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Jammu Kashmir News: सेना के व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल पी के मिश्रा ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले का दौरा किया. 15 दिनों के भीतर ये उनका दूसरा किश्तवाड़ दौरा था. GOC ने काउंटर टेररिज्म ग्रिड का रिव्यू करने और वहां पर तैनात सेना की सभी यूनिट्स की ऑपरेशनल तैयारियों का मुआयना किया. उन्होंने सभी रैंक के अधिकारियों और जवानों से हर समय सतर्क और किसी भी मिशन के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है. इस दौरान जीओसी को मौजूदा सिक्योरिटी सिचुएशन, एक्टिव सिक्योरिटी फ्रेमवर्क और इंटर-एजेंसी सिनर्जी को और मजबूत बनाने के उपायों के बारे में जानकारी दी गई.

6 फरवरी को आर्मी चीफ ने लिया था जायजा

इससे थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिन के दौरे पर 6 फरवरी को जम्मू पहुंचे थे. पहले दिन उन्होंने जम्मू स्थित सेना के व्हाइट नाइट कोर में सुरक्षा हालात और भारतीय सेना की तैनाती की समीक्षा की थी. उस दौरान सेना प्रमुख को वहां पर मौजूद कमांडरों ने नगरोटा में काउंटर टेररिज्म ग्रिड और अन्य तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी थी.

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आगे सेना प्रमुख ने पुंछ जिले के अग्रिम क्षेत्रों का दौरा करके वहां तैनात सैनिकों की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की थी. इसके साथ-साथ आर्मी चीफ ने अग्रिम स्थानों पर तैनात जवानों से बातचीत करते हुए सैनिकों के उच्च मनोबल और परिचालन तत्परता की सराहना की थी.

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जीओसी समय समय पर लेते हैं जायजा

आपको बताते चलें कि जीओसी अक्सर हालात की समीक्षा और तैयारियों का जायजा लेते रहते हैं. जीओसी मिश्रा सेना प्रमुख के दौरे के पहले दो फरवरी, 2026 को भी यहां पहुंचे थे.

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किश्तवाड़ क्यों चर्चा में है?

किश्तवाड़ संवेदनशील इलाका है. जो आतंकवादी गतिविधियों के चलते दशकों से सेना और सुरक्षाबलों की सुर्खियों में रहा है. फिलहाल जैश का कमांडर सैफुल्लाह यहीं छिपा है. सेना और सुरक्षा एजेंसियां उसे ठिकाने लगाने के लिए ऑपरेशन चला रही हैं. पिछले हफ्ते भी यहां एक आतंकी मारा गया था. उसके पहले किश्तवाड़ के चत्रू जंगल क्षेत्र में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त ऑपरेशन त्राशी-I लॉन्च हुआ था, तब भी एक आतंकी ढेर हुआ था. 

किश्तवाड़ जिले के घने जंगलों में 4 फरवरी को मुठभेड़ में मारा गया आतंकी जैश ए मोहम्मद का स्वारुद्दीन खान उर्फ आदिल था. साल 2007 में डोडा से अलग होकर किश्तवाड़ अस्तित्व में आया. भौगोलिक स्थिति के लिहाज से यह पूरा इलाका बेहद संवेदनशील क्षेत्र है.