दक्षिणी राज्य लंबे समय से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे थे और 16वें वित्त आयोग में उनको सिफारिशों को मान लिया गया है. इस बार के बजट में दक्षिण भारत के 5 राज्यों (कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु) की हिस्सेदारी का बढ़ाया गया है. इसके अलावा हिंदी पट्टी के पांच राज्य (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान) की हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिली है.
दक्षिण राज्य लंबे समय यह कहते हुए मांग कर रहे थे कि विकास के अलग-अलग क्षेत्र में उनके अन्य राज्यों से बेहतर प्रदर्शन रहा है, इसलिए उनको मिलने वाले हिस्से में इजाफा किया जाना चाहिए. जिस राज्य की देश की कमाई यानी GDP में ज्यादा हिस्सेदारी है रही है उसे फायदा दिया गया जिसका पैरामीटर 10% है. इसके अलावा कोई राज्य क्षेत्रफल में कितना बड़ा है, इस आधार पर दिए जा रहे महत्व को कम कर दिया गया है.

इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 में कुल 15.26 लाख करोड़ के टैक्स पूल से पांचों दक्षिणी राज्यों को इस बार 18330 करोड़ रुपये 15वें वित्त आयोग के मुकाबले अतिरिक्त मिलेंगे. जबकि हिंदी भाषी पांच राज्यों को अपने पिछले हिस्से की तुलना में कुल मिलाकर 17338.28 करोड़ रुपये की गिरावट देखने को मिलेगी.
दक्षिण के किस राज्य की कितनी हिस्सेदारी बढ़ी?
दक्षिणी राज्यों में कर्नाटक की हिस्सेदारी 3.64 प्रतिशत से बढ़कर 4.13 प्रतिशत हो गई है. केरल की हिस्सेदारी 1.92 प्रतिशत से बढ़कर 2.38 फीसद हो गई. आंध्र प्रदेश की 4.04 प्रतिशत से बढ़कर 4.21% हो गई. तेलंगाना की 2.10 से बढ़कर 2.17 फीसद और तमिलनाडु की 4.07 प्रतिशत से बढ़कर 4.09 प्रतिशत हो गई है.
क्यों हुआ बदलाव?
यह बदलाव क्यों हुआ है अगर इस पर नजर डालें तो इसके पीछे आयोग के जरिए अपनाया गया फॉर्मूला है. 16वें वित्त आयोग का नया फॉर्मूला 6 मानदंडों पर टिका हुआ है. जिनमें कुछ नए मानदंड भी शामिल हैं. जैसे- जनसंख्या (17.5 प्रतिशत भार), जनसांख्यिकीय प्रदर्शन (10 प्रतिशत), क्षेत्रफल (10 प्रतिशत), वन (10 प्रतिशत), प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) दूरी (42.5 प्रतिशत) और जीडीपी में योगदान (10 प्रतिशत).
15वें वित्त आयोग के मानडंद कुछ इस प्रकार थे
15वें वित्त आयोग द्वारा अपनाए गए छह मानदंड थे: जनसंख्या (भार 15 प्रतिशत), क्षेत्रफल (15 प्रतिशत), वन और पारिस्थितिकी (10 प्रतिशत), आय दूरी (45 प्रतिशत), कर और राजकोषीय प्रयास (2.5 प्रतिशत) और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन (12.5 प्रतिशत).
वित्त आयोग क्या है?
वित्त आयोग भारत की केंद्रीय व्यवस्था का एक संवैधानिक संस्थान है, जो तय करता है कि केंद्र सरकार और राज्यों के बीच टैक्स का पैसा कैसे बांटा जाएगा. वित्त आयोग का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 में है. जिसके तहत राष्ट्रपति हर पांच साल में एक वित्त आयोग नियुक्त करते हैं.
