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Odisha Rural Housing Scam: ओडिशा के बहुचर्चित ग्रामीण आवास घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी और ओडिशा रूरल हाउसिंग डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ORHDC) के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार को एक बार फिर दोषी ठहराया गया. जानकारी के अनुसार, भुवनेश्वर की विशेष सतर्कता अदालत ने उन्हें और 5 अन्य आरोपियों को इस मामले में दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. विजिलेंस विभाग के अनुसार, यह विनोद कुमार की भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में 12वीं सजा है. उनके खिलाफ अभी भी 15 अन्य विजिलेंस मामले लंबित हैं. विशेष विजिलेंस जज ने सभी आरोपियों और निजी बिल्डर संग्राम केशरी साहू को दोषी मानते हुए ये सजा सुनाई है.

बता दें, अदालत ने पाया कि आरोपियों ने ओडिशा के ग्रामीण गरीबों के लिए बनी आवास योजनाओं के लिए जारी 52.95 लाख रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया. आरोप है कि विनोद कुमार और अन्य अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हुए निजी बिल्डर संग्राम केशरी साहू को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी और जाली दस्तावेज तैयार किए थे.

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 भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त हो चुके हैं विनोद कुमार

1989 बैच के आईएएस अधिकारी विनोद कुमार को 2022 में भ्रष्टाचार के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. 1999 में ORHDC के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सुपर साइक्लोन के बाद बड़े पैमाने पर ग्रामीण आवास योजना शुरू की थी जिसके तहत 33.34 करोड़ रुपये के हाउसिंग फंड को गलत तरीके से मंजूरी दी गई थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने बिना उचित जांच किए रियल एस्टेट फर्मों, ठेकेदारों और एनजीओ को लोन देने के लिए नियमों का उल्लंघन किया था. 2018 में विशेष विजिलेंस कोर्ट ने कुमार को ORHDC में वित्तीय गड़बड़ियों के लिए दोषी ठहराया था और उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी. राज्य सरकार ने उनके खिलाफ 27 विजिलेंस केस दर्ज किए थे जिनमें से उन्हें अब तक 12 मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है.