Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनाव से कुछ हफ्ते पहले गठबंधन के दबाव और आंतरिक गतिशीलता के चलते रणनीतियों में हुए बदलाव के कारण शरद पवार और अजीत पवार के नेतृत्व वाली NCP के दोनों गुट संभावित रूप से अब एक बार फिर वापस गठबंधन की तरफ बढ़ रहे हैं. शुक्रवार 26 दिसंबर 2025 को चाचा-भतीजे कथित तौर पर पुणे नगर निगम (PMC) के लिए सीट बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप देने के करीब थे. यह अगले महीने वोट करने वाले 29 सिविक बॉडीज में से एक है, जिसमें 74,000 करोड़ रुपये का बृहन्मुंबई नगर निगम भी शामिल है.
अजीत पवार को दरकिनार किया गया
अजीत पवार ने जुलाी साल 2023 में अपने चाचा से हटकर 18 NCP विधायकों के साथ भाजपा के साथ गठबंधन किया था. वह वर्तमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री हैं, हालांकि मीडिया खबरों के मुताबिक भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति में उन्हें साइडलाइन किया जा रहा है. उनकी ओर से पूर्व मंत्री नवाब मलिक को NCP के मुंबई चुनाव अभियान का चेहरा बनाने के प्रस्ताव को भाजपा ने अस्वीकार कर दिया था. बता दें कि मलिक के कथित तौर पर माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम से संबंधों को देखते हुए हिंदू वोटर्स के विरोध के डर से अस्वीकार किया गया था.
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अकेले चुनाव लड़ेंगे अजीत पवार?
शरद पवार अब एक तरह से वापस परिवारों के मिलने की स्थिति में आ चुके हैं. एक ओर ठाकरे परिवार के चचेरे भाई उद्धव और राज ने मराठी भाषा विवाद पर हाथ मिला लिया है और मुंबई नगर निगम चुनावों के लिए एक संयुक्त मोर्चा घोषित किया है. इसके बावजूद शरद पवार की NCP और कांग्रेस राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ गठबंधन करने को लेकर इच्छा नहीं जता रहा है और कांग्रेस ने BMC चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने का विकल्प चुना है.
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समझौते के करीब पवार गुट
इन घटनाओं के बीच अब अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या अजीत पवार पुणे नगर निगम चुनाव में अकेले चुनाव लड़कर अपने गुट की ताकत का अंदाजा लगाएंगे. मीडिया खबरों के मुताबिक भले ही उन्हें हार का सामना करना पड़े, लेकिन यह कोशिश अजीत पवार की नेशनल कमेटी के लिए आने वाले स्टेट इलेक्शन से पहले एक संकेतक का काम करेगा. गुरुवार 25 दिसंबर 2025 रात को अजित पवार ने पुणे के अनुशक्तिनगर में शरद पवार के पोते रोहित पवार से मुलाकात की. खबरों के मुताबिक PMC चुनावों के लिए प्रारंभिक समझौता हो गया है, हालांकि सीटों के बंटवारे की डीटेल अरेंजमेंट अभी बाकी है. इसके अलावा एक अहम मुद्दा ‘घड़ी’ का चुनाव चिन्ह है, जो फिलहाल अजित पवार के गुट के पास है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये वार्ताएं पवार परिवार के वापस मिलने का रास्ता साफ कर सकती हैं, हालांकि काफी कुछ सीटों के बंटवारे के परिणामों और दोनों गुटों के मंत्रियों और विधायकों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करता है.
