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Underwater twin-tube Road-cum-Rail tunnel: भारत की पहली विश्वस्तरीय अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग बनने का रास्ता साफ हो गया है. असम के ब्रह्मपुत्र नदी में इसको बनाया जाएगा. आज आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने परियोजना के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इसको लगभग 19000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. जानकारी के अनुसार, यह सुरंग असम में गोहपुर (उत्तर तट) को नुमलिगढ़ (दक्षिण तट) से जोड़ेगी. देश की यह पहली ऐसी सुरंग है, जिसमें रेल और सड़क दोनों होंगी. 

देश की पहली अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग 

यह अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग न केवल असम के लोगों के जीवन को आसान करेगी, बल्कि इसका प्रभाव राज्य से परे तक फैलेगा. इससे अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इस ट्यूल टनल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानिए…

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अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग लंबाई कितनी होगी? 

असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे दो लेन वाली ट्विन ट्यूब टीबीएम रोड अंडरवाटर टनल का निर्माण होना है, जिसमें एक ट्यूब रेलवे के लिए और दूसरा रोड के लिए होगा, इस परियोजना की कुल लंबाई 33.7 किलोमीटर है. 

कहां से कहा तक होगा अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग का निर्माण? 

 यह सुरंग असम में गोहपुर (उत्तर तट) को नुमलिगढ़ (दक्षिण तट) से जोड़ेगी. इस टनल के निर्माण से इस नदी पार करने का समय 4 से 6.5 घंटे से घटकर 30 मिनट हो जाएगा. ब्रह्मपुत्र नदी के बनने वाली इस ट्यूल टनल में एक रेल और दूससी सड़क मार्ग के लिए होगी. 

क्या है EPC मोड, जिसके तहत होगा परियोजना का निर्माण? 

रिपोर्ट्स के अनुसार,यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड के तहत बनाने की तैयारी है और निर्माण के पूरा होने के बाद यह देश की पहली अंडरवाटर टनल बनेगी, जिसमें रोड और रेल एक साथ होंगे. 

कितने रेल लाइन और NH को होगा फायदा? 

यह अंडरवाटर परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-15 और एनएच-715)  के साथ दो रेलवे लाइनों से जुड़ेंगी. माना जा रहा है कि इस परियोजना से असम के प्रमुख आर्थिक, सामाजित और रसद केंद्रों को निर्बाध संपर्क स्थापित हो सकेगा. दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना से करीब 80 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्क्ष रूप से रोजगार के अवसर खुलेंगे. 

इस अंडर वाटर टनल की विशेषताएं क्या हैं? 

यह अंडर वाटर टनल ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी. एक साथ दो टनल का निर्माण होना है, जिसमें एक रेल लाइन के लिए और दूसरी सड़क होगी. इसके बन जाने के बाद नदी को पार करने के समय में कमी आएगी. इससे पहले नदी को नाव या पुल से पार करने में 4 से छह घंटे लगते थे, लेकिन टनल के बनने के बाद यह केवल 30 मिनट रह जाएगा. किसी भी मौसम में इससे आवाजाही करने में दिक्कत नहीं होगी. 

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