
Somaliland: भारत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उन फर्जी खबरों का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि सोमालीलैंड गणराज्य के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आधिकारिक बातचीत की और भारत सोमालीलैंड को मान्यता देने के लिए तैयार है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक फैक्टचेक पोस्ट में इन दावों को फर्जी खबर करार दिया और कहा कि यह सूचना झूठी थी. मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि फर्जी खबर! नीचे दी गई पोस्ट फर्जी हैं!
बता दें, ये बयान तब आया जब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में यह दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति से औपचारिक बातचीत की थी और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देने की प्रक्रिया तेज हो गई है. इन संदेशों में यह भी कहा गया कि सोमालिया ने भारत से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इसे भी खारिज कर दिया.
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— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) January 3, 2026
इजराइल सोमालीलैंड को दे चुका है मान्यता
बता दें, सोमालीलैंड, जो 1991 से सोमालिया से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करता आया है को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई मान्यता नहीं मिली है सिवाय इजराइल के जिसने 2025 में सोमालीलैंड को औपचारिक रूप से एक संप्रभु राज्य के रूप में स्वीकार किया. सोमालीलैंड के संबंधों को लेकर पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो गई है. सोमालीलैंड के विदेश मंत्रालय ने इजराइल के साथ अपने संबंधों को पूरी तरह से राजनयिक बताया और कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हुए संचालित हो रहे हैं.
सोमालीलैंड ने हाल ही में यह दावा किया था कि उसने इजराइल के साथ किसी सैन्य ठिकाने या फिलिस्तीनियों के पुनर्वास को लेकर कोई समझौता नहीं किया है, हालांकि सार्वजनिक रूप से अब्राहम समझौते में शामिल होने की पुष्टि की जा चुकी है. इस बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमालीलैंड के अब्राहम समझौते में शामिल होने की पुष्टि की थी.
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सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद ने अल जजीरा को बताया था कि सोमालीलैंड ने फिलिस्तीनियों के पुनर्वास, अदन की खाड़ी में सैन्य अड्डे की स्थापना और अब्राहम समझौते में शामिल होने जैसी शर्तें स्वीकार की थीं. हालांकि, सोमालीलैंड के अधिकारियों ने इन आरोपों को नकारा किया है. सोमालिया में इस स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन भी बढ़ रहे हैं, विशेषकर मोगादिशु, बैदोआ, और धुसामारेब जैसे शहरों में जहां लोग इजराइल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता दिए जाने को लेकर नाराजगी जता रहे हैं. अफ्रीकी संघ और यूरोपीय संघ ने भी सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात दोहराई है. सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही और भी देश इस क्षेत्र को मान्यता देंगे, जबकि सोमालिया का मानना है कि यह उसका हिस्सा है. सोमालीलैंड ने अपनी स्वतंत्र सरकार, मुद्रा और सेना होने के बावजूद अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति नहीं पाई है.
