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Semiconductor industry: भारत सरकार की तरफ से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने भारतीय चिप निर्माण उद्योग को मजबूती देने के लिए डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के तहत 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है.  ये प्रोजेक्ट्स वीडियो निगरानी, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर से लेकर सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और आईओटी सिस्टम-ऑन-चिप्स जैसे अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े हैं.

आधिकारिक बयान के अनुसार 95 कंपनियों को उद्योग स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स तक पहुंच दी गई है. इससे चिप डिजाइन स्टार्टअप्स का खर्च कम होने और उन्हें बेहतर उपकरण मिलने की उम्मीद जताई गई है. दरअसल, डिजाइन चिप बनाने की प्रक्रिया में सेमीकंडक्टर चिप सबसे ज्यादा मूल्य जोड़ने वाला हिस्सा है. जो आपूर्ति श्रृंखला में 50 प्रतिशत और फैबलेस सेगमेंट के माध्यम से दुनिया की सेमीकंडक्टर बिक्री में 30 से 35 प्रतिशत तक का योगदान देता है.

कितना बजट?
बयान में यह भी बताया गया कि डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव समर्थित योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं. इस स्कीम के तहत अभी तक 16 टेप-आउट और 6 एएसआईसी चिप्स के साथ-साथ 10 पेटेंट और 1000 से ज्यादा इंजीनियर शामिल हो चुके हैं. इतना ही नहीं निजी निवेश में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है. डीएलआई स्कीम को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से चलाया जा रहा है. इस योजना के लिए 76000 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है.  इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण के साथ-साथ चिप डिजाइन सिस्टम तैयार किया जाएगा.

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क्यों जरूरी?
स्टार्टअप्स और एमएसएमई को डिजाइन से लेकर प्रोडक्ट बनाने तक डीएलआई स्कीम पूरी मदद करती है. इस योजना का उद्देश्य भारत में घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन उद्योग में मौजूद कमियों को दूर करना है. साथ ही भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का भी लक्ष्य है. चिप्स टू स्टार्टअप  यानी की सी2एस प्रोग्राम के तहत देशभर की शिक्षण संस्थाओं में 85000 इंजीनियर, मास्टर्स और पीएचडी स्तर के छात्रों को तैयार किया जा रहा है, जो चिप डिजाइन की बारीकियों में विशेषज्ञता हासिल करेंगे. 

आत्मनिर्भर भारत
आधिकारिक बयान में इस बात का जिक्र किया गया कि मजबूत ‘फैबलेस क्षमता’ के बिना देश विदेशी तकनीक पर निर्भर रहता है. ऐसे में अब इस स्कीम से भारत अपने तकनीकी ज्ञान और उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा, जिससे आयात कम होगा और भविष्य में तकनीकी नेतृत्व हासिल होगा.

इनपनुट–आईएएनएस 

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