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NC-Congress row: जम्मू-कश्मीर की सियासत अब एक नए मोड़ में पहुंच गयी है. जिसमें सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच गतिरोध या तो बढ़ सकता है या फिर सभी आशंकाओं पर पूर्णतः विराम लग सकता है. जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के गठबंधन में दरार सामने आई है. कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ होने वाली गठबंधन बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है. आज यह बैठक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास पर आयोजित होनी थी. हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पार्टी की ओर से बैठक में केवल चीफ व्हिप निजामुद्दीन भट्ट को ही भेजा जाएगा.

कांग्रेस का आरोप है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व किसी भी अहम मुद्दे पर कांग्रेस को विश्वास में नहीं ले रहा है. कांग्रेस पार्टी का ये भी कहना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने न तो डेली वेजर्स (दैनिक वेतनभोगियों) के नियमितीकरण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया है और ना ही कांग्रेस की मांग के बावजूद एनसी-कांग्रेस की पूर्व समन्वय समिति (कोऑर्डिनेशन कमेटी) का गठन किया गया है.

कैसे हैं संकेत

इन्हीं कारणों को आधार बनाते हुए कांग्रेस ने गठबंधन बैठक के बहिष्कार का निर्णय लिया है. कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा से लेकर कांग्रेस पार्टी के तमाम नेताओं को लगता है कि उनकी उपेक्षा हो रही है. एनसी सरकार गठबंधन का धर्म नहीं निभा पा रही है. ये पहला मौका नहीं है बीते कई महीनों से एनसी और कांग्रेस में दूरियां देखने को मिली हों, इससे पहले जम्मू और कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी, देश के विपक्षी गठबंधन यानी इंडिया अलायंस का हिस्सा होने के बावजूद, कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान से लगातार दूरी बनाए हुए थी.

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ये कैसा रिश्ता?

इससे पहले राज्यसभा चुनावों के दौरान दोनों दलों के बीच मनमुटाव यानी मनभेद के साथ-साथ मतभेद भी देखने को मिले थे. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ी थीं. दोनों दलों का गठबंधन भी है, लेकिन उमर अब्दुल्ला की सरकार में कांग्रेस की कोई भागीदारी नहीं है. यानी उमर सरकार के मंत्रिमंडल में कांग्रेस शामिल ही नहीं हुई.

बीते छह महीनों से जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला पर अंदरखाने सियासी हमले तेज हो गए हैं. दावा है कि उमर की खुद की पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा है. वहीं सहयोगी कांग्रेस का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार नीतिगत फैसलों में कांग्रेस को शामिल नहीं कर रही और ना ही अपने फैसलों के बारे में कुछ बताती है, इससे उनके विधायकों को जनता के सामने अजीबोगरीब स्थितियों का सामना करना पड़ता है.

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