Maharashtra Court Decision: अक्सर देखा जाता है कि पति-पत्नी में किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता है, कभी-कभी ये विवाद इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि लोग एक दूसरे से अलग हो जाते हैं, महाराष्ट्र में सालों पहले कुछ ऐसा ही हुआ था, जो जाकर अब खत्म हुआ है, एक अदालत ने फैसला सुनाया कि दूसरी शादी होने की वजह से अब पत्नी को मेंटेनेंस नहीं मिलेगा, इस केस को खत्म करने में महिला के वर्तमान पति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जानिए आखिर पूरा मामला क्या है?
कब का है मामला
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला साल 2009 का है, 17 साल पहले महिला ने अपने पति के खिलाफ केस दर्ज कराया था. महिला ने आरोप लगाया था कि पहले पति ने उसे कई सालों तक शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया, उसने कहा था कि उसे घर से निकाल दिया गया था, इसलिए वह सुरक्षा और हर महीने पैसे (मेंटेनेंस) की हकदार है, शुरुआत में दिसंबर 2009 में अदालत ने पहले पति को अंतरिम तौर पर महिला को हर महीने 3,200 रुपये देने का आदेश दिया था.
मौजदा पति ने पेश किए सबूत
हालांकि तलाक लेने के बाद बाद उसने दूसरी शादी कर ली, मामले को लेकर महिला के मौजूदा पति ने गवाही दी और साथ ही साथ ये पुष्टि की कि उसने महिला से शादी की है. इसके अलावा उसके दूसरे पति ने निकाहनामा, इमाम और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ के सबूत भी अदालत में पेश किए. इसके बाद बोरीवली कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बी. एन. चिकने ने फैसला सुनाते हुए कहा कि डॉक्यूमेंट्स से यह साबित होता है कि रेस्पोंडेंट नंबर 1 (पहले के पति) से तलाक के बाद, एप्लिकेंट (महिला) ने दूसरी शादी की है. ऐसे में वो पहले पति से मेंटेनेंस पाने की हकदार नहीं है. जिसके बाद महिला का मेंटेनेंस का दावा खारिज हो गया और घरेलू हिंसा का मामला खत्म हो गया.
