एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन (ALPA-India) ने बारामती एयर क्रैश को लेकर अटकलें या अफवाह न फैलाने की अपील की है. इस हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई. एक बयान जारी कर पायलटों के संघ ने कहा कि बिना पूरी जांच हुए और पुष्ट जानकारी आए नरैटिव तैयार नहीं किया जाना चाहिए. एसोसिएशन ने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि दोनों पायलटों ने आखिरी सांस तक एयरक्राफ्ट और उसमें सवार लोगों को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की होगी. उधर, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पायलटों के थकान और पर्याप्त आराम न मिलने को लेकर चिंता भी जताई है.
फिलहाल जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के समय क्या गड़बड़ हुई थी? इस बीच, भारतीय पायलटों के संगठन ने कमजोर फ्लाइट सुरक्षा नियमों पर चिंता जताई. उन्होंने उन्हीं Flight Duty Time Limitations (एफडीटीएल) नियमों की फिर चर्चा की है जिसकी बात कुछ हफ्ते पहले इंडिगो संकट और उससे पहले एयर इंडिया प्लेन क्रैश के समय भी हुई थी. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने उन रिपोर्टों पर गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की है कि सरकार हाल में लागू फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों में छूट देने पर विचार कर रही है. FIP प्रेसिडेंट कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा, ‘यह भारतीय विमानन सुरक्षा के लिए एक दुखद क्षण है.’
DGCA के पूर्व महानिदेशक डॉ. नसीम जैदी भी डॉक्टर और पेशेवरों की 2010 में बनी कमेटी में शामिल थे. FDTL पर वैज्ञानिक रूप से आधारित रिपोर्ट कमेटी ने 2011 में पेश की थी. अजित पवार प्लेन क्रैश के बाद यह रिपोर्ट फिर से चर्चा में है. रिपोर्ट में कहा गया है-
– थकान बायोलॉजिकल है. इसे रोस्टरिंग या सॉफ्टवेयर से दूर नहीं किया जा सकता.
– आधी रात से सुबह 6 बजे तक के दौरान मानवीय सतर्कता कम होती है. यह सबसे ज्यादा जोखिम भरा समय होता है.
– पायलटों को पर्याप्त रिकवरी के लिए आराम और साप्ताहिक छुट्टी की आवश्यकता होती है.
– ड्यूटी घंटों की सीमा पार होती है तो गलतियों की दर तेजी से बढ़ती है.
हालांकि आगे नियम ऐसे बने नहीं फिर 2019 में पायलटों के संघ ने दिल्ली हाई कोर्ट में नियमों को चुनौती दी, जो उनके हिसाब से मनमाने थे और पायलटों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था.
अक्टूबर 2023 में DGCA ने डॉ. जैदी की रिपोर्ट के आधार पर FDTL सिविल एविएशन रेगुलेशंस (CAR) तैयार किया.
सतर्क रहने के लिए पर्याप्त आराम चाहिए
पायलटों के संघ का कहना है कि FDTL का मुख्य उद्देश्य पायलटों को पर्याप्त आराम देना है जिससे वे उच्च सतर्कता की स्थिति में रहें और बिना थकान के रहें, जिससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़े. हालांकि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि FDTL को सबसे कम महत्व दिया जाता है और एयरलाइंस को एयरलाइंस के कॉमर्शियल शेड्यूल जारी रखने की छूट दी जाती है. कैप्टन रंधावा ने कहा कि सरकार को नियमों में ढील देकर यात्रियों की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. ये नियम एयरलाइंस को लगभग दो साल का तैयारी का समय देने के बाद लागू किए गए. यह समय इसलिए दिया गया था ताकि पायलटों की संख्या बढ़ाई जा सके. सभी एयरलाइंस नए नियमों का विरोध कर रही थीं. इंडिगो को छोड़कर सभी एयरलाइंस ने नए CAR को लागू करने के लिए पायलटों की भर्ती की. बाद में इंडिगो संकट दिसंबर में पैदा हो गया था.
– दुनिया भर के सभी रेगुलेटरी निकायों के पास यात्री और क्रू सुरक्षा को मुख्य चिंता मानते हुए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन पर सिविल एविएशन रेगुलेशन हैं.
– पायलट की थकान कोई काल्पनिक चिंता नहीं है. यह एक ऑपरेशनल खतरा है, जिसे दुनियाभर में माना जाता है.
– थकान से निर्णय लेने की क्षमता, रिएक्शन टाइम, स्थिति की जानकारी और फैसला लेने की क्षमता कम हो जाती है, ये वही क्षमताएं हैं जिन पर आधुनिक एयरलाइन ऑपरेशन निर्भर होते हैं.
पायलट एसोसिएशन ने कहा है कि जब घटनाएं होती हैं तो सिस्टम या ऑर्गनाइजेशनल की ओर से हमेशा पायलटों को दोषी ठहराया जाता है. FDTL सुरक्षा में कोई भी ढील फ्लाइट क्रू को बढ़े हुए स्वास्थ्य जोखिमों, ऑपरेशनल तनाव और घटना के बाद बलि का बकरा बनाए जाने के जोखिम में डालती है.
