Al-Qaeda: महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) द्वारा अल-कायदा मामले में चल रही जांच में पता चला है कि कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के लिए अफगानिस्तान में सर्वर और कंट्रोल सेंटर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था. यह जानकारी जुबैर हंगरगेकर से पूछताछ के दौरान मिली जिसे अल कायदा से संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हंगरगेकर के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से यह पाया गया कि वह अल कायदा की कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार कर रहा था और भारत में इस्लामिक शासन की स्थापना के लिए सक्रिय था.
भारत के युवाओं को बनाना चाहता है कट्टरपंथी
जांच के दौरान यह भी पता चला कि अल-कायदा अफगानिस्तान में सर्वर और साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित कर भारत में अपने कंटेंट को बिना ट्रैक किए अधिक लोगों तक पहुंचाने में सक्षम था. अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीकी विकास भारतीय एजेंसियों से बचते हुए संगठन को बड़े इलाकों में काम करने की सुविधा देता है. इसके अतिरिक्त, हंगरगेकर के पास से पाकिस्तान, सऊदी अरब, कुवैत और ओमान के कई लोगों के नंबर भी मिले है और ATS फिलहाल इस बात की जांच कर रहा है कि उसका इन देशों से किस प्रकार का संबंध था और क्या इन लोगों का इस गतिविधियों में कोई योगदान था. हंगरगेकर पर यह भी आरोप है कि वह जिहादी साहित्य का प्रचार कर युवा लोगों को कट्टरपंथी बना रहा था.
बता दें, अल कायदा ने 2014 में अल-कायदा इन द सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) के नाम से एक उपशाखा स्थापित की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में आतंकवादी गतिविधियों को फैलाना था. इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि अल कायदा भारत में अपनी पहुंच और प्रभाव बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है हालांकि अब तक इसके द्वारा भारत में बड़े हमले नहीं हुए हैं. हाल ही में अल कायदा द्वारा फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा मटेरियल में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे देश में कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार हो रहा है.
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अधिकारियों का कहना है कि अल कायदा मैदान में उतरकर हमले की कोशिश नहीं करेगा लेकिन अल कायदा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तर भारत, गुजरात और महाराष्ट्र में कट्टरपंथी मॉड्यूल स्थापित करने के प्रयास जरूर कर रहा है. इंटेलिजेंस एजेंसियां इस बढ़ते खतरे पर गंभीर रूप से नजर रख रही हैं, खासकर उत्तर भारत में जहां अल कायदा को ज्यादा समर्थन मिलता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में भी अल कायदा एक मजबूत संगठन के रूप में सक्रिय है और अधिकारियों का कहना है कि इसका प्रभाव भारत में भी महसूस किया जा सकता है. इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, भारत के सुरक्षा अधिकारियों ने अल कायदा की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया है ताकि कोई अप्रिय घटना रोकी जा सके.
