जय महाकाल! अगर आप कुछ महीनों के बाद पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जाएंगे तो वहां भी यह उद्घोष सुनाई देगा. सीएम ममता बनर्जी ने बंगाल का सबसे बड़ा महाकाल मंदिर बनाने की घोषणा की है. अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और जनवरी के दूसरे हफ्ते में मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी. ऐसे समय में जब बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ का शोर है ममता को एक अलग चिंता सता रही है. हां, टीएमसी से निकाले जाने के बाद भी विधायक हुमायूं कबीर की सियासत ममता की जगह भाजपा को फायदा पहुंचा सकती है. ममता मुस्लिम वोटों को लेकर तो कॉन्फिडेंट हैं लेकिन अभी का माहौल उन्हें हिंदू वोटों के बिखरने का संकेत दे रहा है.
2021 के विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी 215 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही थी लेकिन भाजपा का प्रदर्शन बढ़ती चुनौती का संकेत था. भाजपा ने 293 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे और 77 सीटें जीतने में कामयाबी मिली. वोट शेयर टीएमसी का 48 प्रतिशत और भाजपा का 38 प्रतिशत था. जनादेश एकतरफा था लेकिन यह भी साफ हो गया था कि लेफ्ट, कांग्रेस समेत बाकी दलों के वोटर भाजपा की तरफ शिफ्ट हो गए हैं. इस बार ममता कोई रिस्क लेना नहीं चाहती हैं.
एक साल में बदला फोकस
यही वजह है कि पिछले एक साल से पूरी रणनीति के तहत तृणमूल कांग्रेस भाजपा को हिंदुत्व के मोर्चे पर चुनौती देना शुरू कर चुकी है. छह महीने पहले ही ममता ने दीघा के समुद्री तट पर भगवान जगन्नाथ के एक विशाल मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की थी. भाजपा इस आयोजन से दूर थी. हालांकि महज 30 किमी की दूरी पर शुभेंदु अदिकारी एक अलग धार्मिक समारोह कर रहे थे. भाजपा के नेताओं ने मुर्शिदाबाद में कई मंदिरों का जीर्णोद्धार शुरू कराया है.
ममता की मुश्किल
हां, ममता की मुश्किल यह है कि आरजी कर मेडिकल रेप-मर्डर केस के बाद राज्य की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा का मुद्दा जोर शोर से उठा. भाजपा ने इस पर जमकर आंदोलन किया. ऐसे में ममता ने पहले दुर्गा पूजा के आयोजन पर फोकस बढ़ाया और स्थानीय क्लबों को दिया जाने वाला पैसा बढ़ा दिया. गंगासागर मेले को सफल बनाने के लिए पूरा प्रशासन लगा दिया. स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत ने हो, इसके लिए कुंभ मेले के आयोजन से समझकर ममता ने हर मंत्री को अलग-अलग काम पर लगा दिया. उसी समय से बंगाल के सियासी जानकार कहने लगे थे कि ममता बनर्जी ने भाजपा के हिंदुत्व मॉडल को चुनौती देना शुरू कर दिया है. भाजपा अक्सर ममता पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाती रही है, ऐसे में ममता का नया अवतार भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है.
सिलीगुड़ी में जय महाकाल
दिलचस्प यह भी है कि ममता ने महाकाल मंदिर को लेकर ऐलान उस समय किया जब वह दुर्गा मंदिर (दुर्गा आंगन) की आधारशिला रख रही थीं. दार्जिलिंग में पहले से ही महाकाल मंदिर है. अब सिलीगुड़ी में नया मंदिर बनेगा. वैसे, मुख्य महाकाल मंदिर उज्जैन में शिप्रा नदीं के किनारे है. ममता ने कहा कि लोग मुझ पर तुष्टीकरण का आरोप लगाते हैं लेकिन मैं सही मायने में सेक्युलर हूं. मैं हर धर्मस्थल जाती हूं लेकिन जैसे ही ईद में शामिल होती हूं तो कुछ लोग आलोचना शुरू कर देते हैं.
Today, as I laid the foundation stone of Durga Angan in New Town, I was overwhelmed with a sense of elation and fulfillment. In 2021, UNESCO honoured our beloved Durga Puja with the distinguished recognition of Intangible Cultural Heritage of Humanity, acknowledging its universal… pic.twitter.com/axINeKMJdn
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) December 29, 2025
TMC और भाजपा का गणित
– विधानसभा की 294 सीटों में से 70 से 100 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक हैं. पहले ये वोटर लेफ्ट दलों को वोट करते थे लेकिन बाद में ममता बनर्जी की टीएमसी की तरफ शिफ्ट हो गए.
– मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना जैसे कई जिलों में मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से भी ज्यादा है.
पश्चिम बंगाल परिवर्तन के लिए पूरी तरह तैयार है।
तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल प्रवास के लिए कोलकाता पहुँचा। एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं के इस स्नेह से अभिभूत हूँ।
পশ্চিমবঙ্গ পরিবর্তনের জন্য সম্পূর্ণরূপে প্রস্তুত।
তিনদিনের পশ্চিমবঙ্গ সফরে কলকাতায় পৌঁছেছি। বিমানবন্দরে কর্মী সমর্থকদের… pic.twitter.com/bqQ0Z6FS1T— Amit Shah (@AmitShah) December 29, 2025
– इधर, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का बंगाल दौरा तेज हो गया है. कुछ घंटे पहले गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के तीन दिन के दौरे पर पहुंचे. भाजपा इस बार हिंदू अस्मिता, घुसपैठ, बांग्लादेश में हिंदू की लिंचिंग, एसआईआर के मुद्दे को धार देते हुए मतुआ समुदाय को साधना चाहती है.
