हैं जैसी उन्हें करनी चाहिए, मुझे हैरानी है कि वह इस बारे में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं. 

वो ऐसा नहीं कर रहे हैं
इसके अलावा कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते वह इस मुद्दे को उठाने के लिए दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री को कॉल कर सकते हैं लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे हैं. जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) को लेटर लिखकर पूरे भारत में खासकर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में कश्मीरी शॉल बेचने वालों और स्टूडेंट्स को हो रही खतरनाक और सिस्टमैटिक हैरेसमेंट, धमकी और हिंसा में तुरंत दखल देने की मांग की है.

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उन्हें धमकाया गया
NHRC चेयरपर्सन जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम को लिखे अपने लेटर में एसोसिएशन ने बताया कि अकेले पिछले दस दिनों में, कश्मीरी ट्रेडर्स और स्टूडेंट्स को टारगेट करने वाली एक दर्जन से ज़्यादा घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं, जो अलग-अलग घटनाओं के बजाय एक खतरनाक और लगातार पैटर्न दिखाती हैं. एसोसिएशन के मुताबिक शॉल बेचने वाले 20 से 30 सालों से शांति से अपना काम कर रहे हैं, हालांकि अब उन्हें धमकाया गया, मारपीट की गई, भारत माता की जय जैसे नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई. JKSA के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने कहा कि ऑर्गनाइजेशन ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा के साथ-साथ मुंबई और दिल्ली के मामलों को डॉक्यूमेंट किया है. उन्होंने आगे कहा कि कश्मीरी स्टूडेंट्स को भी हैरेसमेंट का सामना करना पड़ा है, जिसमें नई दिल्ली में रहने की जगह न देना और मुंबई में गाली-गलौज शामिल है.

खराब कर दिए गए फोन 
खुएहामी ने आगे बताया कि उनके सामान के साथ तोड़-फोड़ की गई और लूटपाट की गई और कई मामलों में जब उन्होंने इन हमलों को रिकॉर्ड करने की कोशिश की तो उनके मोबाइल फोन खराब कर दिए गए, कुछ व्यापारियों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे पीढ़ियों से बनी रोजी-रोटी में रुकावट आई और उन्हें बहुत मानसिक परेशानी हुई, बेगुनाह कश्मीरी व्यापारियों और स्टूडेंट्स को टारगेट करने से सिर्फ अकेलापन और अविश्वास बढ़ता है, जिसका फायदा दुश्मन ताकतें उठाना चाहती हैं. कश्मीरी बाहरी नहीं हैं वे भारत के बराबर नागरिक हैं, जिन्हें संविधान के तहत समान अधिकार, आजादी और सुरक्षा मिली है.

हैरान करने वाली तस्वीर
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कई राज्यों में, अधिकारियों के समय पर दखल से कश्मीरी स्टूडेंट्स और व्यापारियों की सुरक्षा पक्की करने और मामले को सुलझाने में मदद मिली है. हालांकि हिमाचल प्रदेश एक बहुत ही परेशान करने वाली तस्वीर पेश करता है. खुएहामी ने चिंता जताते हुए कहा कि बार-बार हमलों के बावजूद, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, कई मामलों में FIR तुरंत या असरदार तरीके से दर्ज नहीं की गई, कोई गिरफ्तारी या रोकने के उपाय नहीं दिखे और प्रभावित समुदायों की सुरक्षा और भरोसा पक्का करने के लिए कोई लगातार कोशिश नहीं की गई. (ANI)