
Kanpur Lamborghini Accident: क्या अगर किसी के पास महंगी-महंगी गाड़ियां हैं. 6 से 10 करोड़ तक की लैम्बॉर्गिनी कार है, घर में तो 100 करोड़ से ज्यादा की कारें हैं तो क्या उसके पास मिस्टर इंडिया जैसी पावर आ सकती है. वो पलक झपकते ही ‘गायब’ हो सकता है. बिल्कुल वैसे ही जैसे कानपुर में लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने के बाद अरबपति पिता का बेटा शिवम मिश्रा हो गया. 18 घंटे तक कानपुर की पुलिस ने उसे अदृश्य बना दिया, अज्ञात बना दिया.
आठ फरवरी को दोपहर करीब 1 बजकर 50 मिनट पर लेम्बॉर्गिनी कार चला रहे अरबपति पिता के बेटे शिवम मिश्रा ने सड़क को अपने पिता का पर्सनल रेसिंग ट्रैक समझ लिया और सामने जो आया उसे कुचल दिया. हादसे में 6 लोग घायल हो गए. एक व्यक्ति बुरी तरह जख्मी हो गया. लेकिन इसके बाद क्या हुआ. शिवम मिश्रा अचानक अदृश्य हो गया. वहां मौजूद हर किसी ने देखा कि कार में कानपुर के तंबाकु किंग कहे जाने वाले केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा सवार था. उसे पूरा शहर पहचानता था, वहां के लोग पहचानते थे लेकिन कानपुर पुलिस की पहचान में नहीं आ रहा था. पुलिस ने उसे अदृश्य कर दिया. आप पैसे वाले की ताकत देखिए. एनकाउंटर में आगे रहने वाली पुलिस ने भी लेम्बोर्गिनी वाले चालक को करोड़ों की कार से कुचलने वाले गुनहगार को 18 घंटे तक अदृश्य कर दिया . अज्ञात बनाये रखा. ये पैसे की ताकत है मित्रों. FIR जो दुर्घटना के बाद लिखी गई उसमें कार सवार की जगह लिखा है अज्ञात, पिता का नाम भी अज्ञात है. क्या इस देश में अरबपति इसी तरह अज्ञात हो जाते हैं. या फिर सिस्टम इतना बौना हो गया कि उसे सच दिखाई देना बंद हो गया. इस हादसे के बाद पुलिस की तरफ से जो बयान दिया गया वो आपको जरूर पता होना चाहिए. पुलिस ने बताया कि अभियोग पंजिकृत कर लिया गया है. विवेचना की जा रही है. विवेचना में जो भी तथ्य प्रकाश में आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी. कौन सा तथ्य प्रकाश में आने का इंतजार कर रही है पुलिस. जहां तक तथ्य का सवाल है तो क्या पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले तथ्य को नहीं देखा.
आपको भी कानपुर हादसे से ठीक पहले का सीसीटीव फुटेज देखना चाहिए. घड़ी में 1 बजकर 49 मिनट हो रहा है. कार एक ट्रैफिक सिग्नल से गुजरती है और इस टू सीटर कार में सिर्फ एक ड्राइवर दिख रहा है. साथ वाली सीट पर कोई नहीं है. लाल रंग की सीट साफ साफ दिखाई दे रही है
मित्रो इसके 1 मिनट बाद यानी 1 बजकर 50 मिनट पर हादसा हुआ. ये तस्वीरें हादसे के तुरंत बाद की हैं. इस वीडियो में शिवम मिश्रा के बाउंसर उन्हें कार के बाहर निकाल रहे हैं. क्या FIR में शिवम मिश्रा का नाम शामिल करने के लिए ये तथ्य काफी नहीं थे. आखिर क्यों शिवम मिश्रा को पहचानने में और FIR में उसका नाम जोड़ने में घंटों लग जाते हैं.
जिस शिवम मिश्रा को बॉलीवुड के सितारों से लेकर कानपुर का बच्चा बच्चा पहचानता है. महंगी गाड़ियों और प्राइवेट जेट के साथ जिस शिवम मिश्रा की तस्वीरें कानपुर में हर किसी ने देखी हैं. उस शिवम मिश्रा को एक्सीडेंट के बाद कार से उतरते हुए देख कानपुर की पुलिस 18 घंटे तक पहचान ही नहीं पाई और अरबपति पिता के पुत्र को शुरुआती FIR में अज्ञात घोषित कर दिया गया और तो और ये थ्योरी तक सामने आ गई कि गाड़ी कोई और चला रहा था.
किसी रसूखदार और अरबपति द्वारा जब भी देश में कोई बड़ा हादसा होता है. तो यही कहा जाता है गाड़ी कोई और चला रहा था. लेकिन यहां CCTV फुटेज और उसके बाद की तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहा था..गाड़ी अरबपति कारोबारी का बेटा ही चला रहा था.
इस तरह के हादसे के बाद कार चालक को बचाने के लिए एयरबैग तकनीक होती है. सीट में सेंसर की मदद से वो एयरबैग खुल जाता है जहां कोई बैठा होता है. जिस लैम्बॉर्गिनी कार से ये हादसा हुआ है. उस कार के अंदर सिर्फ ड्राइवर सीट के एयरबैग खुले हैं. जिससे ये पता चलता है कि ड्राइवर के बगल वाली सीट पर कोई मौजूद था ही नहीं.
