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PM Modi Malaysia visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी को दक्षिण-पूर्व एशिया के अहम देश मलेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे. यह यात्रा मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हो रही है. खास बात यह है कि पीएम मोदी इससे पहले 2015 में मलेशिया गए थे और अब करीब एक दशक बाद उनकी यह तीसरी यात्रा है. इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब भारत और मलेशिया के संबंध “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के दौर में पहुंच चुके हैं. अगस्त 2024 में अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रिश्तों को नया दर्जा दिया था.

भारत-मलेशिया रिश्तों की मजबूत नींव
भारत और मलेशिया के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, निवेश और लोगों से लोगों के संबंधों पर टिके हैं. मलेशिया ASEAN क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 20 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. पीएम मोदी और पीएम अनवर इब्राहिम इस यात्रा में ‘व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते’ (CECA) की समीक्षा करेंगे, ताकि व्यापार को ज्यादा संतुलित और टिकाऊ बनाया जा सके.

सेमीकंडक्टर से डिजिटल पेमेंट तक फोकस
इस दौरे का एक बड़ा फोकस सेमीकंडक्टर और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर रहेगा. दोनों देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बहुस्तरीय सहयोग पर काम कर रहे हैं, जिसे भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. MEA ने संकेत दिए हैं कि भारत की नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन (NPCI) और मलेशिया के बीच डिजिटल भुगतान को लेकर समझौता हो सकता है. इससे दोनों देशों के नागरिकों और कारोबारियों को सीधा फायदा मिलेगा.

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रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग
पीएम मोदी की इस यात्रा में रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी अहम एजेंडा रहेगा.समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों में सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. इसके अलावा कुआलालंपुर में भारत–मलेशिया CEO फोरम की 10वीं बैठक भी होगी, जहां दोनों देशों के बड़े कारोबारी निवेश और व्यापार के नए अवसर तलाशेंगे.

भारतीय समुदाय से सीधा संवाद
मलेशिया में करीब 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. पीएम मोदी के इस दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी उम्मीद है. यह कदम दोनों देशों के सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को और मजबूत करेगा.

जाकिर नाइक पर भी होगी बात
इस दौरे का एक संवेदनशील लेकिन अहम मुद्दा वांछित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक का प्रत्यर्पण है. विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने साफ कहा है कि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें जाकिर नाइक का मामला भी शामिल है. MEA के मुताबिक, भारत इस विषय को लगातार उठाता रहेगा और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने तक प्रयास जारी रहेंगे. भारत इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक को वांटेड मानता है, और वो मलेशिया में छिपा है. भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, हेट स्पीच और टेरर फंडिंग के केस में वांटेड जाकिर पर पहले भी कई लेवल पर ये बात हुई है,  पी. कुमारन ने कहा, “सभी मुद्दों पर बात होगी… हम पिछले दौरों में भी उठा चुके हैं. टेक्निकल प्रोसेस पूरा होने तक उठाते रहेंगे, और उम्मीद है मनचाहा नतीजा मिलेगा.” मलेशिया ने पहले कहा था कि सबूत मिलें तो देखेंगे. 2024 में अनवर इब्राहिम ने भी कहा था कि टेररिज्म को बर्दाश्त नहीं करेंगे अगर प्रूफ हो. तो क्या इस बार कुछ बड़ा होगा? 

पाकिस्तान की क्यों खिसकेगी धरती?
पाकिस्तान हमेशा ऐसे लोगों को सपोर्ट करता रहा है जो भारत के खिलाफ बोलते हैं. लेकिन मलेशिया अलग है. यहां मुस्लिम बहुल है, लेकिन भारत से ट्रेड, टेक, डिफेंस में इतना इंटरेस्ट कि वो भारत को नाराज नहीं करना चाहेगा. अगर जाकिर का केस सॉल्व हुआ, तो ये मैसेज जाएगा कि भारत अब ऐसे भगोड़ों को छोड़ता नहीं. पाकिस्तान की तरह “शेल्टर देने वाली” इमेज खराब हो सकती है. ये दौरा सिर्फ डिप्लोमेसी नहीं, बल्कि भारत की स्मार्ट स्ट्रैटेजी है. रिश्ते मजबूत करो, और मुश्किल मुद्दे सॉल्व करो. कुल मिलाकर, मोदी जी का ये दौरा ट्रेड-टेक से ज्यादा, जाकिर जैसे मुद्दों पर बड़ा ब्रेकथ्रू ला सकता है. 

क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा?
पीएम मोदी का यह दौरा भारत की Act East Policy को मजबूती देने, ASEAN क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने और भविष्य की टेक्नोलॉजी में साझेदारी को आगे ले जाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत–मलेशिया रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाली साबित हो सकती है.