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UGC Guidelines: देशभर में यूनिवर्सटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध चल रहा है. अब इसपर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट की ओर से UGC के साल 2026 के नियमों पर रोक लगा दी गई है. इनको लेकर कई याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं, जिनमें नियमों को मनमाने, भेदभाव बढ़ाने वाले और संविधान के खिलाफ बताए हैं. कोर्ट के फैसले के बाद कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है. 

कोर्ट के फैसले पर RJD नेता का रिएक्शन 

RJD के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कोर्ट के फैसले को लेकर कहा,’ सुप्रीम कोर्ट के द्वारा UGC एक्ट के मामले पर रोक लगाई गई है और केंद्र सरकार को नोटिस भेजा गया है. केंद्र सरकार से पूछा गया है कि इसमें जो प्रावधान लाए गए हैं उसके संबंध में आप स्पष्टीकरण दें.’ उन्होंने कहा कि ये नियम संसदीय समिति के जरिए बनाए गए थे, जिसमें सभी दलों के सांसद शामिल थे.  इन नियमों का मकसद समाज के पिछड़े वर्ग, दलित, आदिवासी और अन्य वंचित वर्गों के साथ भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार को रोकना है. ये नियम संविधान के समानता के सिद्धांत (सेक्शन 14, 15, 16) के तहत बनाए गए हैं और रैगिंग, उत्पीड़न और अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रावधान करते हैं.   

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सरकार की निति को बताया बेवकूफी

कोर्ट के फैसले पर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,’ सनातन को बांटने वाले UGC के नियम पर सुप्रीम द्वारा रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार. यह फैसला भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है. मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता की है.’ इसके अलावा भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपने ‘X’ हैंडल पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लिखा,’  UGC पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, मैं पिछले 2 दिनों से संसद जा रहा हूं. इस मुद्दे पर किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने चर्चा करना तक उचित नहीं समझा.’ अब इसी को लेकर घोसी से समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय का बयान सामने आया है. राजीव राय ने कहा, जिस दिन नियम लाया गया, मैं UN न में था. अब मुझे मामले की जानकारी हुई है. मगर मैं इतना जानता हूं कि इस सरकार की नीति सभी का ध्यान भटकाने वाली और सभी को बेवकूफ बनाने वाली है.  ये सरकार नहीं चाहती कि जनकल्याण पर बात हो. उसकी नीति बने, जिससे सभी का हित हो और जनता का लाभ हो. 

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‘SC काम काम गलत काम को रोकना है…’ 

शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा,’ मुझे ट्रोल किया गया, गालियां दी गई और मेरे उपनाम का इस्तेमाल कर मेरे खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे गए. मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए UGC के उन दिशानिर्देशों पर रोक लगाई, जो अस्पष्ट, मनमाने और कैंपसों में ज्यादा भेदभाव पैदा करने की कोशिश थे.’  TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय से यही उम्मीद था. उन्होंने कहा,’ सुप्रीम कोर्ट का काम गलत काम को रोकना है. हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं.’ वहीं कांग्रेस के रंजीत रंजन ने भी कहा कि यह सुनिश्चचित करने के लिए कि जाति के आधार पर किसी भी छात्र के साथ भेदभाव न हो इस मुद्दे पर वापस चर्चा होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है.