आपसे या आपकी तरह किसी आम आदमी की मोटरसाइकिल से कहीं गलती से टक्कर हो जाए तो आप इस वक्त थाने में बैठे होते. पुलिसिया कार्रवाई के बाद अगर आपको छोड़ भी दिया जाता तो महीनों या सालों तक थाने और कोर्ट के चक्कर काटते रह जाते. लेकिन कोई अरबपति है या अरबपति का बेटा है तो उसे सिस्टम से कानून से डरने की कोई जरूरत नहीं है. वो अपराध करके भी भागेगा नहीं, अपनी कोठी में, अपने महल में आराम फरमाएगा. ठीक उसी तरह जिस तरह अरबपति केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा अपने घर पर आराम फरमा रहा है. जांच के लिए कानपुर पुलिस के दो सितारा अधिकारी केके मिश्रा के आवास पर पहुंचे. लेकिन पुलिस की क्या हैसियत कि मिश्रा जी के घर में घुस पाए. दो सितारा अधिकारी गेट के बाहर से वीडियो बनाकर लौट गए. शिवम मिश्रा को ले जाना तो छोड़िये, पूछताछ तक नहीं कर पाए. क्या बिना हेलमेट पहने बाइक से पहुंचे इन पुलिस अधिकारियों को ये डर भी नहीं है कि अगर शिवम मिश्रा पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो कल को ये भी किसी अरबपति पिता के बेटे की करोड़ों की कार के सामने आ सकते हैं.
अरबपति पिता का पुत्र होने पर कितने विशेषाधिकार मिल जाते हैं. इसका एक और उदाहरण आपको समझिए कि जहां हादसा हुआ. वहां मौजूद कई लोगों ने ये दावा किया कि कार चालक नशे में लग रहा था. लेकिन अभी तक शिवम मिश्रा का मेडिकल टेस्ट तक नहीं हुआ है. हादसे को 31 घंटे बीत चुके हैं. अब अगर मेडिकल हो भी गया तो ये कैसे साबित होगा कि शिवम मिश्रा नशे में था या नहीं.
ये पहली बार नहीं है जब किसी करोड़पति पिता के पुत्र ने अपनी करोड़ो की कार से फुटपाथ पर खड़े लोगों को टक्कर मारी हो और ये भी पहली बार नहीं है जब हादसे के बाद उसे अज्ञात घोषित करने की कोशिश की गई हो. हर बार की तरह इस बार भी एक पुलिस अधिकारी को लापरवाही करने के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया गया. कानपुर के ग्वालटोली थाना क्षेत्र के इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया गया है.
अभी इंस्पेक्टर साहब को लाइनहाजिर कर दिया गया है. फिर कुछ ही दिनों में जब मामला ठंडा हो जाएगा, तब लाइन पर ले आया जाएगा. ये तो इनके लिए आम बात है. जब ये मामला सामने आया. तब सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया में हर तरफ इस हादसे की तस्वीरें वायरल हुईं. शिवम मिश्रा की तस्वीर भी सामने आई. आखिरकार पुलिस ने प्रेशर में आकर शिवम मिश्रा का नाम FIR में जोड़ दिया. लेकिन सवाल तो अभी भी यही है कि आखिर शिवम मिश्रा पर कार्रवाई कब होगी. पुलिस की विवेचना कब खत्म होगी. क्या शिवम मिश्रा का मेडिकल करवाया जाएगा. उसे गिरफ्तार किया जाएगा.
शिवम मिश्रा को अदृश्य और अज्ञात होने की ताकत कैसे मिली अब आपको ये भी समझना चाहिए. शिवम मिश्रा लग्जरी कारों का शौकीन है. उसके पास ऐसी एक नहीं कई कारें हैं. शिवम ने अपने बेटे के बर्थडे सेलिब्रेशन में बॉलीवुड के कई अभिनेताओं को बुलाया था. पार्टी में करोड़ों रुपए खर्च किए थे. इसके बाद ही वो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर भी आया था. शिवम मिश्रा के पिता केके मिश्रा बड़े तंबाकू कारोबारी हैं. बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से इनकी कंपनी है. ये कंपनी कानपुर की टॉप गुटखा कंपनियों को तंबाकू सप्लाई करती है. करीब 2 साल पहले कंपनी के हेड ऑफिस पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था.
तब केके मिश्रा की दिल्ली स्थित कोठी से 100 करोड़ से ज्यादा की तो सिर्फ कारें मिली थीं. 16 करोड़ की रोल्स रॉयस फैंटम कार, लेम्बोर्गिनी, फरारी, मॅकलैरेन जैसी कारें इनके गराज में खड़ी रहती हैं. आज पूरे देश को ये जानना चाहिए कि शिवम मिश्रा की तरह अदृश्य अज्ञात होने की पावर अगर किसी को चाहिए तो ये कारें अपने गराज में खड़ी करनी पड़ेंगी.
एक सवाल आज कानपुर पुलिस को भी खुद से करना चाहिए कि वो एक अरबपति पिता के पुत्र के सामने असहाय क्यों नजर आ रही है. क्यों 6 लोगों को कुचलने वाले शिवम मिश्रा को वो छूना तो दूर उससे पूछताछ के लिए उसके घर में घुस तक नहीं पा रही है.
सच तो ये है कि शिवम मिश्रा जैसे अमीरजादे, जिनके पास करोड़ों की गाड़ी है. उन्हें लगता है कि सड़क पर चलने वाले लोग भिखारी हैं. ये जब चाहें, उन्हें रौंद सकते हैं. कुचल सकते हैं. 50-50 हजार वाले बाउंसर्स के जरिए धमका सकते हैं.

