महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में इस बार समीकरण थोड़ा बदल गया है. बीएमसी में भाई-भाई मिल गए हैं तो पुणे नगर निगम चुनाव का सीन लोगों को कन्फ्यूज कर रहा है. हां, और ये बात चाचा शरद पवार से अलग होने वाले भतीजे अजीत पवार खुद बोल रहे हैं. पुणे में PMC चुनावों पर डिप्टी सीएम ने कहा कि 35 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने कई चुनाव लड़े हैं, लेकिन इस बार का चुनाव कुछ अलग और अनोखा है. इससे वोटर भी कन्फूज हो सकता है.
अजीत पवार ने समझाते हुए कहा कि केंद्र में हम NDA सरकार का हिस्सा हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर विकास तेजी से हो रहा है. राज्य में हम मिलकर सरकार चला रहे हैं जिसमें देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और मैं सभी साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हालांकि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जनता बिल्कुल अलग तस्वीर देख रही है. ऐसे में जाहिर है कि एक समझदार वोटर कन्फ्यूज होगा कि अगर हम केंद्र और राज्य में साथ-साथ हैं तो यहां क्या गलत हो गया?
उन्होंने आगे कहा कि मैं सभी को यह बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं कि कुछ साल पहले भी ऐसी ही स्थिति थी. उस समय राज्य में महा विकास अघाड़ी की सरकार थी और केंद्र में UPA सरकार थी. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और सुशीलकुमार शिंदे, अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण और विलासराव देशमुख जैसे नेता अलग-अलग समय पर राज्य का नेतृत्व कर रहे थे. तब भी, स्थानीय निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर अलग-अलग लड़े जाते थे, अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ.
अजीत पवार ने कहा कि आज भी वही स्थिति दिख रही है. केंद्र और राज्य सरकारें महाराष्ट्र के हर कोने में विकास कार्यों के लिए भरपूर फंड दे रही हैं. केंद्र या राज्य द्वारा कोई भी विकास योजना पेंडिंग नहीं रखी जा रही है लेकिन सवाल यह है कि पिछले कई सालों से एक ही नेतृत्व में रही नगर पालिकाओं की क्या हालत है? इसमें केंद्र या राज्य सरकारों की कोई गलती नहीं है. असली सवाल स्थानीय नेतृत्व के प्रदर्शन का है.’
