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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी आए दिन अपने बयानों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं. अब ओवैसी ने शनिवार को केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. AIMIM के चीफ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल खड़े करते हए कहा कि बीजेपी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए नागरिकता के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है. ओवैसी ने हैदराबाद में ओवैसी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 68वें स्थापना दिवस के दौरान वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. 

ओवैसी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक बार फिर से केंद्र सरकार पर जोरदार निशानाा साधा. ओवैसी ने कहा, ‘BJP की केंद्र सरकार वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के ज़रिए देश में नागरिकता के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है. हैदराबाद में अपनी पार्टी के 68वें रिवाइवल डे सेलिब्रेशन के मौके पर जनता को संबोधित करते हुए दावा किया कि बिहार के बाद SIR तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी किया जाएगा. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ओवैसी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया, ‘मैं लोगों से अपील करता हूं कि जब SIR किया जाए, तो सभी असली नाम शामिल हों. BJP SIR के ज़रिए नागरिकता छीनना चाहती है. वह इलेक्शन कमीशन (EC) के ज़रिए रिवीजन करके ऐसा करने की कोशिश कर रही है.’

ओवैसी ने की यूट्यूबर्स पर कार्रवाई की मांग
तेलंगाना में इलेक्शन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि राज्य में वोटर लिस्ट के SIR की घोषणा इस साल अप्रैल-मई के दौरान होने की संभावना है. इसके अलावा, ओवैसी ने हाल ही में तेलंगाना में हुए मेदाराम जतरा के दौरान कुछ यूट्यूबर्स द्वारा एक मुस्लिम बन बेचने वाले को कथित तौर पर परेशान करने की निंदा की. उन्होंने मांग की कि राज्य पुलिस इसमें शामिल लोगों के खिलाफ केस दर्ज करे. ओवैसी ने दावा किया, ‘वह (वेंडर) कोवा बन बेच रहा था, लेकिन आपको (YouTubers) इसमें ‘फूड जिहाद’ दिखता है. अगर आपको खाना पसंद नहीं था, तो आपको पुलिस को बताना चाहिए था. आप देश के दुश्मन हैं. मैं इसकी निंदा करता हूं और मांग करता हूं कि YouTubers के खिलाफ कार्रवाई की जाए.’

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क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) दरअसल वोटर लिस्ट को पूरी तरह से नए सिरे से तैयार करने की एक व्यापक प्रक्रिया है. इसमें पुरानी मतदाता सूची पर भरोसा करने के बजाय जमीनी स्तर पर जाकर ताज़ा और सटीक जानकारी जुटाई जाती है. इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वे करते हैं. हर परिवार के लिए नए फॉर्म भरे जाते हैं और प्रत्येक मतदाता की जानकारी दोबारा दर्ज की जाती है. मकसद यह होता है कि समय के साथ सूची में आई गलतियां, डुप्लिकेट नाम, मृत मतदाताओं के रिकॉर्ड या पते में बदलाव जैसी त्रुटियों को पूरी तरह से ठीक किया जा सके. आम तौर पर यह तरीका तब अपनाया जाता है, जब मौजूदा वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ियों की आशंका हो या किसी राज्य में बड़े प्रशासनिक या जनसांख्यिकीय बदलाव हुए हों. 

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