Who is more powerful militarily between India and Bangladesh: भारत और बांग्लादेश के संबंध इन दिनों इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं. शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से मोहम्मद यूनुस वहां की सत्ता की संभाल कमान रहे हैं. जब से वे चीफ एडवाइजर की कुर्सी पर पहुंचे, तब से भारत के प्रति बांग्लादेश के तेवर बदल गए हैं. वहां के कट्टरपंथी नेता ही नहीं बल्कि पूर्व सेनाधिकारी, अफसर और नेता भी भारत के खिलाफ लगातार आग उगल रहे हैं.
दक्षिण एशिया का ‘टाइगर’ कौन है?
वे चिकन नेक को काटकर भारत के पूर्वोत्तर पर कब्जे की लगातार धमकी दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर दोनों मुल्कों में जंग छिड़ गई तो कौन जीतेगा. क्या बांग्लादेश अपने मकसद में कामयाब हो पाएगा या भारत 1971 की तरह फिर एक और इतिहास रचेगा. आइए आज आपको दोनों देशों की सैन्य शक्ति के बारे में विस्तार से बताते हैं, जिससे आपको भविष्य की जंग का पहले से ही अनुमान हो जाएगा.
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति
भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है. भारतीय थल, जल और वायु सेनाओं में मिलाकर लगभग 15 लाख सक्रिय सैनिक हैं. जबकि लाखों की तादाद में रिजर्व फोर्स भी मौजूद हैं. वहीं बांग्लादेश के पास कुल सक्रिय सैनिकों की संख्या महज 1.6 लाख है. यानी भारत के पास बांग्लादेश की तुलना में लगभग 9 गुना अधिक सैन्य जनशक्ति उपलब्ध है. यह तथ्य जानते हुए भी अगर बांग्लादेश युद्ध छेड़ता है तो यह अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा.
कुछ ही घंटों में घुटने पर ला सकती है आर्मी
भारतीय थलसेना के पास हजारों आधुनिक टैंक, बख्तरबंद वाहन, लंबी दूरी की तोपें और मिसाइल सिस्टम हैं. इनके अलवा मल्टी-रॉकेट लॉन्च सिस्टम पिनाका, ड्रोन और हाई तकनीक वाले हथियार मौजूद हैं. दूसरी ओर बांग्लादेश की थलसेना भी प्रशिक्षित और अनुशासित तो है. हालांकि उसके उसके पास टैंकों और भारी हथियारों की संख्या बहुत कम है. उसके पास जो हथियार हैं भी, वे अधिकतर पुराने हो चुके हैं. ऐसे में बड़े पैमाने की जमीनी लड़ाई में भारत की भारी संख्या और आधुनिक हथियार बांग्लादेश को कुछ ही घंटों में घुटनों पर ला देंगे.
बांग्लादेश को कुचलकर रख देगी भारतीय वायुसेना
आधुनिक युद्धों में वायु शक्ति सबसे निर्णायक होती है. भारतीय वायुसेना की बात की जाए तो उसके पास 1000 से ज्यादा लड़ाकू विमान हैं. इनमें राफेल, सुखोई-30, मिराज-2000 और तेजस जैसे आधुनिक फाइटर जेट शामिल हैं. भारत के पास हवाई चेतावनी प्रणाली (AWACS), ड्रोन और एयर-टू-एयर मिसाइलों का मजबूत नेटवर्क भी है. वहीं बांग्लादेश वायुसेना के पास महज 100 के आसपास लड़ाकू विमान हैं. वे भी गुजरे जमाने के और सीमित क्षमताओं वाले हैं. ऐसे में जंग छिड़ी तो भारतीय वायुसेना बांग्लादेश को कुचलने में देर नहीं लगाएगी.
भारतीय नौसेना से भिड़ने का बांग्लादेश में दम नहीं
भारतीय नौसेना एशिया की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में गिनी जाती है. भारत के पास विमानवाहक पोत, परमाणु पनडुब्बियां, मिसाइल विध्वंसक और आधुनिक युद्धपोत हैं. इससे भारत समुद्र में लंबी दूरी तक गश्त और निगरानी रख सकता है. जबकि बांग्लादेश की नौसेना मुख्य रूप से तटीय रक्षा के लिए बनी है. उसके पास कुछ फ्रिगेट और पनडुब्बियां है. वह दूर गहरे समुद्र में जाकर भारतीय नौसेना से भिड़ने का दम नहीं रखती. यह बात बांग्लादेश के सभी सेनाधिकारी अच्छी तरह जानते हैं.
भारत के रक्षा बजट के सामने बौना है बांग्लादेश
दोनों देशों के रक्षा बजट में भी जमीन आसमान का अंतर है. भारत का वार्षिक रक्षा बजट जहां 70 अरब डॉलर से ज्यादा का है. वहीं बांग्लादेश महज 4 अरब डॉलर ही अपनी रक्षा पर खर्च करता है. इस अंतर की वजह से बांग्लादेश चाहकर भी दूसरे देशों से आधुनिक हथियार नहीं कर सकता है. भारत के पास ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें, उपग्रह आधारित निगरानी और परमाणु क्षमता भी है. जबकि बांग्लादेश के पास ऐसी रणनीतिक ताकत नहीं है.
इस मामले में बांग्लादेश का पलड़ा है भारी
हालांकि एक बात बांग्लादेश के फेवर में है और वह है उसकी भौगोलिक स्थिति. असल में बांग्लादेश में बहुत सारी नदियां बहती हैं. जिसकी वजह से उसकी जमीन नदी, दलदल और घने आबादी वाली बन गई है. ऐसे में आमने-सामने की लड़ाई में अपनी रक्षा करना उसे कुछ आसान लग सकता है. लेकिन आज के युद्ध में आमने-सामने भिड़ने की जरूरत नहीं होती. भारत अपनी सीमा में रहते हुए उस पर मिसाइलों की बारिश कर सकता है. साथ ही हवाई वर्चस्व और नौसैनिक नाकाबंदी से उसे बिना लड़े आसानी से घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है.
जंग हुई तो दोनों में से कौन जीतेगा?
अगर आप सैन्य शक्ति, संसाधन और तकनीकी क्षमता के आधार पर दोनों की तुलना करें तो स्पष्ट रूप से भारत अव्वल नजर आता है. भारत की बढ़त इतनी बड़ी है कि किसी भी सीधे सैन्य संघर्ष में भारत का पलड़ा भारी रहेगा. हालांकि मौजूदा दुनिया में सभी युद्ध केवल हथियारों से ही नहीं लड़े जाते. इसके बजाय राजनीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी जंग के नतीजे तय होते हैं. ऐसे में देखना होगा कि बांग्लादेश के उकसावे का भारत किस रणनीति और किस हद तक जवाब देगे.
