SC says compensation not a substitute for punishment: आज के समय में कुछ अपराधी ऐसे होते हैं जो पीड़ित को पैसे देकर जेल के सलाखों से बच जाते हैं. ऐसा ही कुछ मद्रास हाई कोर्ट ने किया था. उन्होंने पीड़ित को मुआवजा दिलाने का फैसला किया था. पर मामला जब पहुंचा तो मंगलवार के दिन सुप्रीम कोर्ट ने इसका ऐसा जवाब दिया है, जो देश की सभी अदालतों के लिए एक बड़ी चेतावनी है. जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने साफ कर दिया कि मुआवजा पीड़ित के राहत के लिए है, न कि अपराधी के लिए फ्री पास, मद्रास हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि न्याय की तराजू को पैसों से नहीं तौला जा सकता है.
50,000 रुपये मुआवजा देने पर सहमति
जस्टिस विजय बिश्नोई ने बताया कि मुआवजा केवल पीड़ित की हानि की भरपाई के लिए है और इसका उद्देश्य अपराधी को सजा से बचाना नहीं है. सजा का उद्देश्य अपराधियों को रोकना और समाज में संदेश देना है कि कोई भी सामाजिक नियम तोड़ने पर इसका दंड भुगतेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें हत्या के प्रयास के मामले में तीन साल की जेल को सिर्फ दो महीने में घटा दिया गया था, क्योंकि अपराधियों ने प्रत्येक को 50,000 रुपये मुआवजा देने पर सहमति दी थी.
कोर्ट ने साफ किया कि सजा का मकसद न तो अधिक कठोर होना चाहिए और न ही बहुत नरम, ताकि उसका रोकथाम प्रभाव कमजोर न पड़े. सजा समाज में नैतिक और सामाजिक नियमों की सुरक्षा के लिए होती है. मुआवजा पीड़ित के हानि के लिए है, ताकि उसे हुए नुकसान और चोट का कुछ राहत मिल सके, न कि अपराधी को अपराध की जिम्मेदारी से छोड़ने के लिए.
ट्रायल कोर्ट की सजा को बिना सोच-समझे कम कर दिया जाता है
सुप्रीम कोर्ट ने चेताया कि गंभीर अपराधों में मुआवजा बढ़ाकर सजा घटाना खतरनाक है. इससे समाज को यह संदेश जा सकता है कि अपराधी केवल पैसे देकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं. कई हाई कोर्टों में ये गलत प्रवृत्ति देखी गई है कि वे ट्रायल कोर्ट की सजा को बिना सोच-समझे कम कर देते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनुचित और गलत प्रथा बताया है.
कोर्ट ने कहा कि अपराधियों को माफ करने के लिए मुआवजा देना न्याय की भावना के खिलाफ है. यह केवल पीड़ित की राहत के लिए है और सजा की जगह नहीं ले सकता है. सभी अदालतों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सजा और मुआवजा के बीच अंतर साफ रहे और समाज में सही संदेश जाए कि अपराध की कीमत सिर्फ पैसे से नहीं चुकाई जा सकती है.
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